नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत ने जम्मू-कश्मीर का उल्लेख करने वाले पाकिस्तान और यूरोपीय संघ (ईयू) के संयुक्त बयान को सख्ती से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं तथा किसी भी बाहरी पक्ष को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि भारत अपने आंतरिक मामलों पर संयुक्त बयान में किए गए ऐसे “अनावश्यक और बेवजह” उल्लेख को पूरी तरह अस्वीकार करता है। उन्होंने कहा कि जिन पक्षों का इन मामलों से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है, उन्हें इस तरह की टिप्पणियों से बचना चाहिए। दरअसल, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी पाकिस्तान-ईयू संयुक्त प्रेस वक्तव्य में जम्मू-कश्मीर का उल्लेख किया गया था। बयान में कहा गया था कि पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर अपना पक्ष रखा, जबकि यूरोपीय संघ ने यूक्रेन संघर्ष पर जानकारी साझा की। दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के अनुरूप विवादों को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से सुलझाने की बात कही थी। भारत ने एक बार फिर दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से जुड़े मुद्दे पूरी तरह भारत के आंतरिक विषय हैं। नई दिल्ली का कहना है कि देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मामलों में किसी तीसरे पक्ष की टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है। यह रुख भारत पहले भी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों और अन्य देशों के बयानों के संदर्भ में स्पष्ट करता रहा है। भारत की इस प्रतिक्रिया को उसकी लंबे समय से चली आ रही कूटनीतिक नीति के अनुरूप माना जा रहा है, जिसमें जम्मू-कश्मीर से जुड़े सभी मुद्दों को द्विपक्षीय या आंतरिक विषय बताया जाता रहा है। सुबोध/०२-०६-२०२६