हरिमंगलम लॉन में संपन्न हुआ आर्ट ऑफ लिविंग का चार दिवसीय एडवांस मेडिटेशन प्रोग्राम बालाघाट (ईएमएस)। आर्ट ऑफ लिविंग संस्था द्वारा स्थानीय हरिमंगलम लॉन में चार दिवसीय आवासीय एडवांस मेडिटेशन प्रोग्राम (मौन ध्यान शिविर) का सफल आयोजन किया गया। बेंगलुरु अंतर्राष्ट्रीय केंद्र से पधारे वरिष्ठ प्रशिक्षक ऋषि गुरुशरणम जी के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में बालाघाट सहित आसपास के क्षेत्रों से आए 50 से अधिक प्रतिभागियों ने सहभागिता कर ध्यान, मौन और आध्यात्मिक साधना के माध्यम से आत्मिक शांति एवं आंतरिक संतुलन का अनुभव प्राप्त किया। मौन के माध्यम से स्वयं से जुड़ने का अवसर शिविर के दौरान प्रतिभागियों ने मौन, ध्यान, प्राणायाम और विभिन्न आध्यात्मिक प्रक्रियाओं के माध्यम से मन की गहराइयों में उतरने का अवसर प्राप्त किया। कार्यक्रम का उद्देश्य व्यक्ति को तनाव, चिंता, नकारात्मक विचारों और जीवन की भागदौड़ से निकालकर आंतरिक आनंद, मानसिक स्पष्टता और भावनात्मक संतुलन से जोड़ना था। चार दिनों तक चले इस विशेष साधना शिविर में प्रतिभागियों ने बाहरी शोर से दूर रहकर अपने भीतर की शांति को अनुभव किया। “मौन केवल चुप रहना नहीं, स्वयं को सुनना है” ऋषि गुरुशरणम जी ने कहा कि मौन केवल बोलना बंद कर देना नहीं है, बल्कि स्वयं से जुड़ने की एक गहन साधना है। जब मन शांत होता है, तब व्यक्ति अपने भीतर छिपी ऊर्जा, आनंद और चेतना का अनुभव कर पाता है। ध्यान व्यक्ति को वर्तमान क्षण में जीना सिखाता है और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करता है। उन्होंने कहा कि आज के तनावपूर्ण वातावरण में ध्यान और मौन शारीरिक- मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक साधन बन गए हैं। तनाव कम हुआ, नींद बेहतर हुई, मन हुआ हल्का शिविर में शामिल प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि चार दिनों के मौन और ध्यान अभ्यास ने उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का अनुभव कराया। कई प्रतिभागियों ने कहा कि लंबे समय से चली आ रही मानसिक बेचैनी, तनाव और विचारों की निरंतर दौड़ में उल्लेखनीय कमी महसूस हुई। कुछ प्रतिभागियों ने बताया कि उनकी नींद की गुणवत्ता में सुधार हुआ, मन अधिक शांत हुआ और सुबह अधिक ताजगी एवं ऊर्जा का अनुभव होने लगा। कई लोगों ने यह भी महसूस किया कि उनकी एकाग्रता, आत्मविश्वास और कार्यक्षमता में वृद्धि हुई है। मोबाइल बना सबसे बड़ा व्यसन, ध्यान ने दिखाई नई दिशा प्रतिभागियों ने विशेष रूप से यह साझा किया कि इस शिविर ने उन्हें मोबाइल और डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग के प्रभावों को समझने का अवसर दिया। उनका कहना था कि आज मोबाइल जीवन की आवश्यकता तो बन चुका है, लेकिन अनावश्यक उपयोग धीरे-धीरे एक ऐसे व्यसन का रूप ले चुका है, जिसमें व्यक्ति हर कुछ मिनटों में फोन देखने के लिए मजबूर हो जाता है। प्रतिभागियों ने बताया कि लगातार मोबाइल पर बने रहने से मानसिक तनाव बढ़ता है, एकाग्रता प्रभावित होती है और नींद का संतुलन बिगड़ जाता है। इसके साथ ही परिवार और समाज के बीच रहते हुए भी लोग एक-दूसरे से