राष्ट्रीय
08-Jun-2026


-शिक्षामंत्री के इस्तीफे की मांग, हैदराबाद में होगी अगली बैठक नई दिल्ली,(ईएमएस)। नई दिल्ली में विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई, जिसमें भाजपा का एकजुट होकर मुकाबला करने की रणनीति पर चर्चा हुई। जानकारी के अनुसार, गठबंधन ने पांच प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनी है, जिन पर भविष्य की कार्ययोजना आधारित होगी। इन निर्णयों में अहम घोषणा यह रही कि गठबंधन की अगली बैठक हैदराबाद में आयोजित होगी, जिससे गठबंधन की क्षेत्रीय पहुंच और मजबूत होगी। इसके अतिरिक्त, विपक्षी ब्लॉक ने मोदी सरकार से शिक्षा मंत्री के तत्काल इस्तीफे की मांग की है, हालांकि इसके कारणों का विस्तृत ब्यौरा अभी सामने नहीं आया है। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी व अभिषेक बनर्जी, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव और शिवसेना (उबाठा) के उद्धव ठाकरे सहित 23 विपक्षी दलों के शीर्ष नेता शामिल हुए। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पुष्टि की कि इतनी बड़ी संख्या में राजनीतिक दलों ने बैठक में भागीदारी की, जो गठबंधन की व्यापकता को दिखाता है। हालांकि, कुछ प्रमुख दल इस बैठक से अनुपस्थित रहे। द्रमुक (डीएमके) और आम आदमी पार्टी (आप) ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। आम आदमी पार्टी ने पहले ही सार्वजनिक रूप से गठबंधन से दूरी बनाने की घोषणा कर दी थी, जबकि द्रमुक ने तमिलनाडु में कांग्रेस द्वारा उससे संबंध तोड़कर टीवीके (टीवीके) नीत सरकार में शामिल होने के फैसले के बाद बैठक का बहिष्कार करने की बात की थी। इस बीच, थलापति विजय की टीवीके के गठबंधन के नए घटक के रूप में शामिल होने की संभावना है,जो गठबंधन की पहुंच का विस्तार कर सकती है। गठबंधन ने भविष्य की रणनीति पर विचार-विमर्श किया और आगामी राज्य चुनावों तथा 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय मुद्दों पर मोदी सरकार का मुकाबला करने के लिए खुद को एक एकजुट मोर्चा के रूप में पेश करने का प्रयास करेगा। विपक्षी दल देश में भाजपा के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने और विभिन्न राज्यों में सामने आ रही चुनौतियों के मद्देनजर एकजुट होने की आवश्यकता महसूस कर रहे हैं। इस एकता का लक्ष्य एक मजबूत विकल्प प्रस्तुत करना है, जो देश के राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव ला सके। आशीष दुबे / 08 जून 2026 अर्जेंटीना से एलएनजी आपूर्ति की नई राह: अडानी पोर्ट्स को मिला महत्वपूर्ण ठेका--------VY नई दिल्ली (ईएमएस)। देश में एलपीजी की बढ़ती कीमतों और इजरायल-ईरान तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए गैस आपूर्ति में आ रही दिक्कतों के बीच, भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर एक अहम खबर सामने आई है। यह खबर भविष्य में भारत की गैस आयात निर्भरता को कम करने और आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। दरअसल दरअसल, दिग्गज भारतीय कारोबारी गौतम अडानी की कंपनी, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (एपीएसईजेड), ने अर्जेंटीना के पहले लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) एक्सपोर्ट प्रोजेक्ट के लिए 10 साल का महत्वपूर्ण समुद्री सेवा कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया है। यह कॉन्ट्रैक्ट अडानी पोर्ट्स के लिए दक्षिण अमेरिका में उसके अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिचालन का पहला विस्तार है, जो उसकी वैश्विक उपस्थिति को मजबूत करता है। एपीएसईजेड की सहायक कंपनी अडानी हार्बर इंटरनेशनल एफजीसीओ को यह ठेका अर्जेंटीना के मेरिडियन ग्रुप के कंसोर्टियम के साथ मिलकर ग्लोबल टेंडर प्रक्रिया के तहत मिला है। यह प्रोजेक्ट डेवलपर सदर्न एनर्जी एस.ए. (एसईएसए) द्वारा निकाला गया था। इस समझौते के तहत, अडानी-मेरिडियन कंसोर्टियम प्रोजेक्ट साइट से चलने वाले एलएनजी कैरियर के लिए एंड-टू-एंड समुद्री सेवाएं प्रदान करेगा। इसमें टगबोट का संचालन, ऑफशोर लॉजिस्टिक्स, सप्लाई सपोर्ट और क्रू ट्रांसफर सर्विस शामिल हैं। इन कार्यों के लिए कंपनी चार उच्च-स्पेसिफिकेशन वाले टगबोट, एक एंकर हैंडलिंग टग सप्लाई वेसल और एक क्रू बोट तैनात करेगी। इस कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ा अनुमानित निवेश करीब 70 मिलियन डॉलर होने का अनुमान है, और इस परियोजना पर सितंबर 2027 से काम शुरू होने की उम्मीद है। यह कॉन्ट्रैक्ट अडानी समूह के लिए इजरायल और श्रीलंका के बाद दक्षिण