- लखनऊ के मशहूर कव्वाल सुहैल दिलकश वारसी और दिल्ली की प्रसिद्ध कव्वाल बेबी जारा वारसी की हुई जवाबी कव्वाली - साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष शहंशाह आब्दी रहे उपस्थित फतेहपुर (ईएमएस)। हज़रत बुरहान शहीद बाबा रहमतुल्लाह अलैह का 162वां सालाना उर्स अकीदत और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। उर्स में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने मजार पर हाजिरी देकर अमन, खुशहाली और तरक्की की दुआ मांगी। आयोजन ने एक बार फिर हिन्दू-मुस्लिम एकता और गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरत मिसाल पेश की। उर्स के अवसर पर आयोजित भव्य कव्वाली कार्यक्रम में राजधानी लखनऊ के मशहूर कव्वाल सुहैल दिलकश वारसी और दिल्ली की प्रसिद्ध कव्वाल बेबी जारा वारसी के बीच शानदार मुकाबला हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत हम्द, नात और मनकबत से हुई तथा समापन शहादत और सलाम के साथ किया गया। इस दौरान गजलों और सूफियाना कलामों ने भी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कमेटी के अध्यक्ष एवं सभासद प्रतिनिधि कैफी भाई के नेतृत्व में अतिथि कलाकारों का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं की भी बड़ी संख्या में सहभागिता रही। देर रात तक चले कव्वाली मुकाबले में फनकारों ने अपने बेहतरीन कलामों से श्रोताओं का दिल जीत लिया। इस अवसर पर साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार शहंशाह आब्दी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य सूबेदार चंद्रशेखर, इश्तियाक शेख, गुड्डू प्रधान मुआरी, सैयद मोहसिन हसन, सैयद मोहम्मद रेहान अहमद, जाहिद सराय, वसीम घोसी, आसिफ प्रधान, पन्ना सभासद, शमीम सभासद, गनी भाई टाइल्स, शकील प्रधान, कवि एवं शायर शिव शरण बंधु हथगामी तथा युवा कवि शिवम हथगामी समेत अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। उर्स की व्यवस्थाओं को सफल बनाने में कमेटी के सदर कैफी भाई, हाजी सरशार अली पप्पी, डॉ. शमशाद, मोहम्मद अलकाब, मोहम्मद जसीम, मोहम्मद शाहिद, फहद करीम, मोहम्मद इरफान, मोहम्मद जुनैद, हारून कुरैशी, मोहम्मद शादाब, मोहम्मद तौसीफ, मोहम्मद अंसार, फरमान अली, हामिद रजा, अख्तर अली, अल्फिशान, मोहम्मद नाजिम कप्तान, मोहम्मद रिजवान, शीबू इकराम, शहाबुद्दीन, मुन्ना राइन, मोहम्मद नासिर, मोहम्मद वसी, मोहम्मद अयान, मोहम्मद कोनैन, जुनैद अहमद, मोहम्मद इम्तियाज, दिलशाद बावर्ची और मोहम्मद जुबैर सहित अन्य सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उर्स के समापन पर देश में अमन, भाईचारे और खुशहाली के लिए विशेष दुआ की गई। आयोजन में विभिन्न समुदायों के लोगों की मौजूदगी ने इसे सामाजिक सौहार्द और कौमी एकता का प्रतीक बना दिया। शीबू खान/ ईएमएस 05 जून, 2026