क्षेत्रीय
04-Jun-2026
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- टूट चुकी श्रोणि और हिप जॉइंट को जटिल सर्जरी से युवक को मिला नया जीवन बिलासपुर (ईएमएस)। सडक़ दुर्घटनाओं में पेल्विस (श्रोणि) और एसीटैबुलम (कूल्हे के जोड़ की हड्डी) की गंभीर चोटें चिकित्सा विज्ञान की सबसे जटिल चुनौतियों में गिनी जाती हैं। ऐसे मामलों में समय पर विशेषज्ञ उपचार न मिलने पर मरीज स्थायी विकलांगता का शिकार हो सकता है। सिम्स बिलासपुर के अस्थि रोग विभाग ने एक ऐसे ही चुनौतीपूर्ण मामले में सफलता हासिल करते हुए 40 वर्षीय अजय पटेल को नया जीवन प्रदान किया है। बिलासपुर निवासी अजय पटेल 19 अप्रैल 2026 को बिल्हा क्षेत्र में हुए सडक़ हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें तत्काल सिम्स बिलासपुर लाया गया, जहां जांच में उनकी दाहिनी पेल्विस में सेंट्रल हिप डिसलोकेशन के साथ एसीटैबुलम फ्रैक्चर पाया गया। यह स्थिति अत्यंत गंभीर मानी जाती है क्योंकि इसमें हिप जॉइंट अपनी सामान्य स्थिति से हट जाता है और उसे घेरने वाली हड्डियां भी क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण सिंह ठाकुर की निगरानी में मरीज का विस्तृत परीक्षण किया गया। विभागाध्यक्ष डॉ. बेन के मार्गदर्शन में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने एक विशेष सर्जिकल योजना तैयार की। 28 अप्रैल 2026 को विशेषज्ञ टीम ने सफलतापूर्वक ओपन रिडक्शन एंड इंटरनल फिक्सेशन (ह्रक्रढ्ढस्न) के साथ राइट एसीटैबुलर रिपेयर और हिप जॉइंट ओपन रिडक्शन जैसी जटिल सर्जरी को अंजाम दिया। ऑपरेशन के दौरान आधुनिक सी-आर्म फ्लोरोस्कोपी तकनीक का उपयोग कर हड्डियों की स्थिति का लगातार मूल्यांकन किया गया, जिससे फ्रैक्चर के टुकड़ों को उनकी प्राकृतिक संरचना के अनुरूप सटीक रूप से स्थापित किया जा सका। विशेषज्ञों ने टूटे हुए एसीटैबुलम की सफल मरम्मत कर उसे स्थिर किया तथा हिप जॉइंट को उसकी सामान्य स्थिति में पुनस्र्थापित किया। तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जाने वाली इस सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति लगातार बेहतर होती गई और रिकवरी संतोषजनक रही। ऑपरेशन के बाद मरीज को फिजियोथेरेपी और पुनर्वास कार्यक्रम से जोड़ा गया, जिससे वह धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है। चिकित्सकों का मानना है कि समय पर की गई सर्जरी और सटीक एनाटॉमिकल रिडक्शन के कारण भविष्य में जोड़ की कार्यक्षमता बेहतर बनी रहेगी तथा दीर्घकालिक जटिलताओं की आशंका कम होगी। इस जटिल ऑपरेशन में एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति एवं उनकी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं मरीज की ऑपरेशन पूर्व और पश्चात देखभाल में नर्सिंग इंचार्ज योगेश्वरी सिस्टर एवं उनकी टीम का विशेष योगदान रहा। उपचार के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह और अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि सिम्स में आधुनिक चिकित्सा तकनीकों और अनुभवी विशेषज्ञों की टीम के कारण अब जटिल पेल्विस एवं एसीटैबुलर चोटों का सफल उपचार संभव हो रहा है। वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने इसे संस्थान की उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाओं, टीमवर्क और विशेषज्ञता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। सिम्स बिलासपुर की यह सफलता न केवल संस्थान की उन्नत ट्रॉमा प्रबंधन क्षमता को दर्शाती है, बल्कि गंभीर सडक़ दुर्घटनाओं में घायल मरीजों के लिए उम्मीद और विश्वास की नई मिसाल भी बनकर सामने आई है। मनोज राज 04 जून 2026