पीएम मोदी के कार्यकाल के 12 साल पूरे होने पर रायपुर के काली मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की गई. और एनडीए के स्वागत समारोह हुआ उस समय यानि अटलजी की एनडीए की सरकार ने देश के प्रति एक जुटता दिखाई थी या मई 1998 में अमेरिका के दबाब में नहीं आया और 1992 के कारगिल युद्ध में भी अमेरिका से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया उससे कारगिल की चोटियों में छिपे आतंकवादी का जब अमेरिका ने सेटेलाईट तस्वीर ना देने के बाद भी महीनों तक युद्ध लड़ा और जीता लेकिन इस अवधी में अमेरिका ने भारत को झुका ही नहीं दिया बल्कि अपशब्दो का इस्तेमाल करना, कार्गो प्लेन में अमृतसर जैसे पवित्र स्थल जहाँ स्वर्ण टेम्पल में रोज सभी धर्मों के लोग गुरू के सामने नतमस्तक होकर आशीर्वाद लेते हैं वहाँ भारतीय जो अपने धंधा के लिए अमेरिका गए थे जो सही तरीका नहीं था लेकिन किसी का मडर नहीं किया उनके हाथों में गुलामी की जंजीरो से वहाँ उतारा बड़े ही शर्म की बात है यह 140 करोड़ लोगों का एक ऐसा भारत है जो लोकतान्त्रिक तरीके से सरकार चुनता है वहाँ शुरुआत में ही अमेरिका ने शर्मसार किया, उसके बाद ऑपरेशन सिंदूर में पता ही नहीं चला की कौन जीता बीच में अमेरिका के राष्ट्रपति का ट्विट से उसने ही सीजफायर का ऐलान किया जो गलत है क्योंकि उसमें जम्मू काश्मीर का भी जिक्र किया था आज 12 परमाणु अस्त्र रेडी तो लॉन्च मोड में देश की रक्षा के लिए तैनात है इसका पूरा श्रेय श्री स्व अटलजी को जाता है क्योंकि उन्होंने जो सोचा की पोखरण परमाणु परीक्षण करना है तो कर दिया वो देश के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया जय जवान जय किसान के बाद जय विज्ञान और भारत फिर अपने निर्णय लेने में स्वतंत्र था इसलिए कारगिल युद्ध को बीच में नहीं बल्कि अंदर तक घुस कर ख़देड़ दिया इसलिए जब तक आप अपनी सेना को उतार कर वहाँ कार्यवाही नहीं करते तब तक दुश्मन को डरा नहीं सकते हैं इसलिए निश्चित रूप से भारतीय सेना ने अपने पराक्रम का परिचय दिया लेकिन सेना के उपप्रमुख ने ऐ भी कहा की हम एक फ्रंट पर नहीं 3 फ्रंट यानि पाकिस्तान, चीन और तुर्की के साथ अकेले लड़ रहे थे आखिर रूस का साथ भारत का सैन्य सहयोग क्यो नहीं मिला ऐ आगे गंभीर रूप से सोचना चाहिए अटलजी ने कारगिल युद्ध जीतने के बाद अमेरिका को भी भरी सभा में खड़ी खोटी सुनाया जो इसप्रकार पाकिस्तान के आतंकी हरकत पर कहा था हमें मिटाने की साजिश करने वालों से कह दो, चिंगारी का खेल बुरा होता है अपने ही घर में सदा खरा होता है अमरीकी शस्त्रों से अपनी आजादी को दुनिया में कायम रख लोगे, यह मत समझो। दस बीस अरब डालर लेकर आने वाली बरबादी से तुम बच लोगे यह मत समझो। भारत माँ का शीश नहीं झुकेगा ऐ ताकत होनी चाहिए सत्ता आती है और जाती है लेकिन लोग उसी को याद करते हैं जो अपनी मात्रभूमि की रक्षा के लिए हॅसते हॅसते बलिदान दे देते हैं इसलिए भारत अंग्रेज से भारत माता को आजादी दिलवाई और अमर हो गए अभी जो अमेरिका ने 3भारतीय की एक तरह से निर्दोष नागरिकों की हत्या कर दि ऐ गलत किया है क्योंकि वो भी हमारे भाई ही हैं उनके रोते बिलखते परिवार की क्या हालत है देख कर बहुत दर्द हुआ और इसपर दूसरे देश से तीखी प्रतिक्रिया आ रही है और ऐसे में हमें भी क़ोई उचित निर्णय लेने का अधिकार है और लेना भी चाहिए, पश्चिम एशिया में ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिकी नाकेबंदी अभियान के दौरान तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई है.ऐ बहुत ही दुःखद और निंदनीय है जिसकी जितनी भी आलोचना करें कम है अटलजी क्या डरे थे अमेरिका से, बिल्कुल नहीं हमें हमेशा अपने देश की रक्षा के लिए क़ोई भी बलिदान देना हो उससे बिलकुल नहीं घबराना चाहिए क्योंकि भारत में एक ऐसा इतिहास रहा है जो अपने मात्रभूमि के लिए शहीद होना पसंद किए लेकिन बड़ी से बड़ी ताकतों से भी नहीं डरे, मात्रभूमि के प्रति हमें हमेशा अपने हितों की रक्षा करनी चाहिए क्योंकि देश और देश के नागरिक की सुरक्षा करना हमारा दायित्व है जो हमें भगवान राम ने सिख्यया है इतना संघर्ष कर ही रावण जैसे शक्तिशाली ताकतों के आगे नहीं झुके बहादुरी से सामना किया और ऐ हमारी मात्रभूमि पर दुष्टो से मुक़्त करने के लिए किया जिसे लोग सदियों तक पुजेंगे क्योंकि सत्य का रास्ता चुना और सही और गलत का अंतर बताया और गलत लोगों से लड़ने का तरीका बताया। (यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है) .../ 15 जून /2026