अमेरिकी बाजार में एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार खोलता है। कंपनी का लक्ष्य साल 2030 तक दुनिया का सबसे बड़ा बंदरगाह ऑपरेटर बनना है, और यह कदम उस दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है। इस अनुबंध से अडानी पोर्ट्स को प्रति वर्ष लगभग 7 मिलियन डॉलर की निश्चित आय होगी। भारत के लिए खबर रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। भविष्य में इस परियोजना के माध्यम से अर्जेंटीना से भारत को गैस का निर्यात संभव हो सकेगा, जिससे गैस आपूर्ति के लिए खाड़ी देशों पर हमारी निर्भरता कम होगी। आशीष दुबे / 08 जून 2026 मनाली में विदेशी महिला से छेड़छाड़: वायरल वीडियो के बाद पुलिस जांच शुरू मनाली,(ईएमएस)। हिमाचल प्रदेश के मनाली में विदेशी महिला पर्यटक के साथ कथित छेड़छाड़ का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। यह घटना 3 जून की है, जिसका सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। वीडियो में एक युवक सड़क पर अकेली जा रही महिला के साथ आपत्तिजनक हरकतें करता दिख रहा है। हालांकि, घटना स्थल की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है और मामले में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है। वीडियो सामने आने के बाद, मनाली के एसडीएम और डीएसपी दोनों ने जांच के आदेश दिए हैं तथा आरोपी की पहचान कर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इस घटना ने लोगों और पर्यटन उद्योग से जुड़े व्यक्तियों में गहरी चिंता पैदा कर दी है। हिमाचल प्रदेश, जो अतिथि देवो भवः की परंपरा के तहत सुरक्षित पर्यटन स्थल माना जाता है, के व्यापारियों का कहना है कि ऐसी घटनाएं अकेले यात्रा करने वाली महिलाओं और विदेशी पर्यटकों में असुरक्षा बढ़ा सकती हैं, जिससे पर्यटन पर बुरा असर पड़ेगा। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इस घटना पर गुस्सा जाहिर किया है और आरोपी की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है, ताकि प्रदेश की छवि खराब न हो। पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी है और मामले की आगे की जांच जारी है। आशीष दुबे / 08 जून 2026 ईरान ने इजरायल के दो अत्यंत महत्वपूर्ण एयरबेस पर हमला कर दुनिया को चौंकाया तेहरान,(ईएमएस)। ईरान और इजरायल के बीच तनाव खतरनाक स्तर पर पहुँच चुका है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) एयरोस्पेस फोर्स ने इजरायल के दो अत्यंत महत्वपूर्ण एयरबेस, नेवातिम और तेल नोफ, पर बड़े हमले कर दिए हैं। इस कार्रवाई को ऑपरेशन नसर नाम दिया गया है, और आईआरजीसी ने दावा किया है कि उसके लड़ाकों ने इन सामरिक ठिकानों को सफलतापूर्वक टारगेट किया। ये दोनों एयरबेस इजरायली वायुसेना के सबसे रणनीतिक और महत्वपूर्ण ठिकानों में शामिल हैं, जहां से अक्सर इजरायल अपनी हवाई शक्ति का संचालन करता है। नेतन्याहू प्रशासन के लिए ईरान का यहाँ तक पहुँचना किसी बड़े झटके से कम नहीं है। ईरान के अनुसार, यह हमला इजरायल द्वारा उसके तीन रडार स्थलों और दक्षिण-पश्चिमी इलाके में स्थित महशहर पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर किए गए मिसाइल हमलों का सीधा जवाब है। ईरान ने पहले भी अमेरिका के माध्यम से इजरायल को लेबनान पर हमले रोकने की चेतावनी दी थी, लेकिन जब हमले जारी रहे, तब ईरान ने खुद ही जवाबी कार्रवाई की। हमलों के बाद इजरायल के कई शहरों में एयर रेड सायरन बज उठे और इजरायली रक्षा प्रणालियों ने मिसाइलों को रोकने का प्रयास किया। गृह मोर्चे की कमान ने नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी। यह गंभीर स्थिति तब उत्पन्न हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करने के अंतिम प्रयास कर रहे थे। ट्रंप ने कहा कि समझौता लगभग हो चुका था, लेकिन अब यह हमला सब बिगाड़ गया। उन्होंने दोनों पक्षों से बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर जवाबी हमला न करने का दबाव भी डाला, ताकि हिंसा का यह दुष्चक्र न जारी रहे। इस बीच, ईरान की सेना ने कड़ी चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका या इजरायल ने आगे कोई कार्रवाई की, तब पूरे क्षेत्र में स्थित अमेरिकी और इजरायली ठिकानों पर बड़े हमले किए जाएंगे। इराक के शिया मिलिशिया कताइब हिजबुल्लाह ने भी अमेरिका को चेतावनी दी है। फरवरी 28 से शुरू हुआ संघर्ष अब पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर होता दिख रहा है, और ईरान का इजरायली वायुसेना के गढ़ों पर सीधा हमला क्षेत्र में एक बड़े युद्ध के संकेत दे रहा