अंतर्राष्ट्रीय
07-Jun-2026
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-राफेल ने ग्रिपेन विमानों के साथ मिलकर छह रूसी विमानों को रोका, वीडियो वायरल मॉस्को,(ईएमएस)। फ्रांस और रूस के लड़ाकू विमानों का बाल्टिक सागर के ऊपर आमना-सामना हुआ। राफेल विमानों ने बाल्टिक सागर के ऊपर तनावपूर्ण स्थिति में रूसी सुखोई एसयू-35 फाइटर जेट को रोका। लिथुआनिया के सियाउलियाई एयर बेस से उड़े दो फ्रांसीसी राफेल विमानों ने ग्रिपेन विमानों के साथ मिलकर छह रूसी विमानों के बेड़े को रोका, जिसमें एक एसयू-35 जेट था। यह घटनाक्रम इस हफ्ते की शुरुआत में हुई। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांस के जॉइंट स्टाफ ने इस इंटरसेप्शन का वीडियो जारी किया है। फ्रांस के जॉइंट स्टाफ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि हमारे पायलटों ने स्थिति को बढ़ाए बिना मॉनिटर किया। नाटो के बाल्टिक एयर पुलिसिंग मिशन के तहत राफेल विमान सहयोगियों के साथ मिलकर बाल्टिक हवाई क्षेत्र की निगरानी और सुरक्षा करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक एसयू-35 एयर-सुपीरियरिटी फाइटर विमान दो टोही विमानों, एसयू-24 और एसयू-34 स्ट्राइक फाइटर विमानों और एक सेकंड-76 ट्रांसपोर्ट विमान के साथ चल रहा था। इसमें एसयू-35 अकेला विमान था, जो हवा से हवा में लड़ाई के लिए सबसे बेहतर है। इसलिए उसे दुश्मन इलाके के करीब पहुंचने पर दूसरे रूसी विमानों ने एस्कॉर्ट किया। रणनीतिक रूप से अहम बाल्टिक सागर के ऊपर नाटो और रूसी विमानों के बीच हवाई मुठभेड़ पिछले दो सालों से आम बात है। रूस अक्सर नाटो देशों के प्रतिक्रिया समय और जवाबी रणनीतियों का पता लगाने के लिए बाल्टिक सागर के ऊपर ऐसे मिशन चलाता है। इनसे संकेत मिलता है कि रूस यूरोप के साथ बड़े संघर्ष के लिए तैयार है। यह पहली बार है, जब फ्रांस के राफेल ने रूस के फाइटर जेट एसयू-35 को इतनी करीब से देखा और इंटरसेप्ट किया। इसलिए इस घटना ने रूस और फ्रांस के फ्रंटलाइन नॉन-स्टेल्थ फाइटर जेट की तुलना पर चर्चा छेड़ दी है। जानकारी के मुताबिक एसयू-35 और राफेल दोनों 4.5-जेनरेशन के फाइटर जेट हैं। सुखोई एसयू-35 बड़ा और ताकतवर एयर-सुपीरियरिटी फाइटर है, जो एसयू-27 फ्लैंकर से बना है। वहीं राफेल एक छोटा ओमनीरोल फाइटर है, जो सेंसर फ्यूजन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और कई तरह के काम करने की क्षमता है। राफेल और एसयू-35 दोनों ही फाइटर जेट परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हैं। दोनों ही नॉन-स्टेल्थ एयरक्राफ्ट हैं लेकिन राफेल को अपने कॉम्पैक्ट साइज, रडार-जैमिंग क्षमताओं और कम्पोजिट-मटीरियल वाली सतह के कारण बढ़त हासिल है। इस वजह से राफेल मुश्किल एयरस्पेस में बेहतर सर्वाइवेबिलिटी दिखाता है और बीवीआर कॉम्बैट के लिए उपयुक्त है। सिराज/ईएमएस 07जून26