लेख
04-Jun-2026
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संपादक : श्री राजेश कुमार मिश्र प्रकाशक : हिंदी विज्ञान साहित्य परिषद मूल्य :निशुल्क भारत के मशहूर परमाणु वैज्ञानिक डॉ राज़ गोपाल चिदंबरम को भारत का ओपेनहाइमर कहा जाता है आज ऐसे ही महान परमाणु वैज्ञानिकों के मेहनत के बल पर भारत नाभिकीय क्षेत्र में एक मजबूत राष्ट्र के रूप में उभरा है इसलिए है कि भारत ने मई 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षण कर पूरे विश्व को चौंका दिया क्योंकि वो अमेरिका के सीआईए के ख़ुफ़िया सैटेलाइट को चकमा देकर परमाणु बम से भी ज्यादा घातक हाइड्रोजन बम का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री का उचित निर्णय देशहित में था अगर उस समय नहीं कर पाता तो आज करना लगभग नामुमकिन था जिसतरह एनपीटी संधि पर हस्ताक्षर करने का अमेरिका का दबाब था और अमेरिका खुद ही 6000 परमाणु बम बनाकर दूसरे देश पर ना बनाने का दबाब और आर्थिक प्रतिबन्ध है उस समय भी आर्थिक प्रतिबन्ध लगे लेकिन सबको झेलते हुए देश ने विज्ञान और अनुसन्धान जारी रखा और यही देश की असली ताकत है उस समय पोखरण -2 परमाणु परीक्षण जिसे ऑपरेशन शक्ति का नाम दिया गया उसमें दो महत्वपूर्ण वैज्ञानिक का एक कड़ी मेहनत सही सोच और समय से कार्य को गुप्त तरीके से करना ही उस परीक्षण की सफलता की गाथा लिखता है जिसमें थे देश के महान वैज्ञानिक व पूर्व राष्ट्रपति डॉ अबुल कलाम साहब और पूर्व परमाणु वैज्ञानिक व पूर्व मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार डॉ आर चिदंबरम सर, ऐ दोनों ने कड़ी मेहनत व मजबूत टीमवर्क से उसे सफल बनाया, चूंकि आर चिदंबरम जी का आकस्मिक निधन 4 जनवरी 2025 को मुंबई में हुआ तो देश को एक झटका लगा क्योंकि भारत के परमाणु परीक्षण के पुरोधा डॉ आर चिदंबरम ने पोखरण -2 परमाणु परीक्षण में 2सरे न पर सफलता का श्रेय जाता है और पोखरण -2 के सफलता पर पूर्व प्रधानमंत्री अटलजी ने हर 11 मई को नेशनल टेक्नोलॉजी दिवस मनाने का ऐलान किया था डॉ चिदंबरम की याद में वैज्ञानिक जनवरी -मार्च 25 का अंक को निकाला गया क्योंकि डॉ आर चिदंबरम का 4 जनवरी 2025 में 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया, था वे भारत के परमाणु कार्यक्रम के प्रमुख वास्तुकारों में से एक थे।निश्चित रूप से परिषद के लिए उनका योगदान अहम व प्रेरणास्रोत हिंदी विज्ञान में एक नई क्रांति मुंबई के वैज्ञानिकों ने 1968 में हिंदी विज्ञान साहित्य परिषद की नींव रखी और 2साल बाद वैज्ञानिक पत्रिका का सतत प्रकाशन हुआ जो आज भी ऑनलाइन माध्यम से चल रही है औऱ हाल ही में महान वैज्ञानिक डॉ आर चिदंबरम के निधन पर वैज्ञानिक का जनवरी -मार्च 25 का अंक डॉ आर चिदंबरम स्मृति विशेषाँक निकाल कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई और वैज्ञानिक ही एक मात्र ऐसी पत्रिका निकली जिसने डॉ आर चिदंबरम पर एक विशेष अंक निकाला और इस अंक को शुभकामना संदेश भी विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव प्रोफेसर । अभय कारणदीकर जी द्वारा प्रेषित कर इस अंक की गरिमा बढ़ाई, पोखरण दिवस पर उनको यह अंक समर्पित किया गया