है। वर्तमान में पश्चिम एशिया में स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। आशीष दुबे / 08 जून 2026 टीएमसी में बड़ी बगावत: 20 सांसदों ने एनडीए को समर्थन देने का ऐलान किया राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने इस्तीफा दिया कोलकाता (ईएमएस)। पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को बड़ा झटका लगा है, जहां उसके 20 लोकसभा सांसदों ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को समर्थन देने का ऐलान किया है। इन सांसदों ने सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंपकर संसद के निचले सदन में उनके लिए एक अलग गुट के रूप में मान्यता देने की मांग की है। इस नाटकीय घटनाक्रम के बीच, तृणमूल के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह सब तब हुआ जब इन सांसदों ने केंद्रीय मंत्री और भाजपा के बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव के आवास पर महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में सुखेंदु शेखर भी मौजूद थे। बैठक के बाद, इन सांसदों ने एकजुट होकर एनडीए के प्रति अपना समर्थन जताकर लोकसभा में एक अलग गुट के रूप में मान्यता मांगी। बागी सांसदों के इस समूह ने काकोली घोष दस्तीदार को अपना नेता घोषित करने की भी मांग की है। बैठक के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता और बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद थे। लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, अबू ताहिर, अरूप चक्रवर्ती, खलीलुर रहमान, शर्मिला सरकार, असित मल, कालीपद सोरेन, जगदीश बसुनिया और प्रसून बनर्जी जैसे 20 सांसद शामिल हैं। इन सभी ने एनडीए में शामिल होने की इच्छा जाहिर की है। उधर,राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर ने सभापति को अपना इस्तीफा सौंपा और तृणमूल कांग्रेस छोड़ने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने फैसले से पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को व्हाट्सएप और ईमेल के जरिए सूचित किया है। सुखेंदु रॉय ने पार्टी के भीतर बढ़ती असंतोष को उजागर कर इसकी आशंका जाहिर की कि जैसी स्थिति विधानसभा में विधायकों के साथ पैदा हुई थी, वैसी ही लोकसभा या राज्यसभा में भी पैदा हो सकती है। टीएमसी में यह बड़ी बगावत तब हुई है जब पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी इंडिया ब्लॉक की महत्वपूर्ण बैठक के लिए दिल्ली पहुंची थीं। यह घटना पार्टी के लिए एक गंभीर संकट का संकेत है, खासकर तब जब इससे पहले 3 जून को भी टीएमसी को झटका लगा था, जब बंगाल के 80 में से 58 विधायकों ने एक अलग गुट बना लिया था, जिसका नेतृत्व ऋतब्रत कर रहे थे। वर्तमान में लोकसभा में टीएमसी के 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं। 20 सांसदों के इस कदम से पार्टी की राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति और कमजोर हो सकती है, और आगामी समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति में और हलचल देखने को मिल सकती है। आशीष दुबे / 08 जून 2026 मॉनसून ने पकड़ी गति, कर्नाटक में शुरु हुआ भारी बारिश का दौर अगले दो-तीन दिनों में कई राज्यों में पहुंचेगा नई दिल्ली (ईएमएस)। दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने अपनी रफ्तार पकड़ ली है, इसकारण कर्नाटक के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश का दौर जारी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कर्नाटक के तटीय जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी कर लोगों को अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी है। मॉनसून के अगले तीन से चार दिनों में देश के कई और राज्यों को कवर करने की संभावना है। आईएमडी के अनुसार मॉनसून पश्चिम-मध्य भारत और पूर्वोत्तर बंगाल की खाड़ी के कई महत्वपूर्ण इलाकों में सफलतापूर्वक आगे बढ़ चुका है। मानसून ने नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम के पूरे क्षेत्र और असम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा के कुछ हिस्सों को अपनी चपेट में ले लिया है। मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि अगले 3-4 दिनों के भीतर मॉनसून मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों के बाकी बचे हिस्सों में भी अपनी पकड़ मजबूत कर लेगा, जिससे इन क्षेत्रों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी। मॉनसून की बढ़ती गति के कारण कर्नाटक में बारिश की तीव्रता बढ़ गई है। आईएमडी ने