कांकेर(ईएमएस)। जिले में प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है, जहां ब्रिटिश काल का ऐतिहासिक आबकारी वृत्त कार्यालय वर्षों से कागजों पर तो अंतागढ़ में दर्ज है, लेकिन वास्तविक संचालन भानुप्रतापपुर से किया जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार अंतागढ़ स्थित मूल कार्यालय भवन देखरेख के अभाव में खंडहर में तब्दील हो चुका है और अतिक्रमण की चपेट में आ गया है। इस स्थिति को लेकर क्षेत्र में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत विभाग ने दावा किया है कि अंतागढ़ कार्यालय नियमित रूप से खुलता है और भानुप्रतापपुर से संचालन का कोई आधिकारिक आदेश नहीं है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यह दावा जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाता और कार्यालय वास्तव में लंबे समय से वहां सक्रिय नहीं है। स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय पर्वों—15 अगस्त और 26 जनवरी—पर भी अंतागढ़ स्थित कार्यालय में ध्वजारोहण नहीं होता, जिससे प्रशासनिक उपेक्षा और गहराने के आरोप लग रहे हैं। नगर पंचायत अध्यक्ष राधेलाल नाग ने कहा कि यदि भवन जर्जर है तो नगर पंचायत वैकल्पिक भवन उपलब्ध कराने को तैयार है, लेकिन कार्यालय को तुरंत अंतागढ़ से ही संचालित किया जाना चाहिए। वहीं आबकारी निरीक्षक ओम प्रकाश साहू ने सफाई देते हुए कहा कि भवन की स्थिति खराब होने के कारण अस्थायी रूप से कार्य भानुप्रतापपुर से किया जा रहा है और नए भवन की स्वीकृति के लिए लोक निर्माण विभाग को पत्र भेजा गया है। लोक निर्माण विभाग के एसडीओ गोविंद मिलिंद ने बताया कि विभाग को पत्र प्राप्त हुआ है, लेकिन आवश्यकताएं स्पष्ट नहीं की गई हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही स्थल निरीक्षण कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय जनता की मांग है कि ऐतिहासिक कार्यालय की पहचान को बनाए रखने के लिए इसे तत्काल अंतागढ़ में पुनः संचालित किया जाए और स्थायी भवन की व्यवस्था की जाए। ईएमएस(राकेश गुप्ता)02 जून 2026