खरगोन (ईएमएस)। भगवद्गीता और ब्रह्मसंहिता जैसे शास्त्रों में वर्णित है कि जल कृष्ण की ऊर्जा के विभिन्न रूपों में से एक है । कृष्ण अपनी ऊर्जा से अलग होकर भी एक दिव्य स्वरूप में विद्यमान रहते हैं, और साथ ही साथ वे उस ऊर्जा में भी विद्यमान होते हैं। इसलिए, यद्यपि जल कृष्ण नहीं है, लेकिन कृष्ण ही जल हैं। हम जल में कृष्ण को किन तरीकों से देख सकते हैं? वे जल का स्वाद या सार हैं, वह गुण जो हमारी प्यास बुझाता है और तृप्ति प्रदान करता है।उक्त उदगार पंडित बृजेश गुरु ने श्री पुरुषोत्तम मास में श्री महामृत्युंजय धाम गांधी नगर में मातृशक्ति संगठन द्वारा पानी बचाओ अभियान की जनजागृति हेतु श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस परम पूज्य व्यास गादी से व्यक्त किए।आप श्री ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव वृतान्त सुनाते हुए कहा कि द्वापर युग में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और मध्य रात्रि 12 बजे के समय मथुरा के कारागार में कंस के अत्याचारों के बीच भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया इस रात्रि की दिव्यता और पौराणिक महत्व से जुड़े कुछ प्रमुख तथ्य इस प्रकार हैं:मध्य रात्रि 12 बजे का रहस्य: चूंकि भगवान कृष्ण चंद्रवंशी थे उनके पूर्वज चंद्रमा थे उन्होंने चंद्रमा के उदय होने के समय आधी रात को जन्म लिया था। इसके पीछे प्रतीकात्मक संदेश यह है कि भगवान पूर्ण अंधकार कंस के अत्याचारों और अज्ञानता को दूर करने के लिए प्रकाश के रूप में अवतरित होते हैं।चमत्कारिक घटनाएं: पौराणिक कथाओं के अनुसार, जैसे ही भगवान ने जन्म लिया, कारागार के सभी पहरेदार सो गए, जंजीरें अपने आप खुल गईं और जेल के भारी ताले टूट गए।यमुना पार करना: वासुदेव जी ने नवजात शिशु कृष्ण को अपनी टोकरी में रखा और उफनती यमुना नदी को पार करके उन्हें गोकुल में नंद बाबा और यशोदा के घर सुरक्षित पहुंचाया। मार्ग में शेषनाग ने अपने फन से बारिश से उनकी रक्षा की थी।कथा के चतुर्थ दिवस क्षेत्रीय पार्षद भागीरथ बडोले ने कथा श्रवण की आपश्री द्वारा पार्षद का भगवा उपरने से स्वागत किया चतुर्थ दिवस की कथा विराम पर आरती मुख्य मनोरथी सुधा देवी सोलंकी और सह मनोरथी श्रीमती विमला सीताराम भडोले एवं ग. भा. सदावृत देवी परसाई द्वारा की गई। तत्पश्चात माखन मिश्री के महाभोग की महाप्रसादि वितरित की गई। ईएमएस/नाजिम शेख/ 10 जून 2026