व्यापार
10-Jun-2026


-रिपोर्ट में खुलासा, हर साल 230 लाख गैर-घातक चोटें और 19,000 होती हैं मौतें नई दिल्ली,(ईएमएस)। भीषण गर्मी और उमस श्रमिकों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं और प्राइमार्क, डी-मार्ट, टारगेट, मार्क्स ऐंड स्पेंसर, टेस्को, टॉमी हिलफिगर और नेक्स्ट जैसे ब्रांडों को परिधान की आपूर्ति करने वाले कपड़ा कारखानों में उत्पादकता को 10 फीसदी तक बाधित कर रही हैं। यह खुलासा न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय की रिपोर्ट से हुआ। यह रिपोर्ट तमिलनाडु, हरियाणा, ओडिशा, महाराष्ट्र और कर्नाटक में स्थित 10 कपड़ा कारखानों का दौरा करने के बाद तैयार की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक ये निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के उस वक्तव्य के बाद सामने आए हैं जिसमें कहा गया है कि वैश्विक कामकाजी आबादी का 70 फीसदी यानी 24.1 अरब कामगारों के हर साल अत्यधिक गर्मी से पीडि़त होने की आशंका है। इसके कारण हर साल 230 लाख गैर-घातक चोटें और 19,000 मौतें होती हैं। भारत विश्व का छठा सबसे बड़ा वस्त्र निर्यातक है। वह बढ़ते तापमान के आर्थिक प्रभावों को पहले ही महसूस कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक गर्मी से संबंधित खर्चों की वजह से कामगारों को प्रति माह करीब 500-1000 रुपए का नुकसान हो रहा है, जो उनकी औसत मासिक मजदूरी का एक बड़ा हिस्सा है। आपूर्तिकर्ताओं ने कहा कि यदि ब्रांड तकनीकी मदद प्रदान करें या लागत साझा करें, तो वे गर्मी से बचाव के उपायों में ज्यादा निवेश करने को तैयार हैं। सर्वेक्षण में शामिल 94.1 फीसदी परिधान और जूते के ब्रांडों ने कहा कि अत्यधिक गर्मी उत्पादन के लिए मध्यम या भारी जोखिम पैदा करती है, लेकिन केवल 35.3 फीसदी ही आपूर्तिकर्ताओं से उत्पादन क्षेत्रों के अंदर तापमान या उमस मापने की अपेक्षा करते हैं, और कोई भी ब्रांड इस तरह का डेटा लगातार एकत्र नहीं करता है। इसमें कहा गया है कि नौ कारखानों के प्रबंधकों ने बताया कि गर्मियों के चरम महीनों में उत्पादकता में करीब 3 फीसदी से 10 फीसदी की कमी और अनुपस्थिति में करीब 2 फीसदी से 5 फीसदी की वृद्धि हुई है। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि ब्रांडों को इन क्षेत्रों में ज्यादा निवेश करने पर विचार करना चाहिए। रिपोर्ट में वैश्विक परिधान ब्रांडों और खरीदारों से स्वैच्छिक दिशा-निर्देशों से आगे बढ़कर अत्यधिक गर्मी को कार्यस्थल सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक मापने योग्य जोखिम के रूप में मानने का आह्वान किया है। वैश्विक श्रम की वरिष्ठ शोध वैज्ञानिक लूसी सियर्स ने कहा कि कारखानों का उत्पादन घट रहा है, गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और डिलिवरी की समय-सीमा खतरे में है, यह भविष्य की स्थिति नहीं बल्कि अभी की स्थिति है। जो ब्रांड हीट मॉनिटरिंग को अनिवार्य बनाते हैं, खरीद प्रक्रियाओं में बदलाव करते हैं और अनुकूलन की लागत साझा करते हैं, वे ज्यादा लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण करेंगे। इसमें कहा गया है कि अप्रैल 2024 में भीषण गर्मी में फरीदाबाद की एक निटवेयर फैक्टरी में बिजली कटौती और जनरेटर के ओवरलोड होने के कारण तीन उत्पादन तलों में से एक को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा था। सिराज/ईएमएस 10जून26