- राजेन्द्र माथुर सभागार में व्याख्यान सम्पन्न; वक्ताओं ने कहा- तुमको जो हो पसंद की तर्ज पर चल रही आज की पत्रकारिता इंदौर (ईएमएस)। हिन्दी पत्रकारिता की द्विशताब्दी (200 वर्ष) पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मातृभाषा उन्नयन संस्थान, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्य ग्राम के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को राजेन्द्र माथुर सभागार में एक विशेष व्याख्यान माला का आयोजन किया गया। ‘हिन्दी पत्रकारिता की द्विशताब्दी और एआई युग से क़दमताल’ विषय पर आयोजित इस विमर्श में देश के वरिष्ठ पत्रकारों ने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की चुनौतियों पर बेबाकी से अपने विचार रखे। इस अवसर पर ई-साहित्य ग्राम डॉट कॉम वेबसाइट का शुभारंभ और समागम पत्रिका का लोकार्पण भी किया गया। - तकनीक शेर की सवारी की तरह : जयदीप कर्णिक मुख्य अतिथि एवं नोएडा से आए वरिष्ठ पत्रकार जयदीप कर्णिक ने तकनीक और मानवीय हुनर के संतुलन पर जोर देते हुए कहा, पिछले ढाई दशक में पत्रकारिता का स्वरूप तेजी से बदला है। तकनीक शेर की सवारी की तरह है; यदि आप उस पर सवार हैं तो वह आपकी गुलाम है, लेकिन यदि वह आप पर सवार हो जाए तो आपको निगल सकती है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि जो पत्रकार पहले रगड़ाई-घिसाई (जमीनी अनुभव) से नहीं गुजरा है, वह केवल एआई वाला बनकर रह जाएगा। एआई मानवता के लिए भी चुनौती बन सकता है, इसलिए इसके विध्वंसकारी इस्तेमाल को लेकर सजग रहने की जरूरत है। - अब रिपोर्टर नाम की संस्था को बचाने की आवश्यकता : भुवनेश सेंगर दी लपेटा के पत्रकार भुवनेश सेंगर ने पत्रकारिता के गिरते स्तर पर चिंता जताते हुए कहा कि पहले पत्रकारिता समाज सुधार और जनजागरण का माध्यम थी, लेकिन अब यह कुतर्कों पर आधारित होकर एक इवेंट में बदलती जा रही है। उन्होंने कहा, आज की पत्रकारिता तुमको जो हो पसंद वही बात करेंगे की तर्ज पर चल रही है। एआई से ज्यादा जरूरी अपनी प्राकृतिक बुद्धिमत्ता को मजबूत करना है और अब रिपोर्टर नाम की संस्था को बचाने की आवश्यकता है। - एल्गोरिदम की गुलाम होती डिजिटल पत्रकारिता :: व्याख्यान के दौरान वरिष्ठ पत्रकारों ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि आज की डिजिटल पत्रकारिता पाठकों की वास्तविक पसंद को छोड़कर टीआरपी, व्यूज, ट्रेंड्स और एल्गोरिदम की गुलाम होती जा रही है, जो इस विधा के पतन का मुख्य कारण है। - अपडेट रहना और समय के साथ चलना जरूरी :: वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार ने कहा कि यदि तकनीक को बोझ समझा गया तो इस दौर में पिछड़ना तय है। पत्रकारिता में टिके रहने के लिए खुद को लगातार अपडेट करना होगा। वहीं वरिष्ठ पत्रकार अरविंद तिवारी ने एआई के सकारात्मक पक्ष को रखते हुए कहा कि इस तकनीक ने काम को आसान बनाया है और समय के साथ बदलना बेहद जरूरी है। इससे पूर्व, कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा महाराजा अग्रसेन की वंदना से हुआ। शब्द स्वागत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने किया। अतिथि स्वागत प्रदीप जोशी, संजय त्रिपाठी, मणिमाला शर्मा और नितेश गुप्ता सहित अन्य सदस्यों ने किया। कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य के लिए अंकित तिवारी व देवेंद्र जैन का सम्मान भी किया गया। संचालन अंशुल व्यास ने किया एवं आभार कीर्ति मेहता ने माना। प्रकाश/01 जून 2026