क्षेत्रीय
08-Jun-2026
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:: पोहे के लिए किसी दिन की जरूरत नहीं, यह तो हमारी संस्कृति है : मंत्री विजयवर्गीय इंदौर (ईएमएस)। इंदौर की सुबह जब पोहे की प्लेट पर सुनहरी सेव की बारिश के साथ होती है, तो वह महज एक नाश्ता नहीं, बल्कि शहर का एक उत्सव होता है। रविवार को विश्व पोहा दिवस पर यह उत्सव शहर के हर कोने में अपने पूरे शबाब पर दिखा। राजवाड़ा की ऐतिहासिक फिजाओं से लेकर विश्राम बाग के प्रांगण तक, इंदौरी स्वाद का जादू ऐसा चला कि हर जुबान पर बस एक ही चर्चा थी- हमारा पोहा, हमारी शान। :: यह महज नाश्ता नहीं, हमारी पहचान :: ऐतिहासिक राजवाड़ा परिसर में आयोजित पोहा उत्सव में प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शिरकत की। पोहे का स्वाद लेते हुए उन्होंने कहा, इंदौर में पोहे के लिए किसी एक दिन की जरूरत ही नहीं है। यहां तो सुबह की शुरुआत ही पोहे से होती है और बातचीत भी पोहे पर होती है। यह महज नाश्ता नहीं, हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है। इस मौके पर इंदौर-2 के विधायक रमेश मेंदोला और नगर भाजपा अध्यक्ष सुमित मिश्रा भी उपस्थित रहे। :: महापौर ने सराहा छोटे व्यापारियों का हुनर :: दूसरी ओर, विश्राम बाग में आयोजित इंदौरी पोहा, इंदौरी बात महापौर के साथ कार्यक्रम में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शहर के पोहा निर्माताओं का सम्मान किया। महापौर ने कहा कि हमारे छोटे व्यापारियों की मेहनत ने ही इंदौर के पोहे को वैश्विक पहचान दिलाई है। उन्होंने महिला सशक्तिकरण का संदेश देते हुए उपस्थित नागरिकों से जल संरक्षण के लिए घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अपनाने का संकल्प लेने का आह्वान भी किया। :: इंदौरी पोहे की खासियत :: भाप की महक : पोहे को पानी से नहीं, भाप से पकाया जाता है। सेव का तड़का : महीन इंदौरी सेव के बिना पोहा अधूरा है। अनोखी खुशबू : सौंफ और राई का तड़का इसे सबसे अलग बनाता है। - 07 जून 2026