क्योंकि वो पूर्व में हिंदी विज्ञान साहित्य परिषद के अध्यक्ष भी थे डॉ। राजगोपाला चिदंबरम, जिनका जन्म 1936 में चेन्नई में हुआ था, भारत के सबसे प्रतिष्ठित प्रायोगिक भौतिकविदों में से एक हैं। उनके 200 से अधिक शोध प्रकाशन प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। । उन्होंने अपनी पी एचडी । इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बैंगलोर से पूरी की, जहाँ से बाद में उन्हें डीएस सी की उपाधि भी मिली। उनके पास आई आई टी , मुंबई सहित कई भारतीय विश्वविद्यालयों से डी एस सी । की मानद उपाधियाँ (h . c) हैं। वे 1962 में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र ( BARC ) में शामिल हुए और 1990 में इसके निदेशक बने। वे फरवरी 1993 से नवंबर 2000 तक परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष और भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग में सचिव रहे। उन्होंने परमाणु प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने 1974 में पोखरण में हुए शांतिपूर्ण परमाणु विस्फोट प्रयोग के डिजाइन और निष्पादन में अग्रणी भूमिका निभाई, डॉ. चिदंबरम 1994-95 के दौरान अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष रहे, और 1991-2000 तक इंटरनेशनल यूनियन ऑफ क्रिस्टलोग्राफी की कार्यकारी समिति के सदस्य रहे, जिसमें अंतिम चार वर्षों तक उन्होंने इसके उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया डॉ. चिदंबरम ने कई पुरस्कार जीते हैं, जिनमें 1991 में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बैंगलोर का विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार (Distinguished Alumnus Award), 1992 इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी द्वारा दिया गया द्वितीय जवाहरलाल नेहरू जन्म शताब्दी अंतर्राष्ट्रीय विजिटिंग फेलोशिप, और. 1995 में इंडियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन का रमन जन्म शताब्दी पुरस्कार, 1996 के लिए मटेरियल्स रिसर्च सोसाइटी ऑफ़ इंडिया ( MRSI ) का विशिष्ट सामग्री वैज्ञानिक पुरस्कार, 1996 में इंडियन फिजिक्स एसोसिएशन का आर.डी. बिड़ला पुरस्कार, 1998 में लोकमान्य तिलक पुरस्कार, 1998 में विज्ञान और प्रौद्योगिकी में उत्कृष्टता के लिए उन्हें मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार, कैबिनेट पद मिला इसके अलावा उन्हें एच.के. फ़िरोदिया पुरस्कार, 1999 में कांची कामकोटि पीठम के शंकराचार्य से विज्ञान सेवा रत्नम पुरस्कार, 1999 में वीर सावरकर पुरस्कार, 1999 में दादाभाई नौरोजी मिलेनियम पुरस्कार, 1999 में डॉ. वाई. नायुडम्मा स्मृति पुरस्कार, 1999 में पद्म विभूषण और 2000 में हरि ओम आश्रम प्रेरित वरिष्ठ वैज्ञानिक पुरस्कार मिले । :इन्ही सब यादों को समेटे हुए यह एक यादगार व उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करता है,पत्रिका के मुख्य संपादक श्री राजेश कुमार मिश्रजी ने विज्ञान संचार हेतु वैज्ञानिक को नवाचार और देश के विज्ञान गतिविधियों को पत्रिका में स्थान देकर देश को विज्ञान संचार के क्षेत्र में अहम योगदान दिया है और लगातार अपनी सेवा निस्वार्थ भाव से देते आ रहें है।