अंतर्राष्ट्रीय
06-Jun-2026
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-रसूखदारों का ऐसा कब्जा की खाली कराने की सोचना भी गुनाह लाहौर (ईएमएस)। पाकिस्तान में 1913 में ही बने लाहौर जिमखाना का रुतबा आज भी उसी तरह कायम है। पंजाब (पाकिस्तान) के सबसे महंगे इलाके में स्थित 218 अरब (पाकिस्तानी रुपये) की बेशकीमती सरकारी जमीन पर फैले इस एलीट क्लब का सालाना किराया महज 5,000 रुपये है। सरकारी दस्तावेजों के हवाले से इस क्लब से जुड़े कई हैरान करने वाले तथ्य सामने आए हैं। लाहौर जिमखाना क्लब कुल 112 एकड़ यानी 1091 कनाल भूमि में फैला हुआ है। यह माल रोड, जेल रोड और जफर अली रोड से घिरा है, जो वहां का सबसे वीआईपी इलाका माना जाता है। इस पूरी जमीन की मौजूदा मार्केट वैल्यू लगभग 218.2 अरब रुपये आंकी गई है। बाजार दर के हिसाब से इसका उचित सालाना किराया 4.36 अरब रुपये होना चाहिए। वर्ष 2023 की सरकारी नीति के मुताबिक भी क्लबों को मार्केट रेट का 10वां हिस्सा किराए के रूप में देना अनिवार्य है। इस नियम के तहत भी क्लब का सालाना किराया कम से कम 40 करोड़ रुपये बनता है, लेकिन लाहौर जिमखाना साल भर का सिर्फ 5,000 रुपये ही भुगतान करता है, जो प्रति कनाल 50 पैसे से भी कम बैठता है। इसके अलावा, जिमखाना ने बाग-ए-जिन्ना के अंदर कृषि विभाग की साढ़े तीन एकड़ जमीन पर बिना किसी लीज या किराए के एक एक्सक्लूसिव क्रिकेट ग्राउंड पर भी अवैध कब्जा जमा रखा है। इस क्लब की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ आम आदमी की एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसकी मेंबरशिप केवल ग्रेड-18 और उससे ऊपर के सिविल सेवकों, सशस्त्र बलों के उच्च अधिकारियों को ही मिलती है या फिर इसे विरासत में ट्रांसफर किया जा सकता है। इसके साधारण सदस्यों की सूची को किसी गोपनीय दस्तावेज की तरह छुपाकर रखा जाता है। निजी क्लब होने के बावजूद इसे सरकारों से जनता के टैक्स का करोड़ों रुपया बतौर गिफ्ट मिलता रहा है। साल 1985 में तत्कालीन राष्ट्रपति जिया-उल-हक और प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने इसे 20-20 लाख रुपये दिए थे। इसके बाद 2006 में मुख्यमंत्री परवेज इलाही ने 5 करोड़ रुपये और 2014 में मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ ने 1 करोड़ रुपये की सरकारी मदद इस क्लब को पहुंचाई। व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल यह रिपोर्ट पाकिस्तान की न्याय प्रणाली और व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है, जहां अमीरों और गरीबों के लिए अलग-अलग कानून नजर आते हैं। इस्लामाबाद और पंजाब में गरीबों की झुग्गियों (कच्ची आबादी) पर प्रशासन तुरंत बुलडोजर चला देता है। इस्लामाबाद के आई-11 इलाके में कार्रवाई करके 25,000 लोगों को बेघर कर दिया गया, लेकिन 218 अरब रुपये की सरकारी जमीन पर काबिज लाहौर जिमखाना पर कोई कार्रवाई नहीं होती। उलटा, इसकी लीज खत्म होने से पहले ही 1996 में जल्दबाजी दिखाते हुए इसे अगले 50 साल (2000 से 2050 तक) के लिए एडवांस में बढ़ा दिया गया था। वीरेंद्र/ईएमएस 06 जून 2026