राष्ट्रीय
03-Jun-2026


नई दिल्ली,(ईएमएस)। एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर केंद्र पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों के सत्यापन के नाम पर बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए गए हैं, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों और सामाजिक न्याय पर गंभीर असर पड़ सकता है। सांसद ओवैसी ने दावा किया कि दस्तावेज आधारित सत्यापन प्रक्रिया के तहत 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मतदाता सूचियों से लाखों नाम हटाए हैं। उनके अनुसार मोदी सरकार अब इस प्रक्रिया का अध्ययन करने और कथित अवैध प्रवासियों की पहचान, हिरासत तथा निर्वासन के लिए एक स्थायी तंत्र तैयार कर रही है। ओवैसी ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र में आम नागरिक, विशेष रूप से गरीब और कमजोर वर्गों की सबसे बड़ी ताकत है। लेकिन यदि लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाते हैं, तब इससे उनकी राजनीतिक भागीदारी प्रभावित होगी और वे अपने अधिकारों की रक्षा करने में कमजोर पड़ सकते हैं। उन्होंने आशंका जाहिर की हैं कि यह प्रक्रिया भविष्य में वंचित भारतीयों का एक स्थायी वर्ग तैयार कर सकती है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि कानून के अनुसार मतदाता सूची से नाम हटने मात्र से किसी व्यक्ति की नागरिकता समाप्त नहीं होती। ओवैसी ने कहा कि इसतरह के कई मामले अभी भी विचाराधीन हैं और प्रभावित लोग निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोबारा अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। एआईएमआईएम प्रमुख ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि यह स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है कि सत्यापन के दौरान कितने लोगों के नाम हटाए गए और उसके पीछे क्या कारण रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया का असर विशेष रूप से मुसलमानों, महिलाओं, प्रवासी मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर अधिक पड़ सकता है। आशीष दुबे / 03 जून 2026