- 39,290 करोड़ रूपये के कैबिनेट ने दी मंजूरी भारत आज उस दौर से गुजर रहा है जहाँ विकास केवल आंकड़ों का खेल नहीं रह गया है,बल्कि नागरिक जीवन की गुणवत्ता, बेहतर संपर्क,स्वच्छ पर्यावरण और आर्थिक अवसरों के विस्तार से जुड़ा हुआ है।इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए केंद्र सरकार की कैबिनेट ने लगभग ₹39,290 करोड़ की छह महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है।इन निर्णयों में विमानन क्षेत्र, राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार,तटीय संपर्क मार्गों का निर्माण तथा पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था जैसे विषय शामिल हैं।इन परियोजनाओं का महत्व केवल उनकी वित्तीय लागत में नहीं, बल्कि उनके दीर्घकालिक सामाजिक और आर्थिक प्रभाव में निहित है।यह निर्णय देश की बढ़ती आर्थिक आवश्यकताओं और विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप दिखाई देते हैं।सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक एविएशन टर्बाइन फ्यूल अर्थात एटीएफ मूल्य स्थिरीकरण कोष की स्थापना है,जिसके लिए ₹10,000 करोड़ की राशि निर्धारित की गई है। भारत का विमानन क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विकसित हुआ है। क्षेत्रीय संपर्क योजना, नए हवाई अड्डों का निर्माण और बढ़ती यात्री संख्या ने इस क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।आज वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा प्रभाव विमानन ईंधन पर पड़ता है।एटीएफ की कीमतों में अचानक वृद्धि से एयरलाइनों की लागत बढ़ जाती है,जिसका असर यात्रियों पर भी पड़ता है।मूल्य स्थिरीकरण कोष ऐसी परिस्थितियों में सुरक्षा कवच का कार्य करेगा। इससे एयरलाइनों को बेहतर वित्तीय स्थिरता मिलेगी और हवाई यात्रा को अधिक सुलभ एवं किफायती बनाए रखने में सहायता प्राप्त होगी।कैबिनेट का दूसरा महत्वपूर्ण निर्णय दिल्ली में पुराने ट्रकों और बसों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना से संबंधित है। .इस योजना पर ₹5,041 करोड़ खर्च किए जाएंगे। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र लंबे समय से वायु प्रदूषण की चुनौती का सामना कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने व्यावसायिक वाहनों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण का एक बड़ा कारण है।नई योजना के अंतर्गत पुराने वाहनों को हटाकर आधुनिक और कम प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को प्रोत्साहित किया जाएगा। यह केवल पर्यावरणीय सुधार का कदम नहीं है,बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ विषय है।स्वच्छ हवा नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि यह योजना प्रभावी रूप से लागू होती है तो राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सुधारने में उल्लेखनीय योगदान मिल सकता है।सड़क अवसंरचना के क्षेत्र में सबसे बड़ी परियोजनाओं में रामेश्वरम- कोणार्क-पारादीप तटीय राजमार्ग शामिल है, जिस पर ₹8,301 करोड़ खर्च किए जाएंगे।भारत की लंबी समुद्री तटरेखा आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।पर्यटन, मत्स्य उद्योग,बंदरगाह आधारित गतिविधियां तथा समुद्री व्यापार इन क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था का आधार हैं।तटीय राजमार्ग के निर्माण से दक्षिण भारत और पूर्वी भारत के अनेक समुद्री क्षेत्रों के बीच संपर्क मजबूत होगा।इससे पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, माल परिवहन की लागत कम होगी तथा तटीय क्षेत्रों में निवेश आकर्षित होगा। यह परियोजना ‘ब्लू इकोनॉमी’ की अवधारणा को भी मजबूती प्रदान करती है,जिसमें समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग पर विशेष बल दिया जाता है। बिहार के लिए भी कैबिनेट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। खगड़िया-पूर्णिया खंड के राष्ट्रीय राजमार्ग 31 एवं राष्ट्रीय राजमार्ग 231 को चार लेन में विकसित करने हेतु ₹3,936 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं। बिहार लंबे समय से बेहतर सड़क संपर्क कीआवश्यकता महसूस करता रहा है।