क्षेत्रीय
08-Jun-2026
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खाने योग्य चावल प्लांट को कैसे? नियमों को ताक पर रखकर हुआ बड़ा खेल प्लांट की आड़ में चल रहा था संगठित घोटाला, मिलर्स हो रहे थे मालामाल बालाघाट (ईएमएस). सीएमआर चावल की आड़ में चल रहा बड़ा खेल अब खुलने लगा है। एथेनॉल प्लांट के नाम पर गरीबों का राइस मिलों को बेचा जा रहा था। वारासिवनी में पकड़े गए चावल के बाद अब जांच सीधे छिंदवाड़ा के प्लांट तक पहुंच गई है, जहां से इस पूरे घोटाले की जड़ें जुड़ी बताई जा रही हैं। वारासिवनी के संचेती राइस मिल में पकड़े गए चावल ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है। जिस चावल को एथेनॉल प्लांट तक पहुंचना था, वह रास्ते में ही राइस मिल में उतार दिया गया। सवाल साफ है—क्या प्लांट सिर्फ कागजों में था और असल में चावल सीधे बाजार में खपाया जा रहा था? प्लांट बना ‘कवर’, असली खेल ‘बिक्री’ का सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्ष 2025-26 का जो चावल एथेनॉल प्लांट को जारी किया गया, वह पूरी तरह खाने योग्य था। यही चावल पीडीएस और आंगनबाड़ी में जाना चाहिए था, लेकिन नियमों को दरकिनार कर इसे प्लांट के नाम पर निकाल दिया गया। यहां प्लांट के नाम पर चावल को मिलर्स को बेचने का कार्य कई दिनों से जारी है। बावजूद इसके अभी तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर ऊपर से नीचे तक सेटिंग? भोपाल से ऑपरेट हो रहा था खेल? सूत्रों की मानें तो चावल आवंटन के आदेश भोपाल स्तर से जारी हुए। यानी पूरा खेल सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर सेट किया गया था। अब जांच में यह भी देखा जा रहा है कि किन-किन अधिकारियों ने इस गड़बड़ी को नजरअंदाज किया या जानबूझकर रास्ता साफ किया। नियमानुसार प्लांट को वही चावल जारी किया जाता है, जो खाने के योग्य नहीं है। ऐसे में पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में है। राइस मिल-प्लांट गठजोड़ का खुलासा एफसीआई से निकला चावल सीधे प्लांट नहीं पहुंचता था, बल्कि राइस मिलों में उतार दिया जाता था। इसके बाद यही चावल रिसाइकिल कर कस्टम मिलिंग के तहत दोबारा शासन को सप्लाई कर दिया जाता था। यानी एक ही चावल से दोहरी कमाई की जा रही थी। पहले प्लांट के नाम पर उठाव, फिर मिलिंग कर दोबारा सप्लाई और नुकसान सिर्फ शासन और गरीबों का। 247 क्विंटल नहीं, पूरा सिस्टम सवालों में यह मामला सिर्फ 247 क्विंटल चावल का नहीं है। जांच अब उन सभी रिलीज ऑर्डर तक पहुंच चुकी है, जिनके जरिए प्लांट को चावल दिया गया। अगर पूरा रिकॉर्ड खंगाला गया, तो करोड़ों के घोटाले का खुलासा होना तय माना जा रहा है। इतना ही नहीं इसमें प्रशासनिक अधिकारियों की सांठ-गांठ भी सामने आएगी। हालांकि, जांच आगे बढ़ती है या फिर राजनीतिक दबाव के चलते फाइल ठंडे बस्ते में दबकर रह जाती है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। घोटाले का मास्टरमाइंड कौन है ? अब बड़ा सवाल यह है इस घोटाले का मास्टरमाइंड कौन है ?, किसके इशारे पर गरीबों के हक का खेल हो रहा था ? और कब तक यह ‘प्लांट का पर्दा’ चलते रहता? ट्रक ने इस साजिश को बेनकाब कर दिया। 3 जून को एफसीआई गोदाम नवेगांव से एथेनॉल प्लांट के लिए निकला चावल अपने गंतव्य तक पहुंचने के बजाय वारासिवनी की संचेती राइस मिल में पकड़ा गया। 490 बोरियों में भरा 242 क्विंटल से ज्यादा चावल जब्त होते ही पूरे नेटवर्क में हडक़ंप मच गया। भानेश साकुरे / 08 जून 2026