राज्य
08-Jun-2026
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- रिसॉर्ट की बीमा पॉलिसी को आधार बनाकर चल रहा था क्रूज जबलपुर, (ईएमएस)। बरगी डैम में गत 30 अप्रैल 2026 को हुए चर्चित क्रूज हादसे की जांच के दौरान एक ऐसा खुलासा सामने आया है, जिसने पूरे मामले को केवल दुर्घटना नहीं बल्कि संभावित प्रशासनिक और दस्तावेजी अनियमितताओं के दायरे में ला खड़ा किया है। इस घटना की जांच कर रहे जस्टिस संजय िद्वेदी के नेतृत्व वाले जांच आयोग के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों और हलफनामे में दावा किया गया है कि दुर्घटनाग्रस्त क्रूज और उसमें सवार पर्यटकों का कोई वैध बीमा नहीं था। आरोप है कि क्रूज संचालकों ने क्रूज के लिए वैध बीमा प्रस्तुत करने के बजाय मैकल रिसॉर्ट की पुरानी बीमा पॉलिसी को आधार बनाकर संचालन जारी रखा। याचिकाकर्ता अखिलेश त्रिपाठी द्वारा आयोग के समक्ष प्रस्तुत हलफनामे और सरकारी दस्तावेजों के आधार पर यह दावा किया गया है कि यात्रियों को जिस सुरक्षा व्यवस्था के भरोसे क्रूज में बैठाया जा रहा था, वह कागजों पर भी मौजूद नहीं थी। यदि जांच में यह तथ्य पूरी तरह प्रमाणित होता है तो यह मामला केवल नियम उल्लंघन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के साथ गंभीर धोखाधड़ी के आरोपों को भी बल मिलेगा। पर्यटकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी…. जांच में उठे सबसे बड़े सवालों में से एक यह है कि यदि क्रूज का वैध बीमा नहीं था, तो दुर्घटना की स्थिति में पर्यटकों और उनके परिजनों को सुरक्षा तथा मुआवजा देने की व्यवस्था क्या थी। जल पर्यटन से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी व्यावसायिक जलयान के संचालन में बीमा सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच माना जाता है। आरोप है कि क्रूज के नाम पर जो बीमा दस्तावेज प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किए गए थे, वे वास्तव में मैकल रिसॉर्ट से संबंधित थे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि संबंधित विभागों ने दस्तावेजों का सत्यापन किए बिना संचालन की अनुमति कैसे दे दी और वर्षों तक यह व्यवस्था किस आधार पर चलती रही। कानूनों और सुरक्षा नियमों की अनदेखी…. मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार अंतर्देशीय पोत अधिनियम 2022 के तहत निर्धारित कई सुरक्षा प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। व्यावसायिक जल परिवहन में पंजीकरण, सुरक्षा मानकों का अनुपालन और पर्यटकों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधान अनिवार्य माने जाते हैं। याचिकाकर्ता का दावा है कि क्रूज संचालन के दौरान इन नियमों की अनदेखी की गई और पर्यटकों को पर्याप्त सुरक्षा गारंटी के बिना यात्रा कराई जाती रही। यदि जांच आयोग इन दावों को सही पाता है तो यह मामला विभागीय जवाबदेही के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई का आधार भी बन सकता है। फिटनेस व सर्वे भी नहीं…. जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। आरोप है कि मध्य प्रदेश अंतर्देशीय भाप पोत नियम 1962 के तहत आवश्यक फिटनेस सर्वे भी नहीं कराया गया था। किसी भी व्यावसायिक पोत के लिए तकनीकी निरीक्षण और फिटनेस प्रमाणन को सुरक्षा का मूल आधार माना जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बिना आवश्यक फिटनेस परीक्षण के क्रूज को गहरे जल क्षेत्र में संचालन की अनुमति किस आधार पर दी गई। जांच आयोग के समक्ष यही प्रश्न अब सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में शामिल हो गया है। मौसम विभाग की चेतावनी भी नजरअंदाज … हादसे के दिन मौसम विभाग द्वारा तेज आंधी और खराब मौसम को लेकर चेतावनी जारी किए जाने का भी दावा किया गया है। प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार संबंधित एजेंसियों को मौसम संबंधी अलर्ट पहले से उपलब्ध था, लेकिन इसके बावजूद क्रूज संचालन जारी रखा गया। यदि यह तथ्य जांच में प्रमाणित होता है तो यह मामला केवल दस्तावेजी अनियमितता का नहीं बल्कि मानव जीवन को जोखिम में डालने वाली गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का भी बन सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जल परिवहन में मौसम संबंधी चेतावनियों की अनदेखी गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकती है। आयोग के सवालों से घिरे अधिकारी और प्रबंधन … सूत्रों के अनुसार दस्तावेजों के सामने आने के बाद जांच आयोग ने संबंधित अधिकारियों और क्रूज प्रबंधन से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे हैं। विशेष रूप से बीमा, फिटनेस प्रमाणन और मौसम चेतावनी के बावजूद संचालन जारी रखने के कारणों पर जवाब मांगा गया है। बताया जा रहा है कि आयोग अब पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यदि दस्तावेजों में किए गए दावे जांच में सही साबित होते हैं तो संबंधित अधिकारियों, विभागों और संचालन से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है। सुनील साहू / शहबाज / 08 जून 2026