- संभागायुक्त ने रबी और खरीफ फसलों की तैयारियों को लेकर बुलाई उच्च स्तरीय बैठक - कमिश्नर ने अधिकारियों को चेताया- मैदानी स्तर पर करें लगातार मॉनिटरिंग, कार्यों में लापरवाही या अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं होगी इंदौर (ईएमएस)। मध्यप्रदेश में किसानों की आर्थिक समृद्धि और कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए राज्य सरकार पूरी गंभीरता से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वर्तमान वर्ष को कृषि कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार को संभागायुक्त कार्यालय में रबी 2025-26 एवं खरीफ 2026 की तैयारियों को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े ने कृषि, सहकारिता, पशुपालन और डेयरी विकास से जुड़े विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सरकार की हर कल्याणकारी योजना का लाभ अंतिम छोर पर बैठे किसान तक अनिवार्य रूप से पहुँचना चाहिए। संभागायुक्त ने कड़े लहजे में अधिकारियों से कहा कि वे केवल दफ्तरों में न बैठें, बल्कि मैदानी स्तर पर जाकर कार्यों की सतत निगरानी (मॉनिटरिंग) करें। उन्होंने साफ किया कि किसानों के काम में किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभागीय कार्यों में पारदर्शिता, उच्च गुणवत्ता और समयसीमा का कड़ाई से पालन होना चाहिए। खेती में पारंपरिक तरीकों के स्थान पर आधुनिक नवाचारों और मत्स्य पालन जैसे संबद्ध क्षेत्रों को बढ़ावा दिया जाए। :: एमपी फार्म गेट ऐप से बदली किसानों की तकदीर, देश में रोल मॉडल बना मप्र :: बैठक में मण्डी बोर्ड की तकनीकी उपलब्धियों और डिजिटल नवाचारों की विशेष सराहना की गई। अधिकारियों ने बताया कि मध्यप्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने एमपी फार्म गेट ऐप जैसी अनूठी एंड्रॉइड एप्लीकेशन विकसित की है। इस ऐप के माध्यम से किसानों को अपनी उपज सीधे अपने घर या खलिहान से बेचने की अभूतपूर्व सुविधा मिली है। इस प्रणाली की सफलता को देखते हुए भारत सरकार सहित देश के अन्य राज्यों ने भी इसकी सराहना की है और वे इसे अपने यहाँ लागू करने की तैयारी कर रहे हैं। वर्तमान में यह ऐप प्रदेश की सभी 259 कृषि उपज मण्डियों में सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है, जिसके माध्यम से अब तक 137.54 लाख मैट्रिक टन कृषि उपज का पारदर्शी तरीके से विक्रय किया जा चुका है। इसके साथ ही मण्डियों में संचालित ई-अनुज्ञा प्रणाली द्वारा एंट्री से लेकर अनुबंध, तौल और बिक्री प्रमाणक तक की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन बना दिया गया है। :: दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए कामधेनु योजना का होगा व्यापक प्रचार :: पशुपालन और डेयरी विकास की समीक्षा करते हुए डॉ. खाड़े ने इंदौर सहकारी दुग्ध संघ के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे दूध उत्पादकों के घर-घर जाकर दूध का संग्रहण करें और उन्हें समय पर भुगतान सुनिश्चित करें। इंदौर दुग्ध संघ द्वारा अब तक 232 नई दुग्ध समितियों का गठन किया जा चुका है और 9 नए मिल्क रूट शुरू किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, भारत सरकार की एनपीडीडी परियोजना के तहत दूध की उच्च गुणवत्ता बनाए रखने के लिए बल्क मिल्क कूलर्स स्थापित किए जा रहे हैं और समितियों को आधुनिक दूध परीक्षण उपकरण दिए गए हैं। दुधारू पशुओं की संख्या बढ़ाने के लिए राज्य शासन की डॉ. भीमराव अम्बेड़कर कामधेनु योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए, जिसके तहत बैंकों के माध्यम से ऋण और शासकीय अनुदान का प्रावधान है। :: सहकारिता विभाग समय पर दे ऋण :: किसानों की आर्थिक रीढ़ को मजबूत करने के लिए संभागायुक्त ने सहकारिता विभाग को निर्देशित किया कि रबी और खरीफ फसलों के लिए किसानों को समय पर ऋण उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे बिना किसी वित्तीय संकट के उन्नत खेती कर सकें और योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठा सकें। इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में संयुक्त आयुक्त विकास श्रीमती शिवानी वर्मा सहित कृषि विभाग, भारतीय कपास निगम लिमिटेड, उद्योग विभाग, राज्य तिलहन उत्पादक संघ, बीज निगम, मत्स्य विभाग, सहकारिता विभाग, मण्डी बोर्ड, पशुपालन विभाग तथा इंदौर दुग्ध संघ के संयुक्त संचालक, सहायक संचालक एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। प्रकाश/05 जून 2026