क्षेत्रीय
08-Jun-2026
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बेमेतरा(ईएमएस)। परीक्षा परिणाम में कथित गड़बड़ियों, परीक्षा देने के बावजूद अनुपस्थित दर्शाने और लंबित परिणामों के विरोध में छात्रों का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दिया। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय से संबद्ध जवाहरलाल नेहरू कला एवं विज्ञान महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने नेशनल हाईवे-30 पर चक्काजाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया, जो कई घंटों तक जारी रहा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर परीक्षा परिणाम जारी करने में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। छात्रों का कहना है कि बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को बिना कारण एटीकेटी दे दी गई है, जबकि कई छात्रों को परीक्षा में शामिल होने के बावजूद अनुपस्थित दर्शाया गया है। इसके अलावा अनेक विद्यार्थियों के परिणाम अब तक घोषित नहीं किए गए हैं और अंकपत्रों में भी त्रुटियां पाई गई हैं। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में बिना पर्याप्त जांच के यूएफएम की कार्रवाई कर दी गई, जिसके कारण कई विद्यार्थियों के परिणाम रोक दिए गए हैं। उनका कहना है कि इससे छात्रों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हो रहा है। चक्काजाम के कारण हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया। हालांकि छात्र अपनी मांगों के समाधान तक आंदोलन जारी रखने पर अड़े रहे। छात्रों ने कहा कि अधिकांश विद्यार्थी किसान, मजदूर और मध्यमवर्गीय परिवारों से आते हैं। उनके अभिभावक कठिन परिश्रम करके बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाते हैं। ऐसे में प्रशासनिक या तकनीकी त्रुटियों के कारण छात्रों का भविष्य अधर में लटकना बेहद चिंताजनक है। प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने अपनी मांगों का विस्तृत ज्ञापन भी सौंपा। उनकी प्रमुख मांगों में एटीकेटी मामलों की निःशुल्क पुनः जांच, परीक्षा देने के बावजूद अनुपस्थित दर्शाए गए छात्रों के मामलों का तत्काल निराकरण, लंबित परिणामों की शीघ्र घोषणा और अंकपत्रों में हुई त्रुटियों का सुधार शामिल है। इसके अलावा छात्रों ने यूएफएम के सभी मामलों की निष्पक्ष समीक्षा कर गलत कार्रवाई निरस्त करने, किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क न लेने तथा विद्यार्थियों की समस्याओं का महाविद्यालय और विश्वविद्यालय स्तर पर प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने की मांग की है। विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें बार-बार विश्वविद्यालय के चक्कर लगाने के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे आर्थिक और मानसिक परेशानी बढ़ती है। उन्होंने मांग की है कि यदि किसी मामले में विश्वविद्यालय जाना आवश्यक हो, तो महाविद्यालय का अधिकृत प्रतिनिधिमंडल विद्यार्थियों के साथ उपस्थित होकर समाधान की प्रक्रिया में सहयोग करे। सत्यप्रकाश(ईएमएस)08 जून 2026