एआई और नई तकनीकों की मिलेगी ट्रेनिंग पटना (ईएमएस)। बिहार में उच्च शिक्षा को रोजगारोन्मुख और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत राज्य सरकार और राजभवन उच्च शिक्षण संस्थानों में कॉरपोरेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ाने की तैयारी में हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल डिग्री तक सीमित न रखकर उन्हें उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कौशल प्रदान करना है। राज्यपाल एवं कुलाधिपति सैयद अता हसनैन के निर्देश पर उच्च शिक्षा विभाग विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इसमें उन राज्यों के मॉडल का अध्ययन हो रहा है, जहां विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच मजबूत साझेदारी है। नई व्यवस्था के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), उभरती तकनीकों और आधुनिक औद्योगिक कौशलों का प्रशिक्षण भी छात्रों को मिलेगा। योजना के अनुसार राज्य के प्रत्येक विश्वविद्यालय और कॉलेज में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। साथ ही स्नातक पाठ्यक्रमों में एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट और इंटर्नशिप को अनिवार्य बनाया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त होगा। राज्यपाल के निर्देश पर सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम लागू करने की तैयारी की गई है, जिसे जुलाई से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र से लागू किया जा सकता है। इसके तहत छात्र-छात्राओं को उद्योगों, बैंकों और कॉरपोरेट संस्थानों में प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा। प्रशिक्षण अवधि के दौरान उन्हें स्टाइपेंड भी दिया जाएगा। इसके अलावा विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं को भी बढ़ावा दिया जाएगा। कैंपस प्लेसमेंट के साथ-साथ विद्यार्थियों को रोजगार के लिए तैयार करने पर विशेष जोर रहेगा। उच्च शिक्षा को बाजार की जरूरतों के अनुरूप बनाने के लिए अब पाठ्यक्रम निर्माण में भी उद्योग जगत की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। कॉरपोरेट विशेषज्ञों की सलाह से तैयार होने वाले पाठ्यक्रम छात्रों को आधुनिक तकनीक, नवाचार और रोजगार के अवसरों से जोड़ने में मदद करेंगे। माना जा रहा है कि इस पहल से बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार आएगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। आशीष दुबे / 03 जून 2026