राज्य
13-Jun-2026


निगरानी से जुड़े अधिकारियों पर अब तक कोई एक्शन नहीं जबलपुर, (ईएमएस)। जिले में सामने आए 1.37 करोड़ रुपये के गेहूं घोटाले में अब तक प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई जरूर हुई है, लेकिन पूरे मामले में जवाबदेही को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। जांच में 5167 क्विंटल से अधिक गेहूं गायब मिलने के बाद खरीदी केंद्र प्रभारी, सहायक खाद्य अधिकारी सहित 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई| प्रशासनिक जांच में रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच भारी अंतर, फर्जी प्रविष्टियां तथा खरीदी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। इसके बाद पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि कार्रवाई के बावजूद कई सवाल अनुत्तरित हैं। खाद्य विभाग, नागरिक आपूर्ति निगम और निगरानी व्यवस्था से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को लेकर अब तक कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में गेहूं की कमी केवल निचले स्तर के कर्मचारियों की जानकारी तक सीमित नहीं हो सकती और पूरी जवाबदेही तय किए बिना घोटाले की तह तक पहुंचना कठिन होगा। यह प्रश्न भी उठ रहा है कि यदि नियमित निरीक्षण और सत्यापन की व्यवस्था प्रभावी थी तो इतनी बड़ी गड़बड़ी लंबे समय तक पकड़ में क्यों नहीं आई। उल्लेखनीय है कि इससे पहले जिले में धान खरीदी और परिवहन से जुड़े मामलों में 74 लोगों के खिलाफ विभिन्न थानों में एफआईआर दर्ज की गई थी। उस कार्रवाई को प्रदेश के बड़े खाद्यान्न घोटालों में से एक माना गया था। वर्तमान गेहूं घोटाले में भी अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच केवल एफआईआर तक सीमित रहती है या फिर उन अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों तक भी पहुंचती है जिनकी निगरानी में पूरी व्यवस्था संचालित हो रही थी। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई कर मामले को समाप्त नहीं किया जाना चाहिए। सुनील साहू / मोनिका / 13 जून 2026/ 02.19