राष्ट्रीय
12-Jun-2026


-सरकारी अस्पताल निजी अस्पतालों की तुलना में कम क्लेम कर रहे दर्ज नई दिल्ली,(ईएमएस)। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पात्र मरीजों को कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने के बावजूद देश के कई सरकारी अस्पताल क्लेम प्रक्रिया में पिछड़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बजट आवंटन में देरी, प्रशासनिक जटिलताएं, स्टाफ की कमी और बिलिंग संबंधी समस्याओं के कारण सरकारी अस्पताल निजी अस्पतालों की तुलना में कम क्लेम दर्ज कर रहे हैं, जिससे योजना के लाभ पर असर हो रहा है। जानकारों के मुताबिक आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों के इलाज के बाद अस्पतालों को राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के जरिए क्लेम प्रस्तुत करना होता है। हालांकि सरकारी अस्पतालों में फंड प्रबंधन और प्रतिपूर्ति की जटिल प्रक्रिया के कारण क्लेम समय पर दाखिल नहीं हो पाते। कई मामलों में अस्पताल प्रबंधन इलाज तो उपलब्ध करा देता है, लेकिन क्लेम संबंधी औपचारिकताओं को समय पर पूरा नहीं कर पाता। एक अन्य बड़ी समस्या प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी है। आयुष्मान योजना के अंतर्गत ऑनलाइन एंट्री, दस्तावेज सत्यापन, टीपीए अनुमोदन और क्लेम अपलोड जैसे कार्यों के लिए समर्पित कर्मियों की जरुरत होती है। कई सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में ‘आयुष्मान मित्र’ या डेटा एंट्री ऑपरेटर नहीं हैं, जिससे क्लेम प्रक्रिया धीमी होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों का प्राथमिक उद्देश्य मरीजों को उपचार उपलब्ध कराना होता है। ऐसे में बिलिंग, दस्तावेजीकरण और क्लेम प्रबंधन जैसे प्रशासनिक कार्य अक्सर प्राथमिकता सूची में पीछे होते हैं। परिणामस्वरूप कई क्लेम लंबित रह जाते हैं और अस्पतालों को मिलने वाली राशि समय पर प्राप्त नहीं हो पाती। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी अस्पतालों में क्लेम प्रक्रिया को डिजिटल रूप से अधिक सक्षम बनाने, अतिरिक्त तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति करने और भुगतान प्रणाली को सरल बनाने से आयुष्मान भारत योजना का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से मरीजों तक पहुंचाया जा सकता है। इससे अस्पतालों की वित्तीय स्थिति भी मजबूत होगी और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा। सिराज/ईएमएस 12जून26