पटना (ईएमएस)। बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से एक सीट की मांग की है। पार्टी का कहना है कि राज्यसभा चुनाव में अपना दावा छोड़कर इंडिया गठबंधन का समर्थन करने के बदले उसे विधान परिषद में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। एआईएमआईएम के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने कहा कि जब उनकी पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के दौरान इंडिया गठबंधन का साथ दिया था, तब राजद नेता तेजस्वी यादव ने भविष्य में पार्टी के हितों पर विचार करने का आश्वासन दिया था। अब समय आ गया है कि उस वादे को पूरा किया जाए। राजनीतिक समीकरणों के अनुसार, बिहार विधानसभा में एआईएमआईएम के पांच विधायक हैं। विपक्षी इंडिया गठबंधन के पास इतनी संख्या है कि वह एक सीट आसानी से जीत सकता है, लेकिन दूसरी सीट के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसे में एआईएमआईएम की मांग ने राजद के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अख्तरुल इमान ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी पार्टी को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला तो वह अपना उम्मीदवार भी उतार सकती है। इससे विपक्षी खेमे के वोटों का बंटवारा होने की आशंका बढ़ सकती है। एआईएमआईएम का तर्क है कि उसका मुख्य उद्देश्य भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को राजनीतिक लाभ से रोकना है, लेकिन इसके लिए सहयोगी दलों को भी उसकी राजनीतिक हिस्सेदारी सुनिश्चित करनी होगी। 18 जून को होने वाले विधान परिषद चुनाव से पहले अब सभी की नजरें तेजस्वी यादव के फैसले पर टिकी हैं। यदि राजद एआईएमआईएम की मांग मानता है तो विपक्षी एकजुटता को मजबूती मिल सकती है, लेकिन मांग ठुकराए जाने की स्थिति में बिहार की राजनीति में नए समीकरण बनते दिखाई दे सकते हैं। सुबोध/०२-०६-२०२६