राष्ट्रीय
08-Jun-2026


36 लाख वर्षों का सबसे बड़ा परिवर्तन नई दिल्ली (ईएमएस)। वैश्विक जलवायु परिवर्तन का असर अब केवल मौसम और पर्यावरण तक सीमित नहीं रहा है. इसका प्रभाव पृथ्वी की गति पर भी दिखाई देने लगा है। वैज्ञानिकों के अनुसार ध्रुवीय क्षेत्रों की बर्फ तेजी से पिघलने और समुद्रों का जलस्तर बढ़ने से पृथ्वी पर द्रव्यमान भार लगातार बढ़ रहा है। इससे पृथ्वी के चक्कर लगाने की गति में सूक्ष्म महत्वपूर्ण परिवर्तन दर्ज किए गए हैं। शोधकर्ताओं का कहना है, समुद्रों में बढ़ते जल के कारण पृथ्वी की सतह पर भार लगातार बढ़ रहा है. जिससे पृथ्वी ग्रह के घूमने की रफ्तार धीमी हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यह परिवर्तन पिछले लगभग 36 लाख वर्षों में पृथ्वी की घूर्णन गति पर जलवायु से जुड़ा सबसे बड़ा प्रभाव है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है, यदि ग्लोबल वार्मिंग की वर्तमान प्रवृत्ति जारी रही, तो भविष्य में पृथ्वी के समय मापन, उपग्रह संचार, नेविगेशन प्रणालियों और खगोलीय गणनाओं पर भी इसका प्रभाव पड़ना तय है। यह अध्ययन जलवायु परिवर्तन के दूरगामी और अप्रत्याशित प्रभावों को लेकर चिंता उजागर करता है। एसजे/08/06/2026