राष्ट्रीय
03-Jun-2026
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सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा- इससे अर्थव्यवस्था पर पड़ता है बुरा प्रभाव नई दिल्ली,(ईएमएस)। सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि किसी बैंक और कर्जदार के बीच लोन खाते को लेकर समझौता हुआ है, तो उसके बाद उसी मामले में आपराधिक कार्यवाही जारी रखना सही नहीं है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि ऐसे मामलों में मुकदमे जारी रहने से देश की अर्थव्यवस्था पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। जस्टिस नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि बैंकिंग लेनदेन से जुड़े विवाद मुख्य रूप से व्यावसायिक और दीवानी प्रकृति के होते हैं। जब दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवाद का निपटारा कर लेते हैं, तब आपराधिक मुकदमा जारी रखना कर्जदार के लिए उत्पीड़नकारी होगा और यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग भी माना जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक मामले में एक कारोबारी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उसने बताया कि उसने बैंक के साथ डेट्स रिकवरी ट्रिब्यूनल के समक्ष समझौता कर लिया था और 6.49 करोड़ रुपए की बकाया राशि के बदले 4.25 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया था। इसके बावजूद बैंक ने दो साल बाद धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज कराया, जिसकी जांच सीबीआई ने की और चार्जशीट दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मामला रद्द करते हुए कहा कि समझौते के बाद बैंक द्वारा मुकदमा शुरू करना सद्भावना की कमी को दर्शाता है। कोर्ट ने कहा कि यदि ऐसे मामलों में अभियोजन जारी रहने दिया गया, तो लोग और कारोबारी संस्थाएं बैंकिंग विवादों के समाधान के लिए समझौते की राह अपनाने से हिचकिचाएंगे। इससे व्यावसायिक विवादों के निपटारे की प्रक्रिया प्रभावित होगी और अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। कोर्ट ने यह भी माना कि समझौते के बाद दोषसिद्धि की संभावना बेहद कम थी, इसलिए मुकदमा जारी रखना न्याय हित में नहीं था। सिराज/ईएमएस 03जून26