क्षेत्रीय
10-Jun-2026
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- सूखी पंखुड़ियों से लेकर गुलाब जल तक बाजार की अपार संभावनाएं गुलाब उत्पादन पर 50 घंटे का विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम बनाने के कलेक्टर ने दिए निर्देश ​गुना (ईएमएस)। जिले को गुलाब उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रशासन ने ठोस पहल शुरू कर दी है। किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें परंपरागत खेती से निकालकर आधुनिक एवं लाभकारी कृषि पद्धतियों से जोड़ने के उद्देश्य से कलेक्टर श्री किशोर कुमार कन्याल की अध्यक्षता में गुलाब उत्पादन एवं विपणन विषयक कार्यशाला एवं विशेष चर्चा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विशेषज्ञों, कृषकों, निवेशकों, पॉलीहाउस निर्माण एजेंसियों, कंसल्टेंट्स तथा मार्केटिंग क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। किसानों को मिलेगा संरचित प्रशिक्षण, तैयार होगी व्यवहारिक बुकलेट बैठक में कलेक्टर श्री कन्याल ने किसानों के लिए गुलाब उत्पादन पर एक सरल एवं उपयोगी बुकलेट तैयार करने के निर्देश दिए, जिससे वे उत्पादन की पूरी प्रक्रिया को आसानी से समझ सकें। उन्होंने 15 दिवसीय अथवा लगभग 50 घंटे का संरचित प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार करने का सुझाव भी दिया, ताकि किसानों को उत्पादन, प्रबंधन, मूल्य संवर्धन और विपणन की संपूर्ण जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध हो सके। कम लागत में अधिक उत्पादन पर विशेषज्ञों का फोकस कार्यशाला में विशेषज्ञों ने गुलाब उत्पादन की आधुनिक तकनीकों पर विस्तार से जानकारी दी। पॉलीहाउस प्रबंधन, तापमान नियंत्रण, वेंटिलेशन सिस्टम, पौधों की देखभाल एवं उत्पादन चक्र जैसे विषयों पर व्यवहारिक सुझाव दिए गए। विशेषज्ञों ने बताया कि नवंबर से मई तक का समय गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए सबसे उपयुक्त होता है तथा पौधरोपण के लगभग 45 दिनों बाद फूलों का उत्पादन शुरू हो जाता है। दो डिग्री सेल्सियस तापमान पर फूलों का सुरक्षित भंडारण भी किया जा सकता है। गुलाब से जुड़े उत्पादों के लिए देश-विदेश में बड़ा बाजार इंदौर से आए पुष्प विशेषज्ञ श्री पुष्पेंद्र ने बताया कि गुलाब की सूखी पंखुड़ियों का निर्यात किया जाता है तथा गुलाब जल, इत्र और अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों की बाजार में निरंतर मांग बनी रहती है। उन्होंने कहा कि गुलाब आधारित उद्योग किसानों के लिए अतिरिक्त आय के नए अवसर प्रदान कर सकते हैं। प्राकृतिक खेती और गौशालाओं के समन्वय पर भी चर्चा बैठक में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए गौशालाओं और किसानों के बीच समन्वय विकसित करने के मॉडल पर भी विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि गोबर आधारित जैविक संसाधनों के उपयोग से उत्पादन लागत कम होने के साथ गुणवत्ता में भी सुधार संभव है। किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान, तकनीकी मार्गदर्शन मिला कार्यशाला के दौरान किसानों ने पौध चयन, सिंचाई प्रबंधन, रोग नियंत्रण, विपणन और निवेश संबंधी प्रश्न पूछे। विशेषज्ञों ने सभी विषयों पर विस्तृत जानकारी देते हुए उत्पादन से बाजार तक की पूरी प्रक्रिया समझाई। अलग-अलग व्हाट्सएप समूहों से होगा निरंतर संवाद कलेक्टर श्री कन्याल ने निवेशकों, पॉलीहाउस कंसल्टेंट्स, कृषकों और मार्केटिंग क्षेत्र से जुड़े हितधारकों के अलग-अलग व्हाट्सएप समूह बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की समस्याओं और तकनीकी जिज्ञासाओं का त्वरित समाधान हो सकेगा तथा सभी पक्षों के बीच सतत संवाद बना रहेगा। पुणे और बेंगलुरु जैसे केंद्रों का कराया जाएगा भ्रमण कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि किसानों को आधुनिक पुष्प उत्पादन तकनीकों से परिचित कराने के लिए उन्हें पुणे और बेंगलुरु जैसे प्रमुख फ्लोरीकल्चर केंद्रों का भ्रमण कराया जाएगा। साथ ही विशेष कार्यशालाओं का आयोजन भी किया जाएगा, ताकि वे उन्नत तकनीकों को सीखकर जिले में अपनाने के लिए प्रेरित हो सकें। बैठक के अंत में जिले को गुलाब उत्पादन के एक सशक्त केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए सामूहिक प्रयासों एवं समन्वित कार्ययोजना पर सहमति व्यक्त की गई। - सीताराम नाटानी