राष्ट्रीय
12-Jun-2026
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:: आदिवासी नृत्य की थाप पर थिरके विदेशी मेहमान, जहाज महल में जाना 500 साल पुराना जल प्रबंधन :: इंदौर/धार (ईएमएस)। इंदौर में आयोजित ब्रिक्स देशों के कृषि सम्मेलन में हिस्सा लेने आए अंतर्राष्ट्रीय मेहमानों ने शुक्रवार को धार जिले की ऐतिहासिक नगरी मांडू का भ्रमण किया। पूर्व का शिराज कहे जाने वाले मांडू की 15वीं शताब्दी की स्थापत्य कला, उन्नत जल-संरक्षण तकनीक और सांस्कृतिक धरोहर को देखकर विभिन्न देशों के कृषि मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मंत्रमुग्ध हो गए। मांडू पहुंचने पर मालवी परंपरा के अनुसार पुष्पवर्षा कर विदेशी प्रतिनिधियों का आत्मीय स्वागत किया गया। इस दौरान वहां मौजूद पारंपरिक आदिवासी नृत्य दलों ने ढोल और थाली की थाप पर जब प्रस्तुति शुरू की, तो विदेशी मेहमान खुद को रोक नहीं पाए और वे भी कलाकारों के साथ कदम से कदम मिलाकर थिरकने लगे। भ्रमण की शुरुआत में डेलीगेट्स ने दो विशाल तालाबों, मूंज और कपूर तालाब के बीच स्थित ऐतिहासिक जहाज महल का अवलोकन किया। मानसून के समय पानी से घिर जाने पर जहाज की तरह तैरते दिखने वाले इस महल की अनूठी वास्तुकला को देख सभी चकित रह गए। पुरातत्व गाइड ने मेहमानों को मांडू की 500 वर्ष पुरानी और उन्नत जल-प्रबंधन प्रणाली की बारीकी से जानकारी दी, जिसकी प्रतिनिधियों ने मुक्तकंठ से सराहना की। परिसर में बनी संरक्षण प्रयोगशाला में मेहमानों ने टूटी हुई ईंट, गोंद, कबिट, मेथी दाना और उड़द दाल के मिश्रण से पारंपरिक तरीके से बनने वाले प्राचीन गारे (मोर्टार) की निर्माण प्रक्रिया को समझा, जिसका उपयोग महलों की दीवारों को सदियों तक मजबूत रखने के लिए किया जाता था। :: विदेशी मेहमानों ने खुद उकेरी बाघ प्रिंट की डिजाइन :: ऐतिहासिक स्थलों को निहारने के साथ ही मेहमानों ने जहाज महल के मुख्य द्वार पर आजीविका मिशन की दीदियों द्वारा लगाए गए बाघ प्रिंट स्टॉल का अवलोकन किया। धार जिले की पहचान बन चुकी इस हस्तशिल्प कला का शिल्पकारों ने लाइव डेमोंस्ट्रेशन करके दिखाया, जिसे देखकर कुछ मेहमानों ने खुद भी सांचे के जरिए कपड़े पर डिजाइन उकेरी। शिल्पकारों ने इन खास मेहमानों को स्मृति चिह्न के रूप में बाघ प्रिंट के उत्पाद भी भेंट किए। शाम के समय जहाज महल परिसर की ऐतिहासिक प्राचीर पर एक भव्य लाइट एंड साउंड शो का आयोजन किया गया, जिसके माध्यम से सुल्तानों से लेकर राजा भोज तक के शासनकाल और मांडू के गौरवशाली इतिहास को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया गया। :: मालवी व्यंजनों के स्वाद के साथ सजी संगीत संध्या :: इस सांस्कृतिक और ऐतिहासिक सफर के समापन पर अंतर्राष्ट्रीय डेलीगेट्स के सम्मान में एक शानदार गाला डिनर और संगीत संध्या का आयोजन किया गया। इस विशेष भोज में मेहमानों को मालवा के प्रसिद्ध पारंपरिक व्यंजन जैसे दाल-बाटी और दाल-पानिया के साथ देश के अन्य राज्यों के चुनिंदा पकवान परोसे गए, जिनका विदेशी मेहमानों ने भरपूर स्वाद लिया। :: प्राचीन जल-संरक्षण को बताया मार्गदर्शक :: भ्रमण के बाद ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधिमंडल ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि मांडू न केवल भारत की अद्भुत सांस्कृतिक धरोहर है, बल्कि जलवायु परिवर्तन के इस मौजूदा दौर में प्राचीन जल-संरक्षण तकनीकों को सीखने का एक जीवंत केंद्र भी है। इस ऐतिहासिक आयोजन के दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, विधायक नीना वर्मा, इंदौर संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े और धार कलेक्टर राजीव रंजन मीना सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। प्रकाश/12 जून 2026