- एप्को की रिपोर्ट में खुलासा,मप्र की रामसर साइट्स पर प्रदूषण का खतरा - तवा वेटलैंड का पानी सबसे स्वच्छ; भोज और सिरपुर वेटलैंड की गुणवत्ता में लगातार गिरावट भोपाल (ईएमएस)। अंतरराष्ट्रीय महत्व की वेटलैंड्स के रूप में पहचान रखने वाली मप्र की रामसर साइट्स बढ़ते प्रदूषण की गंभीर चुनौती से जूझ रही हैं। पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को) की ताजा रिपोर्ट में सामने आया है कि प्रदेश की पांच रामसर साइट्स में से कुछ के जल की गुणवत्ता चिंताजनक स्तर तक पहुंच गई है। विशेष रूप से भोपाल के छोटे तालाब और इंदौर के सिरपुर वेटलैंड की स्थिति गंभीर बताई गई है, जबकि तवा वेटलैंड प्रदेश की सबसे स्वच्छ रामसर साइट के रूप में उभरा है। रिपोर्ट के अनुसार भोपाल के छोटे तालाब में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मात्रा अत्यधिक पाई गई है। यही बैक्टीरिया जलजनित बीमारियों के प्रमुख कारणों में शामिल माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि तालाब का पानी इतना प्रदूषित हो चुका है कि इसका सामान्य उपयोग भी स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। छोटे तालाब में बढ़ा प्रदूषण का स्तर एप्को की रिपोर्ट में भोज वेटलैंड के अंतर्गत आने वाले छोटे तालाब की स्थिति सबसे खराब दर्ज की गई है। यहां जैविक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) का स्तर 12 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गया है, जो जल में कार्बनिक प्रदूषण की अधिकता को दर्शाता है। वहीं रासायनिक ऑक्सीजन मांग (सीओडी) का स्तर 24 मिलीग्राम प्रति लीटर तक रिकॉर्ड किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार इस स्तर का प्रदूषण जलीय पारिस्थितिकी के लिए गंभीर खतरा है। रिपोर्ट में छोटे तालाब के जल को निम्न गुणवत्ता श्रेणी में रखा गया है, जिससे इसकी उपयोगिता अत्यंत सीमित हो गई है। इसके विपरीत भोज वेटलैंड के ही बड़े तालाब (अपर लेक) की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर पाई गई है। यहां घुलित ऑक्सीजन का स्तर 6.8 से 11.2 मिलीग्राम प्रति लीटर के बीच दर्ज किया गया, जो जलीय जीवों के लिए अनुकूल माना जाता है। हालांकि रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि झील की तलहटी में प्रदूषण बढ़ रहा है, जिससे भविष्य में स्थिति प्रभावित हो सकती है। सिरपुर वेटलैंड में जलीय जीवन पर संकट इंदौर स्थित सिरपुर वेटलैंड की स्थिति भी चिंताजनक बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार इसकी निचली झील में घुलित ऑक्सीजन का स्तर घटकर 0.8 से 1.6 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गया है। यह स्तर मछलियों और अन्य जलीय जीवों के अस्तित्व के लिए खतरनाक माना जाता है। सिरपुर वेटलैंड के ऊपरी हिस्से में पानी की कठोरता (हार्डनेस) भी काफी अधिक दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो यहां की जैव विविधता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। सांख्य सागर और यशवंत सागर की स्थिति शिवपुरी स्थित सांख्य सागर वेटलैंड में पानी की गुणवत्ता मिश्रित पाई गई है। गेस्ट हाउस क्षेत्र के दोनों मॉनिटरिंग स्टेशनों पर पानी डी श्रेणी में जबकि कुछ अन्य स्थानों पर सी श्रेणी में दर्ज किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार यह पानी वन्यजीवों और मत्स्य पालन के लिए अभी उपयुक्त माना जा सकता है। इंदौर के यशवंत सागर की जल गुणवत्ता मध्यम श्रेणी की पाई गई है। यहां का पानी उपचार के बाद उपयोग योग्य हो सकता है, लेकिन बिना शोधन के उपयोग की सलाह नहीं दी जाती। तवा वेटलैंड बना स्वच्छता का मॉडल प्रदेश की पांचों रामसर साइट्स में सबसे बेहतर स्थिति तवा वेटलैंड की सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार तवा का पानी अत्यंत स्वच्छ पाया गया है और इसे सीधे पेयजल के रूप में उपयोग किए जाने योग्य माना गया है। एप्को की पर्यावरण अनुसंधान प्रयोगशाला के प्रभारी डॉ. सुब्रत पाणी के अनुसार तवा वेटलैंड जल गुणवत्ता के सभी प्रमुख मानकों पर उत्कृष्ट स्थिति में है। उन्होंने बताया कि जहां बड़े तालाब और यशवंत सागर के पानी को उपयोग से पहले शोधन की आवश्यकता होती है, वहीं तवा का पानी प्राकृतिक रूप से अत्यंत स्वच्छ बना हुआ है। भूजल पर भी पड़ रहा असर पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. सुभाष चंद्र पांडे का कहना है कि छोटे तालाब और बड़े तालाब दोनों में प्रदूषण के संकेत गंभीर हैं। उनके अनुसार बड़े तालाब की तलहटी में लगातार जमा हो रहे कचरे के कारण घुलित ऑक्सीजन का स्तर प्रभावित हो रहा है, जिससे जलीय जीवों के लिए खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि गर्मी के मौसम में बड़े तालाब की तलहटी की व्यापक सफाई कराई जानी चाहिए। वहीं छोटे तालाब की स्थिति को अत्यंत चिंताजनक बताते हुए उन्होंने कहा कि इसमें गिरने वाले 27 से अधिक नालों का वैज्ञानिक चैनलाइजेशन आवश्यक है। विशेषज्ञों के अनुसार छोटे तालाब के आसपास भूजल भी प्रदूषित होने लगा है। क्षेत्र में किए गए कई बोरवेलों में तालाब के प्रदूषित जल का प्रभाव देखा जा रहा है, जो भविष्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। देश में 99 रामसर साइट्स भारत में रामसर साइट्स की संख्या बढक़र 99 हो चुकी है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ स्थित शेखा झील पक्षी विहार को इस सूची में शामिल किया गया है। देश में सर्वाधिक 20 रामसर साइट्स तमिलनाडु में हैं, जबकि उत्तर प्रदेश 11 साइट्स के साथ दूसरे स्थान पर है। मप्र में वर्तमान में पांच रामसर साइट्स हैं, जिनमें भोज वेटलैंड, सिरपुर वेटलैंड, यशवंत सागर, सांख्य सागर और तवा वेटलैंड शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन वेटलैंड्स के संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण पर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो उनकी पारिस्थितिकीय महत्ता और जैव विविधता पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। विनोद / 01 जून 26