नई दिल्ली (ईएमएस)। देश की राजनीति में इन दिनों एक नया नाम तेजी से चर्चा में है— कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी)। सोशल मीडिया पर शुरू हुआ यह व्यंग्यात्मक अभियान देखते ही देखते करोड़ों युवाओं की आवाज़ बन गया है। महज कुछ दिनों में सीजेपी ने इंस्टाग्राम पर 2 करोड़ (20 मिलियन) से अधिक फॉलोअर्स जुटा लिए, जिससे इसने कई स्थापित राजनीतिक दलों की डिजिटल मौजूदगी को पीछे छोड़ दिया। सीजेपी की शुरुआत राजनीतिक संचार विशेषज्ञ अभिजीत दिपके ने की थी। यह मंच खुद को आलसी और बेरोजगार युवाओं की आवाज़ बताता है। आंदोलन की शुरुआत उस विवादित टिप्पणी के बाद हुई, जिसमें बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से किए जाने पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। इसके बाद युवाओं ने इसी शब्द को विरोध और व्यंग्य के प्रतीक के रूप में अपना लिया। सीजेपी का मुख्य फोकस बेरोजगारी, महंगाई, परीक्षा पत्र लीक, अवसरों की कमी और शासन व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर है। इसकी लोकप्रियता खासकर जेन-ज़ी (18 से 25 वर्ष आयु वर्ग) के बीच तेजी से बढ़ी है। रिपोर्टों के अनुसार, इसके लाखों समर्थकों ने ऑनलाइन पंजीकरण भी कराया है। हालांकि सीजेपी खुद को पारंपरिक राजनीतिक दल नहीं बल्कि एक जन आंदोलन और डिजिटल अभियान बताता है। इसके समर्थकों का कहना है कि यह केवल सत्ता पक्ष ही नहीं, बल्कि पूरे राजनीतिक तंत्र से सवाल पूछने का मंच है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीजेपी का उभार इस बात का संकेत है कि देश का युवा वर्ग अब रोजगार, शिक्षा और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर अधिक मुखर हो रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सोशल मीडिया की यह लहर आगे चलकर वास्तविक राजनीतिक प्रभाव में बदलती है या केवल डिजिटल आंदोलन बनकर रह जाती है। सुबोध/१२-०६-२०२६