तटीय जिलों दक्षिण कन्नड़ और उडुपी के लिए रेड अलर्ट जारी किया था। इसके बाद मंगलवार के लिए दक्षिण कन्नड़, उडुपी, उत्तर कन्नड़, चिक्कमगलूरु और शिवमोग्गा सहित पांच जिलों में रेड अलर्ट घोषित किया है। बुधवार को यह अलर्ट उडुपी, उत्तर कन्नड़, चिक्कमगलूरु, शिवमोग्गा, बेलगावी, धारवाड़ और हावेरी सहित सात जिलों तक बढ़ा दिया गया है। रेड अलर्ट का अर्थ है कि संबंधित क्षेत्रों में 24 घंटों के भीतर 20 सेंटीमीटर से अधिक अत्यधिक भारी बारिश होने की आशंका है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव, सड़कों पर पानी और यातायात बाधित होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और सभी जरूरी एहतियाती कदम उठाएं। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है, जबकि किसानों को भी अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए विशेष उपाय करने को कहा गया है। मौसम विभाग स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और आवश्यकतानुसार अलर्ट को अपडेट किया जाएगा। कर्नाटक सरकार भी किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने और राहत कार्यों के लिए पूरी तरह तैयार है। आशीष दुबे / 08 जून 2026 भारत ने शुरु किया अवैध बांग्लादेशियों निकालना, ढाका को लगी मिर्ची नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत द्वारा बांग्लादेश सीमा पर कथित अवैध प्रवासियों को उनके देश वापस भेजने के प्रयासों ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच संबंधों में तनाव बढ़ा दिया है। बांग्लादेशी जियोपॉलिटिकल विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि यह सिलसिला जारी रहा, तब द्विपक्षीय संबंध बिगड़ सकते हैं, जो दोनों देशों के लिए स्थिर रिश्ते बनाए रखने की अनिवार्यता के बावजूद चिंताजनक है। हाल ही में, पंचगढ़ सदर उपजिले में बाराबारी-प्रधानपारा बॉर्डर पर नो-मैन्स लैंड में बीते तीन दिनों से फंसे करीब 10 लोगों को लेकर भारत की सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और बांग्लादेश के बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) के बीच एक फ्लैग मीटिंग विफल रही। इन लोगों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, और ये तब फंसे जब बीजीबी ने बीएसएफ के कथित तौर पर उन्हें जबरन बांग्लादेश भेजने के प्रयास को विफल किया। यह स्थिति तब बनी है जब बांग्लादेश में तारिक रहमान की सरकार बनने के बाद दोनों देश मोहम्मद यूनुस के समय खराब हुए संबंधों को बेहतर कर रहे हैं। ढाका यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल रिलेशंस के पूर्व प्रोफेसर ने कहा कि लोगों को जबरन वापस भेजना और सीमा पर हत्याएं गैर-न्यायिक हरकतें हैं, जो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करती हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि नो-मैन्स लैंड में लोगों को फंसाकर छोड़ देना मानवीय संकट पैदा करता है और यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने तीस्ता जल-बंटवारे के लंबित मुद्दे और दिसंबर में समाप्त हो रही गंगा जल-बंटवारा संधि के नवीनीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया। बांग्लादेश की बीजीबी ने बताया है कि मई 2024 और इस साल जनवरी के बीच कम से कम 2,303 लोगों को बांग्लादेश भेजा गया, जिसमें 126 भारतीय नागरिक और 38 म्यांमार के नागरिक शामिल थे। इस मामले को लेकर 30 अप्रैल को बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत के डिप्टी हाई कमिश्नर पवन बधे को तलब किया था और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की टिप्पणियों को अपमानजनक करार दिया था। वहीं, भारत ने अपनी स्थिति साफ कर कहा है कि वह अवैध प्रवासियों को वापस भेज रहा है। असम के मुख्यमंत्री ने 15 अप्रैल को इंटरव्यू में बताया था कि सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद इस साल 1,400 से अधिक लोगों को वापस भेजा गया है। उन्होंने बाद में सोशल मीडिया पर 20 बिना कागजात वाले बांग्लादेशी प्रवासियों को पकड़कर वापस भेजने की जानकारी दी थी। भारत के विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश को बताया है कि उसने सितंबर 2020 से नागरिकता की पुष्टि का इंतजार कर रहे 2,868 संदिग्ध अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के बारे में 1,137 राजनयिक नोट और 456 रिमाइंडर दिए हैं, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिला है। यह गतिरोध दोनों देशों के लिए एक जटिल कूटनीतिक चुनौती बना हुआ है। आशीष दुबे / 08 जून 2026