नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में सम्पन्न नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं थी,बल्कि भारत के भविष्य की विकास दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विमर्श था। विकसित राज्य से विकसित भारत की थीम पर आयोजित इस बैठक में विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपने- अपने प्रदेशों की आवश्यकताओं, चुनौतियों और विकास संबंधी सुझावों को केंद्र सरकार के समक्ष रखा।सर्वविदित रहे यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में देश की अर्थव्यवस्था लगभग 4.3 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच चुकी है और अगले दशक में इसे 10 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।ऐसे में राज्यों की भागीदारी और उनकी विकास क्षमता निर्णायक महत्व रखती है।बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कहा कि विकसित भारत का सपना दिल्ली में बैठकर पूरा नहीं किया जा सकता।इसके लिए राज्यों को विकास का इंजन बनना होगा। उन्होंने राज्यों से निवेश आकर्षित करने, रोजगार सृजन,कृषि आधुनिकीकरण,कौशल विकास और डिजिटल प्रशासन को बढ़ावा देने का आह्वान किया।इस बैठक का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा रखे गए सुझाव और मांगें रहीं।इन सुझावों ने यह स्पष्ट कर दिया कि राज्यों की प्राथमिकताएं अलग-अलग हो सकती हैं,लेकिन लक्ष्य एक ही है—तेज,समावेशी और सतत विकास। मोहन यादव ने मध्य प्रदेश को कृषि एवं औद्योगिक हब बनाने के लिए सिंचाई परियोजनाओं, लॉजिस्टिक कॉरिडोर और कृषि प्रसंस्करण उद्योगों के विस्तार पर बल दिया। उन्होंने केंद्र से अधोसंरचना परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त सहयोग की माँग की।नबाब सिंह सैनी ने हरियाणा को विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए औद्योगिक गलियारों, कौशल विकास और एमएसएमई क्षेत्र को और मजबूत बनाने की आवश्यकता बताई।उन्होंने कृषि में ड्रोन तकनीक तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को बढ़ावा देने का सुझाव भी दिया।भजन लाल शर्मा ने जल संकट को राजस्थान की सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए नदी जोड़ो परियोजनाओं और जल संरक्षण कार्यक्रमों में केंद्र के सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।साथ ही उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में राजस्थान की भूमिका को और मजबूत करने की बात कही।योगी आदिनाथ ने उत्तर प्रदेश के तेजी से बढ़ते औद्योगिक निवेश,एक्सप्रेसवे नेटवर्क और डिफेंस कॉरिडोर का उल्लेख करते हुए राज्यों को अधिक वित्तीय लचीलापन देने की मांग रखी ताकि विकास परियोजनाओं को गति मिल सके।देवन्द्र फ्रडनवीस ने मुंबई महानगर क्षेत्र, सेमीकंडक्टर उद्योग और हरित ऊर्जा निवेश को राष्ट्रीय विकास का प्रमुख आधार बताते हुए वैश्विक निवेश आकर्षित करने के लिए राज्यों को अधिक नीति समर्थन देने की बात कही।पूर्वोत्तर राज्यों के प्रतिनिधियों ने सड़क,रेल और डिजिटल कनेक्टिविटी को अपनी प्रमुख प्राथमिकता बताया।उनका मत था कि बेहतर संपर्क व्यवस्था ही क्षेत्रीय विकास और राष्ट्रीय एकीकरण का आधार बनेगी।इस बैठक में कृषि क्षेत्र पर विशेष चर्चा हुई।आज भी लगभग 45 प्रतिशत भारतीय आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। राज्यों ने प्राकृतिक खेती,सूक्ष्म सिंचाई,कृषि निर्यात और भंडारण सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया। कई मुख्यमंत्रियों ने कृषि मूल्य श्रृंखला को मजबूत बनाने के लिए केंद्र और राज्यों के संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता बताई।स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र भी चर्चा के केंद्र में रहे। राज्यों ने चिकित्सा शिक्षा संस्थानों की संख्या बढ़ाने, जिला अस्पतालों को सुदृढ़ बनाने तथा नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता पर बल दिया।भारत की 65 प्रतिशत से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। इसलिए कौशल विकास और रोजगार सृजन को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने पर व्यापक सहमति दिखाई दी। हरित ऊर्जा को लेकर भी महत्वपूर्ण विचार सामने आए। भारत ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर- जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा है।राजस्थान,गुजरात,तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने सौर एवं पवन ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश बढ़ाने के लिए केंद्र के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। डिजिटल इंडिया की उपलब्धियों का भी उल्लेख हुआ।आज भारत में 150 करोड़ से अधिक आधार प्रमाणीकरण प्रतिमाह हो रहे हैं और यूपीआई लेन-देन विश्व का सबसे बड़ा डिजिटल भुगतान नेटवर्क बन चुका है।राज्यों ने डिजिटल प्रशासन और सेवा वितरण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियों को अपनाने का सुझाव दिया।इस बैठक का सबसे महत्वपूर्ण संदेश सहकारी संघवाद की भावना का और अधिक मजबूत होना रहा।केंद्र और राज्यों के बीच संवाद,सहयोग और साझेदारी के माध्यम से विकास के नए मॉडल विकसित करने पर सहमति बनी। यह स्पष्ट हुआ कि विकसित भारत का मार्ग राज्यों से होकर ही गुजरता है। निष्कर्षतः नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक ने केवल नीतिगत चर्चा नहीं की,बल्कि भारत के अगले दो दशकों के विकास का व्यापक खाका प्रस्तुत किया।मुख्य मंत्रियों के सुझावों और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की विकास दृष्टि ने यह संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में भारत का विकास मॉडल अधिक विकेंद्रीकृत,सहभागी और परिणामोन्मुख होगा।यदि इस बैठक में सामने आए सुझावों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य केवल एक सरकारी संकल्प नहीं,बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक उपलब्धि बन सकता है।यही इस बैठक का सबसे बड़ा संदेश और सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष है। (लेखक स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तम्भकार हैं) ईएमएस/12/06/2026