लेख
04-Jun-2026
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पेरिस-आधारित अंतरराष्ट्रीय संगठन रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स द्वारा वार्षिक रूप से जारी किये जाने वाले विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक के अनुसार यदि भारतीय पत्रकारिता की रैंकिंग पर नज़र डालें तो 2026 में यह 180 देशों में 157 वें स्थान पर है। पिछले वर्ष से यह रैंकिंग 62 अंक नीचे गिरी है। यह स्थिति विश्व में भारतीय पत्रकारिता की बहुत गंभीर श्रेणी की तरफ़ इशारा करती है। जबकि नॉर्वे, एस्तोनिया व नीदरलैंड्स जैसे देशों के नाम इस सूची में शीर्ष पर हैं। चिंता की बात तो यह है कि पड़ोसी देशों नेपाल,मालदीव व श्रीलंका जैसे देशों की स्थिति भी भारत से बेहतर है। गोया भारत में प्रेस स्वतंत्रता इस समय संकट के दौर से गुज़र रही है जिसकी वजह सत्ता का नियंत्रण,राजनीतिक दबाव, अप्रत्यक्ष डिजिटल निगरानी,विज्ञापन की लालच,मीडिया घरानों पर सत्ता से जुड़े लोगों का नियंत्रण व पत्रकारों के साथ होने वाली हिंसा व अन्याय प्रमुख कारण हैं। यही वजह है कि भारतीय मीडिया गोदी मीडिया के नाम से भी प्रचलित हो गया है। हालाँकि सत्ता की चाटुकारिता के इसी दौर में पूर्व में गोदी मीडिया से जुड़े रहे अनेक ईमानदार पत्रकार अपने निजी यू ट्यूब चैनल चलाकर भारतीय मीडिया की साख बचाने की कोशिश ज़रूर कर रहे हैं। अफ़सोस की बात तो यह है कि जनता द्वारा गोदी पत्रकार,चरण चुंबक पत्रकार,दलाल जैसी उपाधियों से नवाज़े जाने व सोशल मीडिया पर आम जनता की लानतें सुनने के बाद भी यह गोदी पत्रकार ईमानदारी से पत्रकारिता का दायित्व निभाने के बजाये अपने बेतुके बोल,सत्ता के प्रति अपनी वफ़ादारी व अज्ञानता पूर्ण बातों के चलते आम लोगों की नफ़रत का पर्याय बनते जा रहे हैं। यही वजह है कि शो पीस रुपी इन ऐंकर्स व इनके टी वी चैनल्स की लोकप्रियता व इनके दर्शकों की संख्या जहां दिन प्रतिदिन गिरती जा रही है वहीँ यू ट्यूब चैनल्स व सोशल मीडिया से जुड़े ईमानदार पत्रकारों के दर्शकों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। पिछले दिनों गोदी मीडिया से जुड़े एक प्रसिद्ध टी वी चैनल की एक प्रसिद्ध महिला ऐंकर अंजना ओम कश्यप ने एक लाइव शो के दौरान हुई एक अभद्र टिप्पणी करते हुये यूट्यूब टीचर्स और ऑनलाइन एजुकेटर्स पर निशाना साधा। उन्होंने यूट्यूब टीचर्स के लिये दो कौड़ी के, फ़्रॉड, लुटेरे, छिछले यूट्यूबर और भाड़े के वीडियो जैसे अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया। अपनी बकवास में उन्होंने कहा कि यूट्यूब स्टार टीचर्स को दो कौड़ी का ज्ञान भी नहीं होता। उन्होंने कहा कि मोटिवेशन के नाम पर ये शिक्षक केवल व्यूज़ और कमाई के लिए कंटेंट बनाते हैं। कम जानकारी के कारण ऐसे टीचर्स छात्रों को गुमराह कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ये सिर्फ़ भ्रामक हेडलाइंस लिखकर व्यूज़ बटोरते हैं। इस ग़ैर ज़िम्मेदाराना व अपमानजनक टिप्पणी के बाद देश के अनेकानेक प्रसिद्ध यू ट्यूबर्स ख़ासकर शिक्षकों,ऑनलाइन एजुकेटर्स व उनके छात्रों व समर्थकों का ग़ुस्सा इस महिला ऐंकर फूट पड़ा। सोशल मीडिया पर उसकी ज़बरदस्त ट्रोलिंग हुई। देश विदेश से लोगों ने वीडियो बनाकर उस महिला एंकर के इस बेहूदा बयान की निंदा की तथा उन्हें पत्रकारिता के दायित्व व कर्तव्य बताते