-सीएम हेमंत के सामने राज्यसभा चुनाव से ज्यादा बड़ा संकट ईडी और सीबीआई रांची,(ईएमएस)। सीएम हेमंत सोरेन के दिल्ली प्रवास को लेकर झारखंड की राजनीति अभी उफान पर है, लेकिन इस यात्रा ने कांग्रेस की बेचैनी बढ़ा दी है। खास कर राज्यसभा चुनाव को लेकर हेमंत सोरेन का दिल्ली जाना कांग्रेस के रणनीतिकारों को बर्दाश्त नहीं हो रहा है। तात्कालिक वजह भी साफ है कि राज्यसभा के चुनाव में बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के चुनावी जंग में उतरने से दलों के विधायकों के टूटने का खतरा दिख रहा है। राजनीतिक सूत्रों की माने तो धन बल के इस्तेमाल की भूमि झारखंड बनते दिख रही है लेकिन क्या हेमंत सोरेन सच में राज्यसभा चुनाव को इग्नोर कर रहे हैं या कि कुछ निजी परेशानियां भी हावी हो गई हैं? राज्यसभा चुनाव से ज्यादा परेशानी हेमंत सोरेन के सामने केंद्रीय एजेंसियां खड़ी कर रही है। व्यक्तिगत आरोपों से घिरे हेमंत सोरेन के सामने राज्यसभा चुनाव से ज्यादा बड़ा संकट ईडी और सीबीआई बन चुकी है। राजनीतिक गलियारों की माने तो परिमल नाथवानी की ओर से गृह मंत्री अमित शाह और हेमंत सोरेन की मुलाकात के चर्चे भी हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सीएम हेमंत सोरेन की परेशानी ईडी ने बढ़ा दी है। रांची के बड़गई सर्कल के शांति नगर में 8.86 एकड़ जमीन के अधिग्रहण और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में कोर्ट ने सोरेन की दलील को खारिज कर दिया वाक्य यह था कि झारखंड के सीएम ने जमीन खरीद के मामले में दोषमुक्त करने का आग्रह किया था। उनका कहना था कि उन्हें फंसाया गया है, लेकिन ईडी ने उनके अपील के विरुद्ध कहा कि उनके पास प्रयाप्त साक्ष्य हैं। इसलिए यह मामला खारिज नहीं हो सकता। कांग्रेस सूत्रों की माने तो इनके रणनीतिकारों की परेशानी यह है कि चुनाव के मौके पर हेमंत सोरेन के दिल्ली जाकर बैठ जाने से झामुमो या फिर राजद के विधायकों के टूटने का खतरा ज्यादा है। ऐसा कुछ होता है तो सीधे नुकसान कांग्रेस को होगा। वैसे भी बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को तीन मत ही जुगाड़ करने हैं। नाथवानी तोड़ जोड़ के मास्टर खिलाड़ी हैं। 2008 और 2014 का चुनाव भी ये जीते हुए हैं। कांग्रेस के रणनीतिकारों को पता है कि झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन के नहीं रहने पर महागठबंधन के विधायक के बिखरने के खतरा ज्यादा हैं। सिराज/ईएमएस 12जून26