राज्य की बड़ी आबादी कृषि और छोटे व्यवसायों पर निर्भर है। बेहतर सड़कें किसानों को बाजारों तक पहुंच प्रदान करती हैं और औद्योगिक निवेश की संभावनाओं को बढ़ाती हैं।उत्तर- पूर्व भारत की ओर जाने वाले मार्गों के लिए भी यह परियोजना रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। सड़क विस्तार से यात्रा समय कम होगा,दुर्घटनाओं में कमी आएगी और माल ढुलाई की दक्षता बढ़ेगी। तेलंगाना में राष्ट्रीय राजमार्ग 63 और 563 के विभिन्न खंडों को चार लेन में विकसित करने की परियोजना पर ₹7,597 करोड़ खर्च किए जाएंगे। तेलंगाना पिछले कुछ वर्षों में औद्योगिक और तकनीकी निवेश का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। बेहतर सड़क संपर्क उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। इस परियोजना से राज्य के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों, कृषि मंडियों और शहरी केंद्रों के बीच संपर्क बेहतर होगा। सड़क नेटवर्क मजबूत होने से नए निवेश आकर्षित होंगे तथा क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग 347बी के उन्नयन के लिए ₹4,415 करोड़ की मंजूरी भी महत्वपूर्ण है। मध्य प्रदेश देश के भौगोलिक केंद्र में स्थित होने के कारण परिवहन और लॉजिस्टिक्स की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। बेहतर राजमार्ग राज्य को उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत के साथ अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ने में मदद करेंगे।राजमार्ग उन्नयन से न केवल यातायात सुविधाजनक होगा बल्कि औद्योगिक विकास,पर्यटन और ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। सड़क संपर्क में सुधार से निवेशकों का विश्वास बढ़ता है और विकास के नए अवसर पैदा होते हैं। इन सभी परियोजनाओं को एक साथ देखने पर स्पष्ट होता है कि सरकार का ध्यान केवल एक क्षेत्र विशेष पर केंद्रित नहीं है। विमानन, पर्यावरण, सड़क परिवहन, तटीय विकास और क्षेत्रीय संपर्क—सभी को समान महत्व दिया गया है। यह दृष्टिकोण संतुलित विकास की अवधारणा को दर्शाता है।इन परियोजनाओं का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू रोजगार सृजन है। सड़क निर्माण, पुल,फ्लाईओवर, परिवहन सुविधाओं और अन्य अवसंरचनात्मक कार्यों में बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर उत्पन्न होते हैं। निर्माण चरण के दौरान लाखों मानव-दिवस का रोजगार सृजित होता है, जबकि परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद व्यापार और सेवाओं के विस्तार से दीर्घकालिक रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। हालांकि किसी भी बड़ी परियोजना की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। समय पर भूमि अधिग्रहण,वित्तीय अनुशासन,पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।यदि परियोजनाएं निर्धारित समय और लागत सीमा के भीतर पूरी होती हैं, तभी उनका वास्तविक लाभ जनता तक पहुंच सकेगा।₹39,290 करोड़ के ये कैबिनेट निर्णय स्पष्ट संकेत देते हैं कि भारत अपनी विकास यात्रा को नई गति देने के लिए अवसंरचना और संपर्क सुविधाओं पर निरंतर निवेश कर रहा है।बेहतर सड़कें,स्वच्छ परिवहन,मजबूत विमानन क्षेत्र और तटीय विकास की योजनाएं आने वाले वर्षों में आर्थिक वृद्धि को नया आधार प्रदान कर सकती हैं।विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए ऐसे निर्णय केवल बजटीय घोषणाएं नहीं हैं,बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था का आधार तैयार करने वाले निवेश हैं।यदि इन परियोजनाओं का प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाता है तो ये देश की विकास गाथा में एक महत्वपूर्ण अध्याय साबित हो सकती हैं। (स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तम्भकार) ईएमएस / 03 जून 26