हुये आइना दिखाना शुरू कर दिया। कुछ ने तो यहाँ तक कह दिया कि वे जिन शिक्षकों के बारे में यह कह रही है कि उन्हें दो कौड़ी का ज्ञान भी नहीं होता तो दरअसल उन जैसी पत्रकारों को फूटी कौड़ी का भी ज्ञान नहीं है। अन्यथा आज के सूचना व संचार के आधुनिक दौर में जब पूरे विश्व में ज्ञान का माध्यम यू ट्यूब व ए आई ही है, उस माध्यम पर ऐसी घटिया टिप्पणी नहीं की गयी होती। वास्तव में शिक्षक पूरी मेहनत से बच्चों को पढ़ाते हैं और बेरोज़गारी,परीक्षा प्रणाली,महंगाई व पेपर लीक जैसे मुद्दों को उठाते हैं जबकि इन शिक्षकों को अपमानित करने वाला गोदी मीडिया वास्तविक मुद्दों को उठाकर पत्रकारिता का दायित्व निभाने के बजाये सत्ता की चापलूसी करने में व्यस्त रहता है। इसी तरह पिछले दिनों उत्तराखंड के कोटद्वार के दीपक कुमार उर्फ़ मोहम्मद दीपक के जिम पर आर्थिक संकट आ गया। क्योंकि हिंदूवादी संगठनों के विरोध के बाद उनके जिम से अनेक लोगों ने अपने संबंध तोड़ लिये। इसी विषय को लेकर अजित अंजुम व अशोक कुमार पांडेय जैसे ज़िम्मेदार पत्रकार व प्रसिद्ध यू ट्यूबर्स ने दीपक की आर्थिक सहायता की अपील की। परिणाम स्वरूप देशभर के अमन पसंद लोगों ने दीपक की इतनी सहायता कर दी कि उनका संकट कई वर्षों के लिए टल गया। इस अपील पर तमाम नये लोगों ने जिम की सदस्यता भी लेकर दीपक की आर्थिक मदद की। परन्तु अमन चोपड़ा नमक इसी गोदी मीडिया के एक बदनाम शुदा एंकर ने इस ख़बर को नकारत्मक रूप में पेश करते हुये अपनी ओछी व घटिया टिप्पणी में दीपक की आर्थिक तंगी का मज़ाक़ उड़ाते हुए और उसपर तंज़ कसते हुये कहा कि सेक्युलरिज़्म का वज़न नहीं उठा पाए पहलवान दीपक—ओ सॉरी, मोहम्मद दीपक। उसने यह भी कहा कि नाम के आगे मोहम्मद लगाने से भी उनके विचार को फ़्लॉप कर दिया गया... मोहम्मद दीपक के लिए, कोई मोहम्मद उस तरह से खड़ा नहीं हुआ। इस नफ़रती ऐंकर ने आर्थिक संकट के समय दीपक का मज़ाक उड़ाया जबकि दीपक ने कोटद्वार घटना के समय धर्म नहीं बल्कि केवल इंसानियत दिखाई थी। बहरहाल भारतीयता के पैरोकार देश भर के हज़ारों शांतिप्रिय लोगों ने दीपक की अनअपेक्षित सहायता कर नफ़रती चिंटुओं के मुंह पर तमाचा जड़ दिया। दरअसल यह उन्हीं कथित पत्रकारों का गिरोह है जिसने 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के समय जब एक गोदी चैनल पाकिस्तान के 5 शहर तबाह होने का दावा कर रहा था तो दूसरे चैनल ने कहा था कि 25 शहर तबाह हो गए। यह वही एंकर्स हैं जो स्टूडियो में बंदरों की तरह उछलते हैं और अभद्र शब्दावली का प्रयोग यहाँ तक कि लड़ाई व मारपीट को भी प्रोत्साहित करते रहते हैं। यह कथित पत्रकार धर्म-जाति के आधार पर समाज बांटने वाली बातें करते हैं तथा 2000 की नोट में चिप लगी होने का भ्रामक दावा कर भारतीय करेंसी को भी बदनाम करते हैं। ऐसे अनेक लोग कभी किसी अपराध में जेल जा चुके हैं तो कभी अपने भ्रामक बयानों के लिये मुआफ़ी मांग चुके हैं। अपना भ्रामक व गुमराह करने वाले ट्वीट डिलीट करने में भी इन्हें महारत हासिल है। अदालती फटकार भी इन्हें आये दिन सुनने को मिलती रहती है। सत्ता की ख़ुशामद कर समाज में नफ़रत फैलाकर केवल धन कमाने वाले ऐसे लोगों को पत्रकार नहीं बल्कि पत्थरकार कहना ज़्यादा मुनासिब होगा। (यह ले‎खिका के व्य‎‎‎क्तिगत ‎विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अ‎निवार्य नहीं है) .../ 4 जून /2026