01-Jun-2026
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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र कहा भोपाल (ईएमएस)। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा सोमवार को राजगढ में प्रदेश काग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को लेकर की गई टिप्पणी पर पटवारी ने उन्हें पत्र लिख कर स्पष्ट किश है कि वह जनता के सवाल पूछते रहेगें जो उनका कर्तव्य है और वह पूरी विनम्रता के साथ अपनी इस लोकतांत्रिक जिम्मेदारी को निभाते रहेंगे। पत्र में पटवारी ने लिखा है कि यदि गाली देना आपका अधिकार है, तो उसका पालन आप करते रहिए, मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैं जो भी मुद्दे उठाता हूं, वे किसी व्यक्तिगत राजनीति का हिस्सा नहीं होते, बल्कि मध्यप्रदेश की जनता की पीड़ा और जनभावनाओं की अभिव्यक्ति होते हैं। उन्होने पूछा कि क्या किसान की बदहाली सवाल नहीं है? क्या रोज़गार युवाओं का भविष्य सवाल नहीं है? क्या ओबीसी आरक्षण का संकट सवाल नहीं है?क्या पेपर लीक से टूटते सपने सवाल नहीं हैं?क्या नर्सिंग घोटाला सवाल नहीं है?क्या महिलाओं की सुरक्षा सवाल नहीं है?क्या आदिवासियों का विस्थापन सवाल नहीं है?क्या महंगाई और बढ़ता कर्ज सवाल नहीं है? क्या भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी सवाल नहीं है?क्या दूषित पेयजल और बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था सवाल नहीं है?क्या व्यापमं जैसे घोटालों को काली छाया सवाल नहीं है?क्या सरकारी भर्तियों में वर्षों की देरी सवाल नहीं है?क्या सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति सवाल नहीं है? क्या आंगनवाड़ी और संविदा कर्मचारियों की पीड़ा सवाल नहीं है?क्या बढ़ता अपराध और माफियाराज सवाल नहीं है?क्या रेत, शराब और जमीन माफियाओं का संरक्षण सवाल नहीं है?क्या दलितों पर बढ़ते अत्याचार सवाल नहीं हैं?क्या आदिवासी क्षेत्रों में कुपोषण सवाल नहीं है? क्या बिजली कटौती और महंगे बिल सवाल नहीं हैं?क्या छोटे व्यापारियों की आर्थिक बदहाली सवाल नहीं है?क्या नौजवानों का पलायन सवाल नहीं है?क्या सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और दवाइयों की कमी सवाल नहीं है?क्या हर साल बढ़ती आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या सवाल नहीं है?क्या घोषणाओं और जमीन पर हकीकत के बीच का अंतर सवाल नहीं है? पटवारी ने आगें लिखा है कि मुख्यमंत्री जी, मैं फिर आपसे आग्रह कर रहा हूं, आप रोज मुझे गाली दीजिए, लेकिन मध्यप्रदेश की समस्याओं को प्राथमिकता और गंभीरता से हल कीजिए। जहां तक हार और जीत का प्रश्न है, मेरी दृढ़ मान्यता है— जिंदगी की यही रीत है, हार के बाद ही जीत है। मध्यप्रदेश की जागरूक जनता सबकुछ देख रही है, समझ भी रही है और समय आने पर अपना निर्णय भी अवश्य देगी। मैं पूरे विश्वास और पांच लाख प्रतिशत दावे के साथ पुन: दोहरा रहा हूं कि 2028 में मध्यप्रदेश में जनता की सरकार बनेगी। ऐसी सत्ता, जो नम्रता, जवाबदेही और संवेदनशीलता के साथ काम करेगी। आपसे केवल इतना अनुरोध है कि अपने बचे हुए ढाई वर्षों में ईमानदारी से काम कीजिए। कर्ज, कमीशन और करप्शन के कल्चर को कम कीजिए, क्योंकि सत्ता हमेशा नहीं रहती, लेकिन जनता की पीड़ा और इतिहास का निर्णय हमेशा याद रखा जाता है।