-कुछ साल में एक हजार से ज्यादा नक्सलियों ने किया है सरेंडर रायपुर,(ईएमएस)। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से करीब 400 किलोमीटर दूर दंतेवाड़ा का जबेली गांव। यहां कभी नक्सली रहे प्रदीप कुंजम का घर है। उन्होंने मुस्कुराते हुए दरवाजा खोला। गोद में 8 महीने की बेटी करिश्मा थी। प्रदीप 2008 में नक्सली बन गए थे। संगठन का नियम था, शादी करनी है तो नसबंदी करानी होगी। 2016 में प्रदीप ने शादी से पहले नसबंदी करा ली। 2022 में उन्होंने सरेंडर कर दिया। 2023 में नसबंदी खुलवाने के लिए सर्जरी कराई और अब एक बेटी के पिता हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक प्रदीप अकेले नहीं है। बीते 10 साल में 56 नक्सली ऐसी सर्जरी करा चुके हैं। 26 लोग पिता भी बन गए। बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी के मुताबिक 120 पूर्व नक्सलियों की सर्जरी अभी होनी है। ये सरेंडर पॉलिसी का हिस्सा है और फ्री में की जाती है। पूर्व नक्सली सर्जरी के लिए जगदलपुर के अस्पताल पहुंच रहे हैं। अस्पताल के मुख्य अधीक्षक बताते हैं, ‘कई पूर्व नक्सलियों की नसबंदी प्रशिक्षित डॉक्टरों ने नहीं की थी। कुछ मामलों में ऑपरेशन के दौरान ऐसी नसें भी कट गईं, जिन्हें दोबारा जोड़ना मुमकिन नहीं है। बस्तर डिवीजन के आईजी कहते हैं, ‘हाल के कुछ साल में एक हजार से ज्यादा नक्सलियों ने सरेंडर किया है। उसमें से ज्यादातर ने यही कहा कि संगठन में उनकी नसबंदी हो गई है, लेकिन वे परिवार बढ़ाना चाहते हैं। हमने फैसला लिया कि सभी का टेस्ट कर नसबंदी खुलवाई जाएगी। सिराज/ईएमएस 12जून26