12-Jun-2026
...


- बंगाल सरकार का बड़ा फैसला - जिला अस्पतालों में भी खुलेंगे मेडिकल कॉलेज कोलकाता (ईएमएस)। पश्चिम बंगाल सरकार ने आम जनता को बेहतर और समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री शरद्वत मुखर्जी ने आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि अब राज्य के निजी (प्राइवेट) अस्पतालों को अपने कुल बेड का 10 प्रतिशत हिस्सा सरकारी अस्पतालों से रेफर होकर आने वाले मरीजों के लिए अनिवार्य रूप से आरक्षित रखना होगा। इस व्यवस्था के तहत आने वाले मरीजों को निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज, गंभीर जांचें, दवाएं और अन्य सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं पूरी तरह निशुल्क प्रदान की जाएंगी। यह महत्वपूर्ण निर्णय स्वास्थ्य भवन में निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों के साथ हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया गया। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि यदि किसी सरकारी अस्पताल में बेड खाली होंगे, तो मरीज का इलाज वहीं किया जाएगा। लेकिन बेड उपलब्ध न होने की स्थिति में मरीज को तुरंत नजदीकी निजी अस्पताल में रेफर कर दिया जाएगा, ताकि इलाज में देरी न हो। इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए राज्य स्वास्थ्य विभाग अगले कुछ दिनों में एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर भी जारी करने जा रहा है, जिससे नागरिक उपलब्ध सेवाओं की जानकारी ले सकेंगे। सरकार ने यह भी साफ किया है कि आयुष्मान भारत योजना में पंजीकृत मरीजों को इस मुफ्त इलाज का लाभ उठाने के लिए केवल अपना आधार कार्ड दिखाना होगा, और पहचान के सत्यापन के लिए किसी अन्य कागजात की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य के चिकित्सा ढांचे को मजबूत करने के लिए एक और बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के प्रत्येक जिले में कम से कम एक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल जरूर स्थापित किया जाएगा। वर्तमान में जिन चार जिलों में मेडिकल कॉलेज नहीं हैं, वहां जल्द ही नए मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे। सरकार का मानना है कि इस दोहरे कदम से जहां एक तरफ सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का अत्यधिक दबाव कम होगा, वहीं दूसरी तरफ हर जरूरतमंद मरीज को समय पर आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी। हालांकि, सरकार के इस फैसले पर कुछ निजी अस्पतालों ने अतिरिक्त 10 प्रतिशत बेड आरक्षित रखने को लेकर आपत्ति भी दर्ज कराई है। अस्पताल प्रबंधनों का तर्क है कि वे पहले से ही विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत मुफ्त इलाज की सेवाएं दे रहे हैं, ऐसे में अतिरिक्त वित्तीय भार से अस्पतालों के दैनिक संचालन पर बुरा असर पड़ सकता है। निजी अस्पतालों ने इस नई योजना के नियमों और सरकार की तरफ से दी जाने वाली वित्तीय प्रतिपूर्ति (फंडिंग) को लेकर स्थिति और स्पष्ट करने की मांग की है। इससे पहले भी राज्य सरकार उन निजी अस्पतालों को, जिन्हें अपनी स्थापना के लिए सरकार से मुफ्त जमीन मिली थी, 15 प्रतिशत बेड गरीब मरीजों के लिए आरक्षित रखने का कड़ा निर्देश दे चुकी है। रामयश/ईएमएस 12 जून 2026