हिमाचल के जिला धर्मशाला उपभोक्ता आयोग ने उड़ान में बच्चों को पानी न देने के लिए थाई लायन एयर पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह परिवाद तरुण कुमार चौरसिया ने उपभोक्ता आयोग के समक्ष दायर किया था, जिन्होंने बैंकॉक की यात्रा के लिए अपने और अपने परिवार के लिए हवाई टिकट बुक किए थे।हेमांशु मिश्रा और आरती सूद की अध्यक्षता वाले जिला उपभोक्ता आयोग ने यह भी माना कि एयरलाइन का यह आचरण बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन और सेवा में कमी का मामला है। तरुण कुमार चौरसिया ने फ्लाइट नंबर एसएल0214 के तहत अपने और अपने परिवार के लिए बैंकॉक की यात्रा के लिए टिकट बुक किए थे, जो मूल रूप से 13 से 20 जनवरी, 2025 तक निर्धारित थे। थाई लायन एयर ने उपभोक्ता की सहमति के बिना उड़ान को 14 से 21 जनवरी तक पुनर्निर्धारित कर दिया, जिससे परिवार की यात्रा योजना बाधित हुई और उन्हें वित्तीय नुकसान हुआ, जिसमें 2,527 रुपये की गैर-वापसी योग्य होटल बुकिंग भी शामिल है। अमृतसर से बैंकॉक की उड़ान के दौरान, एयरलाइन के कर्मचारियों ने उनके 10 और 15 वर्ष के बच्चों को पीने का पानी देने से यह कहकर इनकार कर दिया कि पानी मुफ्त नहीं है और केवल थाई करेंसी में ही खरीदा जा सकता है। एयरलाइन द्वारा भारतीय मुद्रा स्वीकार न किए जाने के कारण बच्चे छह घंटे की पूरी यात्रा के दौरान प्यासे रहे। जिसपर थाई लायन एयर और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय दोनों को नोटिस भेजे जाने के बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने इस मामले पर सुनवाई की। वैध नोटिस मिलने के बावजूद, कोई भी विपक्षी पक्ष आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ। परिणामस्वरूप, उपभोक्ता के हलफनामे और सहायक दस्तावेजों के आधार पर मामले की कार्यवाही एकतरफा सुनवाई के लिए निर्धारित की गई। आयोग ने हस्ताक्षरित यात्री टिप्पणी प्रपत्र (अनुलग्नक सी-4) को मुख्य साक्ष्य के रूप में संदर्भित किया और पाया कि सुनीसा नामक एक चालक दल सदस्य ने एक बयान पर हस्ताक्षर करके पुष्टि की थी कि उड़ान में नियमित पानी की कोई मुफ्त व्यवस्था नहीं थी और खरीद के लिए केवल थाई करेंसी ही स्वीकार किए जाते थे। अपने फैसले में उपभोक्ता आयोग ने कहा, “हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि विपक्षी पार्टी नंबर 1 थाई लायन एयर ने उपभोक्ता के नाबालिग बच्चों को छह घंटे की लंबी यात्रा के दौरान प्यासा रखकर सेवा में लापरवाही बरती है। विपक्षी पार्टी नंबर एक के चालक दल ने न केवल सेवा में लापरवाही बरती है, बल्कि इस मामले में बुनियादी मानवाधिकारों का भी उल्लंघन हुआ है।उपभोक्ता की पूर्व सहमति के बिना उड़ान का समय बदलना भी सेवा में लापरवाही है। इसलिए, शिकायत स्वीकार की गई।उपभोक्ता आयोग ने थाई लायन एयर को मानसिक पीड़ा के मुआवजे के रूप में एक लाख रुपये, होटल के नुकसान के लिए 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित 2,527 रुपये और मुकदमे खर्च के रूप में 10,000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया। फ्लाइट में पानी न मिलना यात्रियों के अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। सभी एयरलाइनों के लिए उड़ान के दौरान पीने का पानी मुफ्त उपलब्ध कराना अनिवार्य है।इसी प्रकार 31 जनवरी की सुबह लैक्स से की फ्लाइट लेट हो गई।साथ ही प्लेन बहुत गर्म और उमस भरा हो गया था।एक यात्री ने पानी मांगा तो एयर होस्टेस ने इसे नियमों के खिलाफ बताया व कहा कि वे पानी बेच भी नहीं सकते। उन्होंने यात्री को पानी पीने के लिए प्लेन से उतार दिया , लेकिन वापस प्लेन में चढ़ाने के लिए 10 मिनट तक दरवाजा खोलने के लिए कोई स्टाफ मौजूद नहीं था। जब यात्री ने यह बात फ्लाइट अटेंडेंट को बताई तो उसने बचाव करते हुए कहा, यह हमारी गलती नहीं है और मुंह फेर लिया। फ्लाइट स्टाफ का यह आचरण भी उपभोक्ता सेवा में कमी की परिधि में आता है।जिसके लिए अनुतोष प्राप्त किया जा सकता है। (लेखक उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता आयोग के वरिष्ठ अधिवक्ता है) (यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है) ईएमएस / 12 जून 26