अंतर्राष्ट्रीय
07-Jun-2026
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-ईरानी विदेशी मंत्री ने कहा- खामनेई ने बंकर में जाने से कर दिया था साफ इनकार तेहरान,(ईएमएस)। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने एक इंटरव्यू में एक ऐसा सच बताया जिसने सबको चौंका दिया। अरागची ने बताया कि 28 फरवरी को संघर्ष के शुरुआती घंटों में जब दिग्गज सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामनेई के दफ्तर पर हमला हुआ तो वह खुद उसी इमारत में मौजूद थे। अरागची ने कहा जब मैं मलबे से बाहर निकल रहा था तो मेरा पहला ख्याल और सबसे बड़ी चिंता हमारे लीडर की सलामती को लेकर थी। हमले के 48 घंटों तक अरागची खुद इसी अनिश्चितता में रहे कि आखिर सुप्रीम लीडर किस हाल में है। हमले के बाद सिक्योरिटी गार्ड्स और कमांडरों ने सुप्रीम लीडर को बार-बार बंकर या किसी सुरक्षित जगह पर जाने की मिन्नतें की। लेकिन आयतुल्ला अली खामनेई ने ऐसा करने से साफ इंकार कर दिया। मीडिया रिपोर्ट में विदेश मंत्री के मुताबिक खामनेई ने दो टूक शब्दों में कहा, मैं तब तक किसी शेल्टर या सुरक्षित जगह पर नहीं जाऊंगा जब तक ईरान के हर नागरिक के पास सुरक्षित जगह ना हो। मेरे लोगों के साथ जो भी होगा वही मेरे साथ भी होगा। सीधी धमकी और मौत के साए के बीच खामनेई वहीं डटे रहे और कामकाज की देखरेख करते रहे। इस खौफनाक मंजर के अलावा अरागची ने एक बड़ा भू राजनीतिक खुलासा भी किया। उन्होंने बताया कि संघर्ष से पहले ही ईरान ने फारस की खाड़ी पर अपने पड़ोसी देशों को चेतावनी दे दी थी। अरागची ने कहा कि अगर ईरान पर हमले के लिए किसी भी पड़ोसी देश के अमेरिकी बेस का इस्तेमाल हुआ तो ईरान उसका विनाशकारी जवाब देगा। उनका कहना था कि क्षेत्रीय सरकारों ने अपनी जमीन के इस्तेमाल का विरोध किया था, लेकिन अमेरिका ने उनकी एक ना सुनी और ईरान पर हमले कर दिए। ईरान के विदेश मंत्री का यह सनसनीखेज खुलासा बताता है कि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच यह संघर्ष कितना भयानक था और कैसे ईरान का शीर्ष नेतृत्व मौत के मुंह से वापस लौटा है। खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लेकर ईरान की ये चेतावनी क्या मिडिल ईस्ट के एक नए युद्ध की नींव रख रही है। सिराज/ईएमएस 07जून26