क्षेत्रीय
05-Jun-2026
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- कलेक्टर के सामने आंसुओं में बहा दर्द कलेक्टर के सामने रोने के बाद भी किसान को मिले सिर्फ दो कट्टे खाद गुना (ईएमएस) । जिले में खाद संकट के बीच किसानों की परेशानी अब भावुक कर देने वाली तस्वीरों में सामने आने लगी है। शुक्रवार को नानाखेड़ी खाद वितरण केंद्र पर उस समय मार्मिक स्थिति बन गई, जब 40 किलोमीटर दूर गांव से पैदल चलकर खाद लेने पहुंचे एक किसान की आंखों से आंसू छलक पड़े। किसान ने कलेक्टर किशोर कन्याल के सामने अपनी पीड़ा बयां करते हुए कहा कि दो दिनों से खाद के लिए भटक रहा है, लेकिन जरूरत के अनुसार खाद नहीं मिल रही। किसान की व्यथा सुनकर कलेक्टर ने उसे ढांढस बंधाया और खाद दिलवाई, लेकिन इसके बावजूद उसे आवश्यकता के छह कट्टों के स्थान पर केवल दो कट्टे ही मिल सके। ग्राम उकावद निवासी किसान शिवनंदन रघुवंशी ने बताया कि वह गुरुवार को अंधेरे में ही घर से निकल पड़े थे। उन्हें न तो मोबाइल चलाना आता है और न ही कोई वाहन उपलब्ध था, इसलिए पैदल ही खाद वितरण केंद्र तक पहुंचे। दो दिन से इंतजार करने के बाद भी खाद नहीं मिली। शुक्रवार को जब कलेक्टर निरीक्षण के लिए पहुंचे तो उन्होंने अपनी समस्या बताई और भावुक होकर रो पड़े। शिवनंदन ने कहा कि उनकी खेती के लिए कम से कम छह कट्टे खाद की आवश्यकता है, लेकिन दो कट्टे मिलने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया भी किसानों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है और खाद वितरण केंद्र पर पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाती। खाद केंद्र पर मौजूद अन्य किसानों ने भी अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं। किसान संजय परिहार ने बताया कि उनके टोकन पर 7 जून की तारीख दर्ज है, लेकिन केंद्र पर उन्हें 7 या 8 जून को आने की सलाह दी जा रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को डीएपी खाद के बजाय एनपीके लेने की सलाह दी जा रही है, जबकि एनपीके की कीमत डीएपी से कहीं अधिक है। डीएपी जहां लगभग 1300 रुपए प्रति कट्टा मिलती है, वहीं एनपीके की कीमत 1940 से 2450 रुपए तक पहुंच रही है। किसानों का कहना है कि पहले से ही डीजल, बीज और अन्य कृषि लागत बढ़ चुकी है, ऐसे में महंगी खाद खेती को और मुश्किल बना रही है। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर किशोर कन्याल ने किसानों से चर्चा कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि खाद वितरण व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए प्रतिदिन 300 किसानों को खाद देने की क्षमता बढ़ाकर 500 किसानों तक कर दी गई है। कुछ समस्याएं सूचना के अभाव के कारण सामने आ रही थीं। किसानों ने शिकायत की थी कि उनका नाम पुकारे जाने की जानकारी नहीं मिलती, इसलिए केंद्र पर माइक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही खराब हो चुके टेंट को भी दोबारा लगाने की व्यवस्था की जाएगी। कलेक्टर ने कहा कि प्रशासन का प्रयास है कि किसानों को एक ही दिन में खाद उपलब्ध हो जाए, लेकिन किसानों को भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। हालांकि नानाखेड़ी केंद्र पर सामने आई यह तस्वीर बता रही है कि खेतों में बोवनी की तैयारी कर रहे किसानों के लिए खाद हासिल करना अभी भी किसी संघर्ष से कम नहीं है। किसान की आंखों से निकले आंसू और जरूरत के छह कट्टों के बदले मिले मात्र दो कट्टे खाद जिले में खाद वितरण व्यवस्था की हकीकत भी बयां कर रहे हैं।-सीताराम नाटानी