इसके पहले वे वह हिंदी विज्ञान साहित्य परिषद में लगभग 18 सालों या उससे अधिक समय से सक्रिय रूप से जुड़े रहे इसके लिए उन्होंने परिषद द्वारा आयोजित कई राष्ट्रीय वैज्ञानिक संगोष्ठी में संयोजक के रूप मे महत्वपूर्ण योगदान दिया व हिंदी विज्ञान साहित्य परिषद द्वारा आयोजित प्रश्न मंच कार्यक्रम मे भी संयोजन मे सफलतापूर्वक काम किया हिंदी विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान हेतु परिषद द्वारा उन्हे हिंदी विज्ञान साहित्य परिषद स्वर्ण जयंती समारोह, में भारत के महान वैज्ञानिक स्व डॉ चिदंबरम जैसे महान वैज्ञानिक को मंच पर मुख्य अथिति के रूप में बुलाये जाने का पूरा श्रेय जाता है।इसके अलावा वे विज्ञान वार्ता, स्वास्थ्य संगोष्ठी, वैज्ञानिक पत्रिका के व्यवस्थापण मे भी मुख्य भूमिका प्रदान किया गया. उन्होंने विज्ञान अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी, दोनों ही क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। एक प्रभावी विज्ञान संचारक के नाते जन सामान्य संबंधित विषयों की वैज्ञानिक जानकारी/ज्ञान के संचार तथा लोकप्रियकरण की दिशा में स्वयंसेवी भाव से लगातार कार्य कर रहे हैं इस अंक में प्रमुख रूप से उनके विज्ञान पर मुख्य संस्थान में दिए गए भाषण व छात्रों का प्रेरणादायक पलों व गणमान्य विज्ञान लेखकों द्वारा सजाया गया है जिसमें मुख्य लेखकों में डॉ दया शंकर त्रिपाठी, डॉ मनीष मोहन गोरे, डॉ सरोज शुक्ला, डॉ संजय कुमार, बीएचयू,श्री सत्य प्रभात प्रभाकर, श्री राजेश कुमार मिश्र, श्री उत्तम सिँह गहरवार, डॉ अंकिता मिश्रा, डॉ दीपक कोहली, डॉ हेमलता पंत, डॉ मनोज सिंह, श्री बी एन मिश्र, श्री प्रकाश कश्यप आदि प्रमुख हैं साथ ही हिंदी विज्ञान साहित्य परिषद के कार्यक्रम में मुख्य अथिति में डॉ चिदंबरम से सम्मान लेने वाले विद्वतजन में वैज्ञानिक के पूर्व संपादक,डॉ गोविन्द प्रसाद कोठियाल, डॉ जय प्रकाश त्रिपाठी, पूर्व सचिव, हिवीसाप,समारोह में शामिल पूर्व अध्यक्ष, डॉ एच मिश्रा, डॉ कोठियाल जी, व श्री आर के मिश्रा जी आदि गणमान्य हिंदी विज्ञान संचारकों की याद ताज़ा हुई डॉ चिदंबरम सर जब परिषद के अध्यक्ष थे तो पटना में हुई नाभिकीय पदार्थ पर जनवरी 1992 में एक राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया था जो निश्चित रूप से विज्ञान के प्रति नवयुवको शिक्षाविदों, वैज्ञानिक व शोधार्थी को नाभिकीय विज्ञान के प्रति गहरी रूचि को दर्शाता है जो निश्चित रूप से आज के युवाओ के लिए प्रेरणादायक है ऐ सब हिंदी विज्ञान साहित्य परिषद के मंच की शोभा को बढ़ाते हैं निश्चित रूप से इस अंक में विज्ञान और टेक्नोलॉजी विभाग के सचिव का भी संदेश उनके प्रति आदर व सम्मान को बढ़ाता है अतः राष्ट्रीय अस्तर पर हिंदी विज्ञान साहित्य परिषद( वैधानिक) ही एक मात्र ऐसी संस्था बची है जो इन उद्देश्यों क़ो पूर्ण कर सकती है.पत्रिका के संपादक श्री राजेश कुमार मिश्रजी ने इस अंक कों निखारने में कड़ी मेहनत की है क्योंकि उनका चिदंबरम साहब से काफी लगाव रहा है ऐसे प्रयास सराहनीय और युवाओ के लिए प्रेरणादायक है। ईएमएस / 04 जून 26