भावनात्मक रूप से दूर होते जा रहे हैं। बच्चों के साथ समय कम हो रहा है और परिवारों में संवाद की संस्कृति कमजोर पड़ रही है। चार दिन बिना मोबाइल के, मिला भीतर का सुकून प्रतिभागियों ने बताया कि मौन और ध्यान के इन चार दिनों में मोबाइल से दूरी बनाकर रहने से उन्हें एक अलग ही स्वतंत्रता और हल्केपन का अनुभव हुआ। उन्होंने महसूस किया कि बिना किसी कारण हर कुछ मिनट में मोबाइल देखने की आदत से बाहर निकलना संभव है। इससे मन अधिक स्थिर, शांत और केंद्रित रहता है। कई प्रतिभागियों ने कहा कि इस शिविर ने उन्हें यह समझने में मदद की कि मोबाइल का उपयोग कब, कितना और किस उद्देश्य से किया जाना चाहिए। आवश्यकता से अधिक उपयोग जहां तनाव बढ़ाता है, वहीं यह रिश्तों और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित करता है। जीवन को नई दृष्टि और सकारात्मक ऊर्जा देने वाला अनुभव प्रतिभागियों ने कहा कि इस शिविर ने उन्हें जीवन की प्राथमिकताओं को पुनः समझने, वर्तमान में जीने, आत्मविश्वास बढ़ाने तथा स्वयं और परिवार के साथ अधिक गुणवत्तापूर्ण समय बिताने की प्रेरणा दी। गहन ध्यान और मौन के अनुभवों ने उन्हें भीतर से शांत, प्रसन्न और संतुलित महसूस कराया। कई प्रतिभागियों ने इसे केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं बल्कि जीवन को नई दिशा देने वाला अनुभव बताया। अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे सुदर्शन क्रिया और ध्यान का ज्ञान कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि वे आर्ट ऑफ लिविंग की सुदर्शन क्रिया, ध्यान एवं तनावमुक्त जीवन की इस ज्ञान परंपरा को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। प्रतिभागियों ने कहा कि जिस प्रकार उन्हें इन चार दिनों में मानसिक शांति, बेहतर स्वास्थ्य, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन के प्रति नई दृष्टि प्राप्त हुई है, उसी प्रकार समाज के अधिक से अधिक लोगों को भी इसका लाभ मिलना चाहिए। 30 जून से 6 जुलाई तक बालाघाट में होगा विशेष शिविर इसी संकल्प के साथ आगामी 30 जून से 6 जुलाई तक बालाघाट में पहली बार सुदर्शन क्रिया एवं सहज समाधि ध्यान योग शिविर का संयुक्त आयोजन किया जाएगा। यह शिविर प्रतिदिन प्रातः 6:00 बजे से 9:30 बजे तक स्थानीय भाजपा कार्यालय, बालाघाट में आयोजित होगा। शिविर का संचालन आर्ट ऑफ लिविंग के अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षक श्री आशीष पटेल जी के सान्निध्य में संपन्न कराया जाएगा। 200 से अधिक लोगों को जोड़ने का लिया संकल्प शिविर में उपस्थित सभी साधकों ने आगामी कार्यक्रम में 200 से अधिक प्रतिभागियों को जोड़ने का संकल्प लिया। उनका मानना है कि आज के तनाव, चिंता, अवसाद, अनिद्रा और डिजिटल व्यसन से भरे वातावरण में सुदर्शन क्रिया एवं ध्यान लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। प्रतिभागियों ने बालाघाट जिले के नागरिकों, युवाओं, विद्यार्थियों, महिलाओं, कर्मचारियों, व्यवसायियों एवं वरिष्ठ नागरिकों से इस अवसर का लाभ उठाने और अपने जीवन में स्वास्थ्य, प्रसन्नता, मानसिक शांति एवं ऊर्जा लाने के लिए अधिक से अधिक