-उद्बोधन देते हुए ज्योतिष पीठाधीश्वर, द्वारका-शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज हाथरस (ईएमएस)। श्री राधा कृष्ण कृपा भवन, आगरा रोड, हाथरस में आज उस समय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब ज्योतिषपीठाधीश्वर, द्वारका-शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज का भव्य आगमन हुआ। उनके आगमन पर श्रद्धालुओं, गौभक्तों, साहित्यकारों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान जगद्गुरु शंकराचार्य ने उपस्थित सैकड़ों लोगों को गौरक्षा एवं गौसंवर्धन की शपथ दिलाते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गौमाता केवल एक पशु नहीं, बल्कि सनातन जीवन मूल्यों, कृषि व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिक चेतना की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि गौमाता को राष्ट्रमाता का सम्मान दिलाने और गौवंश की रक्षा के लिए जनजागरण की आवश्यकता है तथा समाज के प्रत्येक वर्ग को इस अभियान से जुड़ना चाहिए। अपने प्रेरक उद्बोधन में शंकराचार्य जी ने वर्तमान में चल रही अपनी राष्ट्रव्यापी गौरक्षा मुहिम का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रदेश की 403 विधानसभाओं में जनजागरण यात्रा के माध्यम से लोगों को जागृत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस अभियान का भव्य समापन 24 जुलाई को लखनऊ में होगा, जहां प्रदेशभर से गौभक्त एवं सनातन धर्मावलंबी बड़ी संख्या में पहुंचकर गौमाता के सम्मान और संरक्षण का संकल्प दोहराएंगे। उन्होंने अपने संबोधन में हाथरस की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक पहचान का भी विशेष उल्लेख किया। हाथरस की समृद्ध लोकसंस्कृति, ब्रज परंपरा, व्यापारिक प्रतिष्ठा तथा साहित्य और कला के क्षेत्र में उसके योगदान को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यह भूमि सदैव धर्म, संस्कृति और सामाजिक चेतना की वाहक रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक नगरों से ही राष्ट्र की आत्मा सशक्त होती है। श्री राधा कृष्ण कृपा भवन पहुंचने पर कार्यक्रम संयोजक शरद उपाध्याय नंदा एवं साहित्यकार चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने माल्यार्पण कर जगद्गुरु शंकराचार्य का स्वागत एवं अभिनंदन किया। इस अवसर पर ब्रज कला केंद्र की उपाध्यक्ष इंदिरा जायसवाल एवं लक्ष्य वार्ष्णेय ने अपने साहित्यकार साथियों की ओर से ब्रज कला केंद्र, हाथरस का पीतवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर उनका सम्मान किया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ साहित्यकार देवेंद्र पांडेय ने प्रभावशाली ढंग से किया, जबकि संपूर्ण आयोजन का निर्देशन अखिलेश ब्रह्मचारी द्वारा किया गया। कार्यक्रम संयोजक शरद उपाध्याय नंदा एवं चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि जगद्गुरु शंकराचार्य का हाथरस आगमन नगर के लिए गौरव का विषय है तथा उनके विचार समाज को नई दिशा प्रदान करेंगे। गौरक्षा विषयक काव्य गोष्ठी भी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रही। प्रसिद्ध आशुकवि अनिल बोहरे, कवयित्री मीरा दीक्षित एवं मनु दीक्षित ने गौमाता के महत्व, भारतीय संस्कृति में उनके स्थान तथा संरक्षण की आवश्यकता पर ओजपूर्ण काव्यपाठ कर उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। वहीं शंकराचार्य जी के साथ पधारीं बहन जगदंबा जी ने भी अपने प्रेरक उद्बोधन में गौरक्षा को राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा से जोड़ते हुए सभी से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं एवं गौभक्तों ने गौसंवर्धन और गौरक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन में आध्यात्मिक ऊर्जा, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक दायित्व का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। बड़ी संख्या में नगर के गणमान्य नागरिक, साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं धर्मप्रेमी उपस्थित रहे। जगद्गुरु शंकराचार्य के आशीर्वचनों से उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालु लाभान्वित हुए तथा गौरक्षा के प्रति जागरूक होकर लौटे। ईएमएस/ नीरज चक्रपाणी/ 11 जून 2026