मनोरंजन
05-Jun-2026
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मुंबई (ईएमएस)। बॉलीवुड के दिग्गज फिल्मकार मणिरत्नम ने अपनी अनूठी कहानी कहने की शैली और संवेदनशील विषयों के जरिए सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। कभी फिल्मों को समय की बर्बादी मानने वाले मणिरत्नम आज भारतीय फिल्म जगत के सबसे प्रभावशाली निर्देशकों में शामिल हो गए हैं। 2 जून 1956 को तमिलनाडु के मदुरै में जन्मे मणिरत्नम का पूरा नाम गोपालरत्नम सुब्रमण्यम है। उनका परिवार फिल्म जगत से जुड़ा हुआ था। उनके पिता एस. गोपालरत्नम फिल्म वितरण के व्यवसाय से जुड़े थे, जबकि उनके चाचा वीनस कृष्णमूर्ति फिल्म निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय थे। इसके बावजूद मणिरत्नम का झुकाव शुरुआती दिनों में पढ़ाई और अन्य विषयों की ओर अधिक रहा। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने मुंबई से एमबीए की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद एक कंपनी में मैनेजमेंट कंसल्टेंट के रूप में काम भी किया। उस समय उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि भविष्य में फिल्म निर्देशन उनकी पहचान बनेगा। हालांकि कॉलेज के दिनों में विभिन्न प्रकार की फिल्मों से परिचय होने के बाद सिनेमा के प्रति उनकी रुचि धीरे-धीरे बढ़ने लगी। उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उनके मित्र रवि शंकर एक फिल्म पर काम कर रहे थे। मणिरत्नम ने उस परियोजना की कहानी और पटकथा तैयार करने में सहयोग दिया, जिससे उन्हें फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को करीब से समझने का अवसर मिला। इसके बाद उन्होंने कन्नड़ फिल्म पल्लवी अनु पल्लवी से निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा। हालांकि शुरुआती दौर में उनकी कुछ फिल्मों को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। वर्ष 1986 में रिलीज हुई मौना रागम ने उनके करियर को नई दिशा दी। इसके बाद उन्होंने नायकन, रोजा, बॉम्बे, दिल से.., युवा, गुरु और पोन्नियिन सेल्वन जैसी कई चर्चित फिल्मों का निर्देशन किया। उनकी फिल्मों में प्रेम, राजनीति, सामाजिक संघर्ष, आतंकवाद, सांप्रदायिकता और मानवीय रिश्तों जैसे विषयों को गहराई से प्रस्तुत किया गया है। मणिरत्नम ने ही संगीतकार ए. आर. रहमान को फिल्म ‘रोजा’ के माध्यम से बड़ा अवसर दिया था। बाद में दोनों की जोड़ी भारतीय सिनेमा की सबसे सफल रचनात्मक साझेदारियों में शामिल हो गई। अपने उत्कृष्ट योगदान के लिए मणिरत्नम को सात राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, अनेक फिल्मफेयर पुरस्कार और कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। सुदामा/ईएमएस 05 जून 2026