संख्या में सहभागी बनने का आह्वान किया। योग दिवस को लेकर विशेष चर्चा, 6 जून से निःशुल्क योग-प्राणायाम शिविर प्रारंभ शिविर के दौरान आगामी 21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को लेकर भी विशेष चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने कहा कि योग केवल एक दिवस का कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और आनंदमय जीवन जीने की जीवनशैली है। इसी उद्देश्य को लेकर आर्ट ऑफ लिविंग परिवार द्वारा 6 जून से 21 जून तक निःशुल्क प्राणायाम, योग एवं ध्यान शिविर आयोजित किया जाएगा। यह शिविर प्रतिदिन प्रातः 6:00 बजे से 7:00 बजे तक स्थानीय भाजपा कार्यालय के बाजू में स्थित अटल उद्यान में आयोजित होगा। शिविर में सभी आयु वर्ग के लोगों को योगासन, प्राणायाम, ध्यान एवं तनावमुक्त जीवनशैली के सरल सूत्र निःशुल्क सिखाए जाएंगे। आयोजकों ने बताया कि वर्तमान समय में बढ़ते तनाव, अनियमित दिनचर्या, शारीरिक निष्क्रियता और डिजिटल जीवनशैली के कारण अनेक स्वास्थ्य समस्याएं सामने आ रही हैं। ऐसे में योग, प्राणायाम और ध्यान व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक रूप से स्वस्थ रखने का प्रभावी माध्यम हैं। आर्ट ऑफ लिविंग परिवार ने जिले के सभी नागरिकों, युवाओं, विद्यार्थियों, महिलाओं, कर्मचारियों, व्यवसायियों एवं वरिष्ठ नागरिकों से इस निःशुल्क योग-प्राणायाम एवं ध्यान शिविर में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। आयोजकों ने कहा कि जो भी व्यक्ति स्वस्थ जीवनशैली अपनाना चाहता है और योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहता है, वह इस शिविर में सहभागी होकर इसका लाभ प्राप्त कर सकता है। स्वयंसेवकों के योगदान का किया सम्मान चार दिवसीय मौन ध्यान शिविर के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी प्रशिक्षकों एवं स्वयंसेवकों के प्रति प्रतिभागियों ने विशेष आभार व्यक्त किया। प्रतिभागियों ने कहा कि शिविर के दौरान मिली सहज, आत्मीय और अनुशासित व्यवस्था ने उनके अनुभव को और अधिक प्रभावशाली बनाया। इस अवसर पर शिविर को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में विशेष भूमिका निभाने वाले प्रशिक्षक सुरजीत सिंह ठाकुर, करण बैसेन, पुष्करन सिंह, मानक नागेश्वर, विकास सोनेकर, सुशीला बोरीकर एवं रितु मोहारे सहित सभी स्वयंसेवकों व शिविर के लिये सर्वसुविधायुक्त स्थल मुहैया कराने के लिये हरिमंगलम संचालक हरिओम अग्रवाल का विशेषतौर पर प्रतिभागियों द्वारा अभिनंदन किया गया तथा उनके प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया गया। प्रतिभागियों ने कहा कि इन सभी के समर्पण, सेवा भाव और सतत सहयोग के कारण शिविर का वातावरण अत्यंत सकारात्मक, अनुशासित और प्रेरणादायक बना रहा। “जब व्यक्ति स्वयं शांत होता है, तब परिवार में सामंजस्य आता है, परिवार शांत होता है तो समाज और राष्ट्र भी सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ता है।” इसी संदेश के साथ प्रतिभागियों ने ध्यान, योग और सुदर्शन क्रिया के इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प व्यक्त किया। ईएमएस/05/06/2026