राज्य
10-Jun-2026


लखनऊ (ईएमएस)। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (उप्र रेरा) ने बुधवार को घर खरीदारों को फ्लैट खरीदते समय कार्पेट क्षेत्र को प्राथमिकता देने की सलाह दी। उसने कहा कि यह आवासीय इकाई के अंदर उपलब्ध वास्तविक उपयोग योग्य रहने की जगह का प्रतिनिधित्व करता है। उप्र रेरा ने कहा कि रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 और संबंधित नियमों ने अपार्टमेंट के बारे में जानकारी और बिक्री के लिए कार्पेट क्षेत्र को श्मानक आधारश् के रूप में निर्धारित किया है। डेवलपर को यूपी रेरा पोर्टल पर फ्लैट की संख्या, प्रकार और कार्पेट एरिया के बारे में विवरण प्रदान करना आवश्यक है। प्राधिकरण ने एक बयान में कहा कि कार्पेट क्षेत्र घर खरीदार द्वारा उपयोग के लिए उपलब्ध वास्तविक क्षेत्र को दर्शाता है। खरीदारों को सोच-विचार कर निर्णय लेने के लिए इस आधार पर आवासीय इकाइयों का मूल्यांकन करना चाहिए। उप्र रेरा ने कहा कि अपार्टमेंट से जुड़ी विशेष बालकनी, बरामदों और खुली छतों के बारे में भी जानकारी का खुलासा करना आवश्यक है, जबकि सुपर निर्मित क्षेत्र का विवरण कानून के तहत अनिवार्य नहीं है। प्राधिकरण ने कहा, फ्लैट को अक्सर सुपर बिल्ट-अप क्षेत्र के आधार पर बढ़ावा दिया जाता है। इसमें गलियारे, सीढ़ियां, लिफ्ट, लॉबी और क्लब हाउस जैसी सामान्य सुविधाओं का आनुपातिक हिस्सा शामिल होता है। उप्र रेरा ने कहा कि सुपर बिल्ट-अप एरिया कभी-कभी विज्ञापित आकार और फ्लैट के अंदर उपलब्ध वास्तविक उपयोग योग्य स्थान के बीच अंतर को छिपा सकता है। प्राधिकरण ने खरीदारों से किसी भी संपत्ति सौदे को अंतिम रूप देने से पहले यूपी रेरा पोर्टल पर कार्पेट क्षेत्र सहित परियोजना विवरण की जांच करने का आग्रह किया। उप्र रेरा ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य रियल एस्टेट क्षेत्र में अधिक पारदर्शिता लाना और घर खरीदारों को भ्रामक जानकारी से बचाना है। जितेन्द्र 10 जून 2026