-5.5 करोड़ रुपये का जैकपॉट जीतने के बाद भी नहीं निकाल सका रकम -आखिरकार मिला रेजिडेंस परमिट और नई जिंदगी की हुई शुरुआत रोम,(ईएमएस)। इटली में रहने वाले 36 वर्षीय नाइजीरियाई नागरिक इमेग्वे एहिजोम्वेंगी की कहानी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। एक लॉटरी टिकट ने उन्हें करोड़पति बना दिया, लेकिन कानूनी दस्तावेजों की कमी के कारण वह अपनी जीती हुई रकम तक नहीं पहुंच पा रहे थे। कई महीनों के संघर्ष के बाद अब उन्हें इटली का रेजिडेंस परमिट मिल गया है, जिसे वह लॉटरी की रकम से भी अधिक मूल्यवान मानते हैं। इमेग्वे वर्ष 2016 में नाइजीरिया से इटली पहुंचे थे। उनका सफर बेहद कठिन रहा। लीबिया के रास्ते यूरोप पहुंचने के दौरान उन्हें दो वर्षों तक बंधक बनाकर रखा गया था और फिरौती के बाद रिहाई मिली थी। इटली पहुंचने के बाद भी उनके सामने रोजी-रोटी का संकट बना रहा। वह ट्यूरिन शहर में एक सुपरमार्केट के बाहर रुमाल बेचकर और कभी-कभी भीख मांगकर अपना गुजारा करते थे। पिछले वर्ष अक्टूबर में उन्होंने 5 यूरो का एक स्क्रैचकार्ड लॉटरी टिकट खरीदा। किस्मत ने ऐसा पलटा खाया कि टिकट पर 5 लाख यूरो यानी लगभग 5.5 करोड़ रुपये का जैकपॉट निकल आया। हालांकि इस जीत के बाद उनकी परेशानियां खत्म नहीं हुईं। इटली के नियमों के अनुसार बिना वैध रेजिडेंस परमिट के बैंक खाता नहीं खोला जा सकता था और बैंक खाते के बिना लॉटरी की राशि प्राप्त करना संभव नहीं था। स्थिति और जटिल तब हो गई जब नागरिकता और कानूनी दर्जे से जुड़े मामलों में आर्थिक आत्मनिर्भरता साबित करने की आवश्यकता सामने आई। इमेगबे ने एक परिचित की मदद से राशि प्राप्त करने की कोशिश की, लेकिन वहां भी विवाद और धोखे की स्थिति उत्पन्न हो गई। बाद में समाधान निकलने पर उन्हें रकम का एक हिस्सा मिला, जिससे उन्होंने फाल्कोनारा शहर में ‘ममा अफ्रीका’ नामक एक किराना दुकान खरीदी। इस दुकान में अफ्रीकी खाद्य उत्पाद बेचे जाते हैं। मामला अदालत पहुंचने पर इमेग्वे के वकील एड्रीव पलेज्जेची ने उनके सामाजिक और आर्थिक एकीकरण के पक्ष में दलील दी। अदालत ने पाया कि इमेगबे इटैलियन भाषा अच्छी तरह बोलते हैं, ईमानदारी से व्यवसाय चला रहे हैं और समाज में सकारात्मक योगदान देने की क्षमता रखते हैं। इसके आधार पर उन्हें रेजिडेंस परमिट जारी करने का आदेश दिया गया। परमिट मिलने के बाद इमेग्वे ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी इच्छा सामान्य जीवन जीने की है। उनके शब्दों में, “मैं मेहनत करता रहूंगा और जमीन से जुड़ा रहूंगा।” उनकी कहानी इस बात का उदाहरण बन गई है कि कभी-कभी कानूनी पहचान और सम्मानजनक जीवन का अवसर, धन-दौलत से भी अधिक महत्वपूर्ण होता है। हिदायत/ईएमएस 14 जून 2026