क्षेत्रीय
02-Jun-2026
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- निचले ग्रामो में गहराया जल संकट - ग्राम डुड़गा में 117 साल पुराने तालाब का गहरीकरण शुरू कराया ग्रामीणों ने कोरबा (ईएमएस) कोरबा जिलान्तर्गत कटघोरा क्षेत्र में जल प्रदूषण और जल संकट की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। अहिरन नदी के किनारे बसे ग्राम डुड़गा सहित कई ग्रामो के ग्रामीण इन दिनों भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि नगर पालिका कटघोरा का नाले के माध्यम से निकलने वाला गंदा और सीवर का जल बिना किसी शोधन (ट्रीटमेंट) के सीधे अहिरन नदी में छोड़ा जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस लापरवाही के चलते नदी का जल पूरी तरह दूषित हो चुका है। हालात ऐसे बन गए हैं कि निचले ग्रामो के लोग अब नदी के जल का उपयोग करने से कतराने लगे हैं। पीने और दैनिक उपयोग के लिए स्वच्छ जल नहीं मिलने से जल संकट और गहरा गया है, वहीं जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। ग्रामीण बताते हैं कि एक समय अहिरन नदी और ग्राम का लगभग 117 वर्ष पुराना तालाब पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा हुआ करता था। इंसान से लेकर पशु-पक्षी और खेती-किसानी तक सभी इसी जल स्रोत पर निर्भर थे, लेकिन वर्तमान में नदी के प्रदूषित होने से स्थिति चिंताजनक हो गई है। समस्या की गंभीरता को देखते हुए ग्राम डुड़गा के ग्रामीणों ने अब खुद पहल करते हुए पुराने तालाब के गहरीकरण का कार्य शुरू कर दिया है। जेसीबी मशीन की मदद से तालाब की खुदाई कर उसे गहरा किया जा रहा है, ताकि बारिश का जल उसमें संग्रहित हो सके और सालभर ग्राम के लोगों व पशुओं को जल मिल सके। ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने प्रशासन से मांग की है कि नगर पालिका परिषद कटघोरा नगर से निकलने वाले गंदे जल को बिना शोधन नदी में छोड़े जाने पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही अहिरन नदी को स्वच्छ बनाने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं। फिलहाल, प्रशासनिक पहल के इंतजार में ग्रामीण अपने स्तर पर जल संकट से निपटने के लिए तालाब को पुनर्जीवित करने में जुटे हुए हैं, लेकिन समस्या के स्थायी समाधान के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की सक्रियता बेहद जरूरी है। 02 जून / मित्तल