रिश्तों में छाई धुंध छंटने की उम्मीद नई दिल्ली,(ईएमएस)। अगले सप्ताह होने वाले जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मुलाकात की संभावना जताई जा रही है। फ्रांस की मेजबानी में 15 से 17 जून तक आयोजित होने वाले इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में दोनों नेताओं की उपस्थिति तय मानी जा रही है। ऐसे में दोनों नेताओं की मुलाकात से दोनों देशों के रिश्तों में छाई धुंध भी छंटने की उम्मीद जागी है। हालांकि अभी तक दोनों देशों की ओर से औपचारिक द्विपक्षीय बैठक की घोषणा नहीं की गई है। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार भारत और अमेरिका सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं। यदि यह बैठक होती है तो पिछले कुछ महीनों से दोनों देशों के संबंधों में दिखाई दे रही दूरी को कम करने की दिशा में इसे अहम कदम माना जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस के राष्ट्रपति एम्मुएल मेक्रों सहित अन्य जी7 नेताओं के साथ भी अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें होने की संभावना है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की पिछली मुलाकात फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री के अमेरिका दौरे के दौरान हुई थी। इसके बाद भारत-अमेरिका संबंधों में कुछ मुद्दों को लेकर मतभेद सामने आए। इनमें व्यापारिक नीतियां, भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद और भारत-पाकिस्तान संबंधों पर ट्रंप के कुछ बयान प्रमुख रहे। इन विषयों ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद को प्रभावित किया था। हालांकि हाल के दिनों में रिश्तों में सुधार के संकेत भी मिले हैं। पिछले महीने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को अमेरिका आने का निमंत्रण दिया था। इससे दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ने और सहयोग को नई गति मिलने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। भारत ने अभी तक सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया है कि प्रधानमंत्री मोदी इस निमंत्रण को स्वीकार करेंगे या नहीं। वर्तमान में भारत और अमेरिका एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत कर रहे हैं। पिछले एक वर्ष से इस दिशा में लगातार चर्चा चल रही है। रक्षा, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और निवेश जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की कोशिशें जारी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जी7 सम्मेलन के दौरान मोदी और ट्रंप के बीच मुलाकात होती है तो यह केवल द्विपक्षीय संबंधों के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों पर सहयोग के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होगी। इसके अलावा दिसंबर में फ्लोरिडा में प्रस्तावित जी20 शिखर सम्मेलन से पहले यह बैठक दोनों देशों की भविष्य की कूटनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है। हिदायत/ईएमएस 03जून26