गुना (ईएमएस)। पुलिस और प्रशासन से न्याय नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए जहर खाने वाले किसान अशोक यादव की गुरुवार को उपचार के दौरान मौत हो गई। किसान की मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने हनुमान चौराहे पर चक्काजाम कर पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। करीब आधे घंटे तक चले जाम के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। बाद में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की समझाइश तथा कार्रवाई के आश्वासन के बाद जाम समाप्त हुआ। चक्काजाम कर रहे परिजनों का आरोप था कि यदि समय रहते उनकी शिकायत पर कार्रवाई कर दी जाती तो अशोक यादव की जान बच सकती थी। परिजनों ने कहा कि पुलिस उनकी कोई सुनवाई नहीं कर रही थी और प्रभावशाली लोगों का पक्ष लिया जा रहा था। आरोप है कि खेत की मेड़ को लेकर चल रहे विवाद में अशोक यादव के साथ मारपीट की गई थी, लेकिन शिकायत के बावजूद आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। परिजनों के अनुसार अशोक यादव बुधवार को अपनी शिकायत लेकर आरोन थाने पहुंचे थे, लेकिन वहां उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें डांटकर भगा दिया गया। इससे आहत होकर उन्होंने घर लौटने के बाद जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। हालत बिगडऩे पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया कि गांव के कुछ लोगों द्वारा उनकी जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा था। इसी विवाद को लेकर पहले भी अशोक के साथ मारपीट हुई थी। उनका कहना है कि लगभग दो दर्जन लोगों ने मिलकर हमला किया था, जिनमें कल्याण सिंह, इंद्रभान, घनश्याम, अंकेश, आदित्य, मुन्ना, राजेश और धर्मवीर सहित अन्य लोग शामिल थे। परिजनों का यह भी आरोप है कि पूर्व में आरोपियों ने मवेशियों को खेत में छोडक़र उनकी गन्ने की फसल बर्बाद कर दी थी, तब भी पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। किसान की मौत के बाद गांव में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। परिजन दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े हुए हैं। वहीं पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। किसान की मौत और उसके बाद हुए चक्काजाम ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।- सीताराम नाटानी