क्षेत्रीय
02-Jun-2026
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- डब्लूटीटी फीडर खिताब जीतने वाली सबसे युवा भारतीय महिला बनीं - सिंड्रेला दास के साथ जोड़ी बनाकर युगल में भी गाड़े झंडे नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय टेबल टेनिस के इतिहास में 1 जून 2026 का दिन एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ। कोसोवो के प्रिस्टिना में आयोजित डब्लूटीटी फीडर प्रिस्टिना 2026 में भारत की 15 वर्षीय सनसनी दिव्यांशी भौमिक ने जादुई प्रदर्शन करते हुए दोहरा स्वर्ण पदक अपने नाम किया। दिव्यांशी डब्लूटीटी फीडर महिला एकल का खिताब जीतने वाली इतिहास की सबसे युवा भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई हैं। विश्व रैंकिंग में 211वें स्थान पर मौजूद इस युवा स्टार ने असाधारण खेल भावना का परिचय देते हुए फाइनल में चीनी ताइपे की विश्व नंबर-38 येह यी-तियन को रोमांचक मुकाबले में 3-2 (8-11, 11-8, 11-5, 7-11, 11-7) से शिकस्त दी। महज 15 साल की उम्र में यह सीनियर अंतरराष्ट्रीय खिताब जीतकर दिव्यांशी ने वैश्विक स्तर पर भी अपनी धाक जमाई है। वह जापान की दिग्गज मिवा हरिमोतो के बाद डब्लूटीटी फीडर सर्किट पर महिला एकल खिताब जीतने वाली दुनिया की दूसरी सबसे युवा खिलाड़ी बन गई हैं। - रोमांचक फाइनल में जापानी जोड़ी को चटाई धूल दिव्यांशी की यह स्वर्णिम सफलता यहीं नहीं रुकी। एकल वर्ग में इतिहास रचने के बाद उन्होंने भारत की ही अन्य प्रतिभावान खिलाड़ी सिंड्रेला दास के साथ जोड़ी बनाकर महिला युगल का स्वर्ण पदक भी अपने नाम कर लिया। एक बेहद कड़े और सांस रोक देने वाले फाइनल मुकाबले में इस भारतीय जोड़ी ने जापान की साची आओकी और कोकोना मुरामात्सू की जोड़ी को 30 मिनट से अधिक चले मैच में 3-2 (7-11, 14-12, 12-14, 11-8, 11-7) से पराजित किया। - भारतीय टेबल टेनिस का स्वर्णिम भविष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष-40 में शामिल खिलाड़ी को धूल चटाना और एक ही टूर्नामेंट में दोहरे स्वर्ण पदक हासिल करना यह दर्शाता है कि भारत का यूथ डेवलपमेंट सिस्टम अब वैश्विक स्तर पर चैंपियंस तैयार कर रहा है। दिव्यांशी और सिंड्रेला की इस जोड़ी ने दबाव के क्षणों में जिस परिपक्वता का प्रदर्शन किया, उसने साबित कर दिया है कि वे भारतीय खेल जगत के उभरते हुए सितारे हैं। प्रकाश/01 जून 2026