राष्ट्रीय
08-Jun-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग के बड़े मामले में मिजोरम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में चार स्थानों पर एक साथ छापेमारी की है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 17 के तहत हुई है। ईडी की जांच नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की अगरतला जोनल यूनिट द्वारा हाल ही में जब्त की गई 49.101 किलोग्राम मेथामफेटामाइन और 40 ग्राम हेरोइन से जुड़े मामले से जुड़ी है। जांच एजेंसी की छापेमारी मिजोरम-म्यांमार और त्रिपुरा-बांग्लादेश सीमावर्ती इलाकों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल में भी की गई, जहाँ संबंधित ठिकाने सीमाओं से कुछ ही सौ मीटर की दूरी पर मौजूद हैं। जांच में सामने आया है कि एक संगठित अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क म्यांमार से मेथामफेटामाइन को मिजोरम के चम्फाई/जोकॉथर सेक्टर के रास्ते भारत में लाता था, और फिर इस त्रिपुरा में रिसीवर्स तक पहुंचाया जाता था। ईडी के अनुसार, इस आपराधिक नेटवर्क से अर्जित 142 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति की पहचान हो चुकी है, जिसे कई बैंक खातों और शेल कंपनियों के माध्यम से ठिकाने लगाया गया था। यह एक संगठित सीमा-पार ड्रग सिंडिकेट है, जिसके वित्तीय लेन-देन और नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है। इसके पहले भी ईडी ने मिजोरम में म्यांमार से जुड़ी सुपारी तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के बड़े मामले में कार्रवाई की थी। तब चम्फाई जिले में नौ ठिकानों पर छापेमारी की गई थी और 970 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति से जुड़े सबूत मिले थे। जांच में सामने आया था कि अवैध सुपारी म्यांमार से तिउ नदी के रास्ते आती थी और स्थानीय नेटवर्क के जरिए मिजोरम से असम तक पहुंचाई जाती थी, जिसमें सिलचर के व्यापारी और फाइनेंसर भी शामिल थे, और बड़े पैमाने पर फर्जी ई-वे बिल व कर धोखाधड़ी की गई थी। दोनों ही मामलों में, ईडी सीमा पार से संचालित हो रहे इन आपराधिक सिंडिकेट्स पर लगातार शिकंजा कस रही है और आगे की कार्रवाई जारी है। आशीष दुबे / 08 जून 2026