राष्ट्रीय
06-Jun-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। आठवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को अंतिम रूप देने से पहले भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों का संगठन अपनी मांगों को लेकर सक्रिय हुआ है। आयोग को 15 जून तक विभिन्न पक्षों से सुझाव प्राप्त होने हैं और इसी क्रम में आईएएस एसोसिएशन ने वेतन संरचना, कठिन क्षेत्रों में तैनाती से जुड़े भत्तों तथा नई पेंशन व्यवस्था की समीक्षा की मांग उठा दी है। रिपोर्टों के अनुसार, आईएएस एसोसिएशन ने आयोग को सौंपे गए ज्ञापन में कहा है कि केंद्र सरकार की नई एकीकृत पेंशन योजना को कर्मचारियों के बीच अपेक्षित समर्थन नहीं मिला है। आईएएस संगठन का मानना है कि योजना में कुछ संशोधन होने के बावजूद इसके कई प्रावधान अब भी कर्मचारियों की चिंताओं का कारण बने हुए हैं। इसलिए पेंशन व्यवस्था की दुबारा समीक्षा की जाए। आईएएस एसोसिएशन ने विशेष रूप से उन अधिकारियों की स्थिति पर ध्यान आकर्षित किया है, जो लद्दाख, पूर्वोत्तर राज्यों, सीमावर्ती क्षेत्रों, आदिवासी इलाकों और वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों जैसे कठिन और चुनौतीपूर्ण स्थानों पर तैनात रहते हैं। उनका कहना है कि वर्तमान भत्ता प्रणाली इन क्षेत्रों में काम करने वाले अधिकारियों को पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं देती। संगठन का तर्क है कि सातवें वेतन आयोग के दौरान कई अलग-अलग भत्तों को समाप्त कर एकीकृत कठिन स्थान भत्ता (टीएलए) लागू किया था। इससे पहले अधिकारियों को क्षेत्र की भौगोलिक, सुरक्षा और सामाजिक परिस्थितियों के आधार पर विभिन्न प्रकार के भत्ते मिलते थे। नई व्यवस्था में केवल एक निश्चित दर का भत्ता मिलने से वास्तविक चुनौतियों का समुचित मूल्यांकन नहीं हो पाता। आईएएस एसोसिएशन ने कहा है कि कई राज्यों में जिलों का बार-बार पुनर्वर्गीकरण किया जाता है, जिससे कठिन क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों के हित प्रभावित होते हैं। उनका मानना है कि सुरक्षा स्थिति में सुधार के बावजूद कई इलाकों में स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी अब भी बनी हुई है। इसके बाद आठवें वेतन आयोग से उम्मीद की जा रही है कि वह इन मुद्दों पर व्यापक विचार कर कर्मचारियों के हित में संतुलित सिफारिशें देगा। आशीष दुबे / 06 जून 2026