- पश्चिम बंगाल में फेस ऑथेंटिकेशन आधारित हाजिरी अनिवार्य - फर्जी जॉब कार्डों पर लगेगी रोक - अनियमितताओं पर सुवेंदु सरकार का बड़ा एक्शन कोलकाता (ईएमएस)। पश्चिम बंगाल में ग्रामीण रोजगार योजनाओं को पूरी तरह पारदर्शी बनाने और इनमें होने वाली किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ियों व अनियमितताओं पर सख्त रोक लगाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने अब सभी जिलों में नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस) ऐप के माध्यम से फेस ऑथेंटिकेशन (चेहरा प्रमाणीकरण) आधारित डिजिटल उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य कर दिया है। शासन द्वारा जारी निर्देशों के तहत यह नई डिजिटल हाजिरी व्यवस्था पूरे राज्य में प्रभावी रूप से लागू कर दी गई है। वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस हाई-टेक तकनीक को अपनाने का मुख्य उद्देश्य जमीन पर मौजूद फर्जी जॉब कार्डों के इस्तेमाल को पूरी तरह से समाप्त करना है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि ग्रामीण रोजगार योजनाओं के तहत मिलने वाली दैनिक मजदूरी का सीधा लाभ केवल और केवल वास्तविक और पात्र लाभार्थियों को ही मिले, न कि उनके नाम पर दलाल या बिचौलिए इसका फायदा उठाएं। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान राज्य में फर्जी जॉब कार्ड और रोजगार योजनाओं के बजट में धांधली के कई गंभीर आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी भी पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में हुई इस तरह की प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर कई मौकों पर खुलकर चिंता जाहिर कर चुके हैं, जिसके बाद इस व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए यह कड़ा कदम उठाया गया है। इस नई तकनीकी व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए कुछ कड़े नियम भी तय किए गए हैं। अब कार्यस्थलों पर उपस्थिति दर्ज करने के लिए उपयोग किए जाने वाले सभी मोबाइल फोन या अन्य डिजिटल उपकरणों का आधिकारिक सरकारी पोर्टल पर पहले से ही प्री-रजिस्ट्रेशन (पूर्व-पंजीकरण) कराना अनिवार्य होगा। कार्यस्थल पर तैनात संबंधित नोडल अधिकारी सबसे पहले एनएमएमएस ऐप में लॉगिन करके डिजिटल मस्टर रोल डाउनलोड करेंगे। इसके बाद मौके पर मौजूद सभी श्रमिकों की पहचान का उनके चेहरे (फेस ऑथेंटिकेशन) के जरिए लाइव सत्यापन किया जाएगा और उनकी दैनिक उपस्थिति का पूरा विवरण तुरंत इलेक्ट्रॉनिक रूप से मुख्य सर्वर पर अपलोड कर दिया जाएगा। अधिकारियों का दृढ़ता से मानना है कि इस फुलप्रूफ और आधुनिक प्रणाली से रोजगार योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन में जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों बढ़ेगी, फर्जी लाभार्थियों को सिस्टम से बाहर करना आसान होगा और सरकारी धन के दुरुपयोग पर पूरी तरह से प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा। रामयश/ईएमएस 10 जून 2026